ठंड, भूख और टूटती सांसें… फिर भी सरकार खामोश, डीएड अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन आमरण अनशन
सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग, रायपुर के माना-तूता धरना स्थल पर कड़ाके की ठंड में डीएड अभ्यर्थी आमरण अनशन कर रहे हैं.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : December 28, 2025 at 2:34 PM IST
रायपुर. माना–तूता धरना स्थल पर प्रदेश भर से आए 200 से अधिक डीएड अभ्यर्थी 24 दिसंबर से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर हैं. हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि दर्जनभर से ज्यादा अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ गई. किसी का बीपी बढ़ गया, कोई खड़ा भी नहीं हो पा रहा. एंबुलेंस बुलाकर उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, ड्रिप चढ़ी और वही कमजोर शरीर दोबारा अनशन स्थल पर आ बैठा, क्योंकि मांग अभी अधूरी है.
बीमार साथियों को देख फूट पड़ा दर्द: धरना स्थल पर भावनात्मक दृश्य किसी का भी दिल पसीजा देने वाला है. बीमार अभ्यर्थियों को संभालते उनके साथी रोते-बिलखते नजर आए. आंखों में डर, चेहरे पर बेबसी और दिल में एक ही सवाल, क्या सरकार को हमारी जान से भी फर्क नहीं पड़ता? सहयोगियों की हालत देखकर कई अभ्यर्थी खुद को संभाल नहीं पा रहे, लेकिन फिर भी अनशन तोड़ने को तैयार नहीं हैं.
न्याय के हर दरवाज़े पर दस्तक, फिर भी सन्नाटा: डीएड अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने पहले मांगपत्र दिया, फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाईकोर्ट ने दो महीने में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का आदेश भी दिया, लेकिन महीनों बाद भी सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया. आज भी 2300 पद रिक्त हैं और अभ्यर्थी बेरोजगार.
आश्वासन मिले, समाधान नहीं: स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने मांगों को न्यायोचित बताया, समाधान का भरोसा दिया. इस बीच शुक्रवार रात कुछ अभ्यर्थियों की मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात भी हुई, लेकिन कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला. यही वजह है कि अब अभ्यर्थियों का धैर्य टूट चुका है. उनका साफ कहना है, अब सिर्फ वादों से काम नहीं चलेगा, हमें कार्रवाई चाहिए.
सरकार से सवाल, क्या लाशें गिरने के बाद जागेगी व्यवस्था?: अनशन कर रहे अभ्यर्थी कह रहे हैं कि जब तक सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होगी, अनशन जारी रहेगा. सवाल यह है कि क्या सरकार किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रही है? यह आंदोलन सिर्फ नौकरी का नहीं, बल्कि न्याय और संवेदनशील शासन की मांग है. तूता धरना स्थल पर बैठे डीएड अभ्यर्थियों की कमजोर होती सांसें सरकार से जवाब मांग रही हैं, क्या हमारी मांगें सुनने के लिए किसी की जान जाना जरूरी है?

