डीएड अभ्यर्थियों के आमरण अनशन पर सरकार संवेदनशील: डिप्टी सीएम अरुण साव
डीएड आमरण अनशन पर छत्तीसगढ़ में सियासी घमासान तेज, अभ्यर्थियों की सरकार को चेतावनी, मौत हुई तो सरकार जिम्मेदार, अरुण साव बोले सरकार संवेदनशील

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : January 1, 2026 at 4:30 PM IST
रायपुर: छत्तीसगढ़ में डीएड अभ्यर्थियों का आमरण अनशन अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है. नियुक्ति की मांग को लेकर कई दिनों से चल रहे इस आंदोलन पर अब सियासत तेज हो गई है. एक तरफ उपमुख्यमंत्री अरुण साव सरकार को संवेदनशील बता रहे हैं, तो दूसरी ओर भूख, ठंड और गिरती सेहत से जूझ रहे अभ्यर्थी सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए साफ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि किसी की मौत हुई, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी.
D.Ed अभ्यर्थियों के अनशन पर सरकार संवेदनशली: उपमुख्यमंत्री अरुण साव
D.Ed अभ्यर्थियों के आमरण अनशन पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार पूरी तरह संवेदनशील है और राज्य के हर नागरिक की इच्छा एवं आकांक्षाओं के अनुरूप काम कर रही है. उन्होंने कहा कि सरकार के संज्ञान में सभी विषय हैं और समय के साथ हर मामले में निर्णय लेकर समाधान किया जा रहा है.
कांग्रेस पर अरुण साव का हमला
D.Ed अभ्यर्थियों के आंदोलन को यूथ कांग्रेस के समर्थन पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कारनामों का खामियाजा छत्तीसगढ़ के युवाओं ने भुगता है.चाहे वह पीएससी घोटाला हो, भर्ती घोटाले हों या अन्य अनियमितताएं. साव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में मौजूदा सरकार युवाओं और सभी वर्गों के हित में लगातार फैसले ले रही है.
24 दिसंबर से आमरण अनशन, बिगड़ती सेहत बनी चिंता
D.Ed अभ्यर्थी 24 दिसंबर से नियुक्ति की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे हैं. लगातार भूख की वजह से कई आंदोलनकारियों की तबीयत बिगड़ चुकी है, जिन्हें अस्पताल ले जाकर ड्रिप चढ़ाई गई. इलाज के बाद वे फिर धरना स्थल लौट आए और अनशन जारी रखा.
ठंड और भूख ने बढ़ाई मुश्किलें
कड़ाके की ठंड ने आंदोलनकारियों की परेशानी और बढ़ा दी है. सबसे गंभीर स्थिति महिलाओं और बच्चों की बताई जा रही है, क्योंकि कई अभ्यर्थी अपने पूरे परिवार के साथ धरना स्थल पर डटे हुए हैं.
खून से लिखा पत्र, सरकार से आखिरी गुहार
आमरण अनशन के दौरान अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम खून से पत्र लिखकर अपनी नियुक्ति की मांग रखी है. इन पत्रों के जरिए उन्होंने सरकार से आखिरी उम्मीद जताई है कि उनकी पीड़ा को समझते हुए जल्द कोई ठोस फैसला लिया जाएगा.
भूख हड़ताल में मौत हुई तो जिम्मेदार सरकार होगी
ठंड, भूख और गिरती सेहत के बीच अभ्यर्थियों का कहना है कि अब उनके पास खोने को कुछ नहीं बचा है. वे घर से यह कहकर निकले हैं कि नौकरी लेकर ही लौटेंगे. अभ्यर्थियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि आंदोलन के दौरान किसी की जान जाती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी.
हाईकोर्ट के आदेश का हवाला, सरकार पर लापरवाही के आरोप
अभ्यर्थियों का आरोप है कि हाईकोर्ट ने रिक्त पदों पर दो महीने के भीतर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का स्पष्ट आदेश दिया था. इसके बावजूद महीनों बीत जाने के बाद भी सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया. आज भी करीब 2300 पद रिक्त हैं और हजारों प्रशिक्षित युवा बेरोजगारी की मार झेलने को मजबूर हैं.

