ग्लोबल फेस्टिवल 2026: बहरोड के गंडाला गांव पहुंचे 12 देशों के मेहमान, शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बच्चों से हुए रूबरू
महिलाओं ने मंगलगीत गाए, बच्चों ने तिलक लगाकर अतिथियों का अभिनंदन किया और बुजुर्गों ने साफा पहनाकर सम्मान प्रकट किया.

Published : February 26, 2026 at 10:00 AM IST
|Updated : February 26, 2026 at 10:12 AM IST
बहरोड : जिले के बहरोड क्षेत्र के गंडाला गांव में आयोजित ग्लोबल फेस्टिवल 2026 के तहत 12 देशों के 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का दौरा रहा. इस अवसर पर गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला. ग्रामीणों ने पारंपरिक अंदाज में मेहमानों का जोरदार स्वागत किया. महिलाओं ने मंगलगीत गाकर इनका स्वागत किया तो वहीं बच्चों ने अतिथियों के माथे पर तिलक लगाकर उनका अभिनंदन किया. बुजुर्गों ने राजस्थानी आन-बान और शान का प्रतीक 'साफा' पहनाकर विदेशी डेलीगेट्स का सम्मान किया. पूरे कार्यक्रम में गांव की एकजुटता और भारतीय संस्कृति की झलक स्पष्ट दिखाई दी.
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि भारत आने के बाद राजस्थान में जिस आत्मीयता और सम्मान के साथ उनका स्वागत किया गया, वह उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव है. उन्होंने ग्रामीणों की सादगी, अपनापन और सांस्कृतिक परंपराओं की खुलकर सराहना की. विदेशी मेहमान ग्रामीण आतिथ्य से अभिभूत नजर आए और कई सदस्यों ने कहा कि यहां का स्वागत उनके दिल को छू गया.
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टीम के लीडर पीयूष पंडित ने बताया कि 12 देशों का 21 सदस्यों का डेलिगेशन भारत आया है, जहां सबसे पहले राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, फरीदाबाद में कार्यक्रम होगा. ग्लोबल फेस्टिवल की टीम का मुख्य उद्देश्य शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है. प्रतिनिधिमंडल के सदस्य गांव के स्कूल में पहुंचकर विद्यार्थियों के साथ संवाद करेंगे. इस दौरान बच्चों की शिक्षा, कौशल विकास और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर चर्चा की जाएगी. टीम ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसरों से जोड़ने और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सुझाव देगी.

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बच्चे मौजूद रहे. ग्रामीणों ने अपने स्तर पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं, जिससे विदेशी मेहमानों को राजस्थान की लोक संस्कृति से रूबरू होने का अवसर मिला. इस आयोजन से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है. स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों से गांव के बच्चों को नई सोच और नई दिशा मिलेगी. शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग और सांस्कृतिक संवाद के माध्यम से ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है.


