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बिहार में पथ निर्माण मंत्री बदलते गए लेकिन एक भी एक्सप्रेसवे नहीं बन पाया, देरी की वजह क्या?

बिहार में कई पथ निर्माण मंत्री बदल गए लेकिन आजतक एक भी एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा नहीं हुआ. आखिर क्यों? पढ़ें पूरी खबर..

Expressways in Bihar
बिहार में एक्सप्रेसवे बनने में देरी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : July 2, 2026 at 12:49 PM IST

10 Min Read
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पटना: बिहार में पिछले कई सालों से एक्सप्रेसवे की चर्चा हो रही है लेकिन एक भी एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा नहीं हुआ. लक्ष्य लगातार बढ़ रहा है. अब 2027 और 2028 लक्ष्य को लेकर काम हो रहा है. सात निश्चय-3 में 2030 लक्ष्य निर्धारित किया गया है. वहीं पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में पिछले एक दशक में ही 9 एक्सप्रेसवे ऑपरेशनल है. 13 एक्सप्रेसवे निर्माण के विभिन्न चरणों में है. कुल मिलाकर 22 एक्सप्रेसवे को अंतिम रूप देने की तैयारी हो रही है.

बिहार में भी आधा दर्जन एक्सप्रेसवे पर काम हो रहा है, जिसमें कहीं जमीन को लेकर विवाद है तो कहीं एलाइनमेंट को लेकर और लगने वाली राशि को लेकर भी बड़ी समस्या है. हालांकि सरकार का दावा है कि एक्सप्रेसवे पर तेजी से काम हो रहा है और केंद्र से भी मदद मिल रही है. जरूरत पड़ेगी तो सरकार बाजार से ऋण भी लेगी. विशेषज्ञों की माने तो जमीन अधिग्रहण सबसे बड़ी समस्या लेकिन बिहार के विकास के लिए एक्सप्रेस वे है जरूरी.

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आधा दर्जन एक्सप्रेसवे पर काम जारी (ETV Bharat)

पथ निर्माण मंत्री बदलते गए: पिछले एक दशक में बिहार में कई पथ निर्माण मंत्री हुए. नंद किशोर यादव, तेजस्वी यादव, विजय कुमार सिन्हा, नितिन नबीन और अब इंजीनियर शैलेंद्र. वैसे बिहार में आधा दर्जन एक्सप्रेसवे पर काम हो रहा है. विधानसभा चुनाव के समय खूब विज्ञापन भी दिया गया और यह भी कहा गया कि इस पर 1 एक लाख 18849 करोड़ से अधिक की राशि आवंटित कर दी गई है.

इन 6 एक्सप्रेसवे पर चल रहा काम:

  1. रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे: 702 किलोमीटर में इस एक्सप्रेसवे का निर्माण होगा. इस पर 40000 करोड़ की राशि खर्च होगी.
  2. पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे: 250 किमी में बनेगा और इस पर 28415 करोड़ की राशि खर्च होगी.
  3. वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे: 690 किलोमीटर में इसका निर्माण होगा और इस पर 48415 करोड़ की राशि खर्च होगी.
  4. गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे: इस एक्सप्रेसवे का निर्माण 600 किलोमीटर में होगा और इस पर 37465 करोड़ की राशि खर्च होगी.
  5. पटना-बेतिया एक्सप्रेसवे: इसका निर्माण 164 किलोमीटर में होगा. बिहार में इस पर 6000 करोड़ की राशि खर्च होगी.
  6. आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे: 189 किलोमीटर में इसका निर्माण हो रहा है. इस पर 5000 करोड़ से अधिक की राशि खर्च होने की संभावना है.

इसके अलावे बक्सर-भागलपुर और मुंगेर से भागलपुर तक गंगा एक्सप्रेसवे की भी घोषणा की गई है. इसके साथ ही पटना रिंग रोड पर भी काम होना है. जिसमें डेढ़ सौ किलोमीटर की लंबाई में सिक्स लेन सड़क का निर्माण होगा और इस पर 15000 करोड़ की राशि खर्च होगी. गंगा सोन में भी पुल बनाए जाएंगे और कई एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी भी इससे होगी.

