खतरे में बच्चों की जान! बिना फायर सेफ्टी के चल रहे कोचिंग संस्थान, अग्निशमन विभाग के ऑडिट में खुलासा
देहरादून अग्निशमन विभाग के फायर सेफ्टी ऑडिट में कोचिंग सेंटरों के अंदर कई खामियां सामने आई है, जिसके बाद उन्हें नोटिस भेजे गए.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : June 30, 2026 at 8:07 PM IST
देहरादून: शिक्षा का हब कहे जाने वाले देहरादून के कई कोचिंग संस्थान बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं. अग्निशमन विभाग की ओर विशेष फायर सेफ्टी ऑडिट अभियान चलाया जा रहा है. इस दौरान अग्निशमन विभाग की टीम ने 28 दिन में 315 प्रतिष्ठानों का ऑडिट किया, जिसमें सबसे अधिक जिले के कोचिंग संस्थानों में अग्नि सुरक्षा संबंधी गंभीर कमियां पाई गई. अग्निशमन विभाग ने सभी संस्थाओं को 15 दिन का नोटिस जारी कर निर्धारित समय में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं.
दरहसल, देहरादून को शिक्षा का हब कहा जाता है. यहीं कारण है कि देशभर से बड़ी संख्या में छात्र देहरादून में पढ़ने के लिए आते हैं. कई बड़े कॉलेज और यूनिवर्सिटी के अलावा देहरादून में सैकड़ों की संख्या में कोचिंग संस्थान भी हैं, लेकिन अधिकांश कोचिंग सेंटर ऐसे है, जो फायर सेफ्टी के मानक नहीं पूरे नहीं करते हैं.
अग्निशमन विभाग के ऑडिट में 315 में से करीब 135 प्रतिष्ठान ऐसे पाए गए, जहां फायर सेफ्टी मानकों का पालन नहीं किया गया था. इसीलिए उन्हें नोटिस जारी किए गए हैं. सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि
55 कोचिंग संस्थानों में उपकरण या तो पर्याप्त नहीं मिले या उनके समय पर सर्विस नहीं कराई गई थी. साथ ही कई से संस्थानों में आपातकालीन विकास मार्ग अवरुद्ध मिले, जबकि कुछ संस्थानों पर फायर अलार्म आपातकालीन संकेतक और सुरक्षा संबंधी अन्य आवश्यक व्यवस्था भी अधूरी पाए गए.
अग्निशमन विभाग के अनुसार उन्होंने अब तक 312 प्रतिष्ठानों का फाइल सेफ्टी ऑडिट किया है, जिसमें 60 कोचिंग सेंटर,122 होटल, 48 रेस्टोरेंट,16 होमस्टे और बाकी अन्य प्रतिष्ठान शामिल है. वही अग्निशमन विभाग के सीएफओ अभिनव त्यागी का कहना है कि विभाग द्वारा करीब 315 संस्थाओं का ऑडिट किया गया है. विभाग द्वारा सभी स्थानों का ऑडिट कराया जा रहा है. क्योंकि आग कहीं भी लग सकती है.
जिन सस्थानों ने फायर सेफ्टी के मानक पूरे नहीं किए थे, नोटिस देकर 15 दिन का समय दिया गया है. यदि 15 दिन के अंदर संस्थान द्वारा सकारात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगा. सीएफओ अभिनव त्यागी ने बताया कि कहीं संस्थानों के पास तीन साल की फायर एनओसी तो थी, लेकिन फायर इंक्यूमेंट के मेंटेनेंस भी नहीं कराई है.
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