आधा दर्जन एक्सप्रेसवे में से चार एक्सप्रेसवे की लंबाई 1575 किलोमीटर है और इसके निर्माण पर 84 हजार 734 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इसमें बिहार में लंबाई 1063 किलोमीटर होगी और इस पर 59 हजार 173 करोड़ रुपये खर्च होंगे लेकिन सबसे बड़ी चुनौती जमीन अधिग्रहण की है. कई जगह जमीन के कारण पेंच फंसा हुआ है. ऐसे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जमीन अधिग्रहण को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के साथ सभी डीएम को विशेष निर्देश दिया है. जिन एक्सप्रेसवे की सबसे अधिक चर्चा है उसे बिहार की सूरत बदल जाएगी.

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बिहार में बनेंगे 6 एक्सप्रेसवे (ETV Bharat)

गोरखपुर-सिलीगुड़ी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे: बिहार के आठ जिलों पश्चिमी एवं पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया एवं किशनगंज से होकर गुजरेगा. 600 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का 415 किमी हिस्सा बिहार में होगा। इसके लिए 100 मीटर चौड़ाई में जमीन अधिग्रहण किया जा रहा है.

रक्सौल-हल्दिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे: नेपाल बॉर्डर पर रक्सौल में अवस्थित अंतर्राष्ट्रीय चेक पोस्ट से निकटतम बंदरगाह हल्दिया से त्वरित संपर्कता प्रदान करने के दृष्टिकोण से इस परियोजना का निर्माण किया जा रहा है. 702 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का 367 किमी हिस्सा बिहार में पड़ेगा. यह बिहार में पूर्वी चंपारण, शिवहर, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, जमुई तथा बांका जिलों से होकर गुजरेगा। इसके लिए 100 मीटर चौड़ाई में भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है.'

पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे: इसे पटना रिंग रोड में प्रस्तावित दिघवारा ब्रिज से प्रारंभ होकर पूर्णिया तक बनाया जाएगा. यह 250 किमी लंबा एक्सप्रेसवे होगा, जो सारण, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा, मधेपुरा एवं पूर्णिया जिलों से होकर गुजरेगा। इसके लिए 100 मीटर चौड़ाई में भू-अर्जन किया जाना है.

आमस-दरभंगा एक्सप्रेस-वे: इस एक्सप्रेसवे से बोधगया-राजगीर की संपर्कता बढ़ाने के लिए 4 लेन स्तर का निर्माण किया जाना है. इसके लिए 45 मीटर चौड़ाई में भूमि अधिग्रहण किया गया है. आमस दरभंगा परियोजना ऐसे तो 2024 में ही पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन 2026 में भी अब तक पूरा नहीं हुआ है लेकिन विभाग के अधिकारी कर रहे हैं कि 2027 में यह परियोजना पूरी हो जाएगी.

सात निश्चय-3 में 2030 तक का लक्ष्य: 2025 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साथ निश्चय तीन के तहत 5 एक्सप्रेसवे बनाने के लिए कैबिनेट से मंजूरी दी और इसे 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य किया. तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक्सप्रेसवे को लेकर लगातार समीक्षा करते रहे हैं. 2024 में बिहार में बन रहे चार एक्सप्रेसवे की समीक्षा की थी और काम में तेजी लाने का निर्देश दिया था.

2025 में केंद्र सरकार के तरफ से बजट में बिहार में और एक्सप्रेस में निर्माण की अनुमति दी गई. मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने से पहले इस साल अप्रैल में नीतीश कुमार पटना-बेतिया एक्सप्रेसवे के निर्माण स्थल पर जा कर निरीक्षण किया था. इस एक्सप्रेसवे का पहला खंड अप्रैल 2027 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है लेकिन कई जगह जमीन के अधिकरण के कारण इसमें भी पेंच है.

वैसे पटना-बेतिया एक्सप्रेसवे के बन जाने से पटना से बेतिया की दूरी 3 घंटे में पूरा हो सकेगा और 4 जिले वैशाली सहारनपुर भी चंपारण और पश्चिमी चंपारण की सूरत बदल जाएगी. बिहार में बन रहे एक्सप्रेस वे सिक्स लेन और फोर लेन वाले हैं.

सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद एक्सप्रेसवे को लेकर समीक्षा भी हुई है और बिहार में भी गंगा एक्सप्रेसवे बनाने का फैसला हुआ है. 125 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे होगा और या मुंगेर से भागलपुर सबौर तक निर्माण होगा हाइब्रिड एन्युटी मोड के तहत 3 सालों में पूरा करने का निर्देश सम्राट चौधरी ने दिया है.

एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट के पूर्व डायरेक्टर प्रो. डीएम दिवाकर का कहना कि फर्राटेदार सफर के लिए एक्सप्रेस वे आज बहुत जरूरी है. उत्तर प्रदेश ने यह करके दिखाया है. साउथ के राज्यों में भी सड़कों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर काफी काम हुआ है और उनकी प्रगति में सड़कों की बड़ी भूमिका रही है. बिहार में नीतीश कुमार ने सड़कों पर काम किया है लेकिन सिक्स लेन एक्सप्रेसवे अभी बिहार में नहीं है.

वे कहते हैं कि जिन इलाकों से एक्सप्रेसवे गुजरेगी, औद्योगिक गलियारा और कई तरह की व्यवसायी गतिविधियां बढ़ सकती है. आवागमन बड़े शहरों से सुलभ हो जाएगा तो इसके कारण कई तरह के लाभ होंगे लेकिन जितना विलंब होगा, निर्माण कॉस्ट बढ़ेगा और दूसरे राज्यों से हम इसमें लगातार पिछड़ते जाएंगे. इन्वेस्टमेंट नहीं होने से नौकरी रोजगार पर भी असर पड़ेगा.

"कई एक्सप्रेसवे की चर्चा हम लोग जरूर सुनते रहे हैं. समीक्षा भी होती रही है. विशेषकर चुनाव से पहले एनडीए के नेता बड़ी-बड़ी घोषणा करते हैं. डबल इंजन की सरकार में कई तरह के वादे होते रहे हैं लेकिन एक भी एक्सप्रेस वे अभी फंक्शनल नहीं है, क्योंकि इस पर बड़ी राशि खर्च होगी."- प्रो. डीएम दिवाकर, पूर्व डायरेक्टर, एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट

देरी की क्या है वजह?: पटना कॉलेज के पूर्व प्राचार्य और अर्थशास्त्री एनके चौधरी का कहना है कि केंद्र सरकार ने पिछले बजट में भी बिहार के लिए तीन एक्सप्रेसवे की घोषणा की थी. पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे इन दिनों चर्चा में भी है. बिहार में एक्सप्रेसवे की घोषणा तो कर दी गई लेकिन जमीन अधिग्रहण में सबसे बड़ी परेशानी हो रही है. कई जगह किसानों के विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है. बेहतर होगा सरकार को किसानों के अधिक से अधिक हित का ध्यान रखना पड़ेगा.

"हाल में जमीन अधिग्रहण के लिए कई तरह के प्रावधान किए गए हैं. राशि भी बढ़ाई गई है लेकिन अभी भी काफी कम है और राशि देने में भी काफी समय लगाया जाता है. सम्राट चौधरी सरकार को यदि निवेश आमंत्रित करना है तो एक्सप्रेसवे पर काम में तेजी लाना होगा और जो भी रूकावटे हैं. खासकर जमीन अधिग्रहण को लेकर उसको प्राथमिकता में रखकर दूर करना होगा."- एनके चौधरी, अर्थशास्त्री

वहीं बिहार के पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र का कहना है कि हम लोग 5 घंटे के लक्ष्य को पूरा कर चुके हैं. सुदूर इलाकों से पटना पहुंचने में अब 3:30 घंटे से 4 घंटे के लक्ष्य को लेकर काम कर रहे हैं और उसमें एक्सप्रेसवे की बड़ी भूमिका होगी. वे कहते हैं, 'केंद्र सरकार की तरफ से सहयोग मिल रहा है और कई जगह तेजी से काम चल रहा है. हम लोग लगातार इसकी निगरानी कर रहे हैं. आने वाले कुछ सालों में जमीन पर दिखने भी लगेगा.'

कर्ज लेने की भी तैयारी: बिहार सरकार विकास के लिए कई सेक्टर में कर्ज ले रही है. अभी हाल ही में कैबिनेट में टाउनशिप के लिए एक लाख करोड़ का कर्ज लेने का फैसला लिया है. वहीं रोड सेक्टर के लिए 21000 करोड़ ऋण लेने की तैयारी है, जिससे एक्सप्रेसवे को भी गति मिल सके.

2030 तक का लक्ष्य: बिहार में एक्सप्रेस वे की चर्चा खूब होती है . बल इंजन की सरकार में विधानसभा चुनाव के समय इसके निर्माण का शिलान्यास भी किया गया लेकिन अधिकांश एक्सप्रेस में जमीन के विवाद में उलझा हुआ है. कुछ पर्यावरण के कारण अटका हुआ है तो कुछ एलाइनमेंट को लेकर क्योंकि एक्सप्रेस वे निर्माण पर बड़ी राशि खर्च होनी है. फिलहाल 2030 तक पांच एक्सप्रेसवे के पूर्ण हो जाने की बात कही जा रही है.

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