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आमरण अनशन का 57वां दिन, अंगारों पर चले आंदोलनकारी, पुलिस ने किया वाटर कैनन का इस्तेमाल, हिरासत में लिए गए अभ्यर्थी भेजे गए जेल

पीसीसी चीफ दीपक बैज ने देर रात आंदोलनकारियों से की मुलाकात. अभ्यर्थियों ने दिया सरकार को अल्टीमेटम.

DEd candidates hunger strike
हिरासत में कई अभ्यर्थी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : February 19, 2026 at 7:53 AM IST

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Updated : February 19, 2026 at 9:18 AM IST

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रायपुर: सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के 2300 रिक्त पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर, डीएड प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का आमरण अनशन 57वें दिन भी जारी रहा. शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ यह आंदोलन अब भावनात्मक और उग्र मोड़ लेता जा रहा है. शासन-प्रशासन की ओर से ठोस निर्णय नहीं आने से आक्रोशित अभ्यर्थियों ने अंगारों पर चलकर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया. स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि पुलिस और फायर ब्रिगेड को हस्तक्षेप करना पड़ा, कई अभ्यर्थी घायल हुए और सभी को हिरासत में लेकर सेंट्रल जेल भेज दिया गया.



आमरण अनशन का 57वां दिन

लगातार 57 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे अभ्यर्थियों की शारीरिक और मानसिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है. शासन की ओर से सकारात्मक पहल नहीं होने पर आंदोलनकारियों ने सामूहिक रूप से आग जलाकर अंगारों पर चलकर विरोध प्रदर्शन किया. स्थिति बिगड़ती देख पुलिस प्रशासन और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और पानी और अग्निशमन उपकरणों की मदद से आग बुझाई. इसके बाद पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच झड़प हुई, जिसमें 4 अभ्यर्थी गंभीर रूप से घायल होकर बेहोश हो गए. उन्हें अभनपुर अस्पताल ले जाया गया. बाद में सभी अभ्यर्थियों को बस में बैठाकर हिरासत में लेते हुए सेंट्रल जेल भेज दिया गया.

हिरासत में कई अभ्यर्थी (ETV Bharat)

अभ्यर्थियों का आरोप है कि वे लगातार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से मिल रहे हैं, लेकिन हर स्तर पर सिर्फ आश्वासन मिल रहा है. शिक्षा मंत्री से मिलने पर वित्त विभाग का हवाला, वित्त विभाग से मिलने पर शिक्षा विभाग से प्रस्ताव की बात कही जा रही है.

DEd candidates hunger strike
हिरासत में कई अभ्यर्थी (ETV Bharat)


मुख्यमंत्री स्तर पर वित्तीय कमी का कारण बताया गया

शासन की ओर से हो रही देरी के चलते हजारों प्रशिक्षित युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है. अभ्यर्थियों का कहना है कि 1600 से अधिक एसटी पद रिक्त हैं जिसके चलते आदिवासी युवाओं में आक्रोश है. सबसे गंभीर मुद्दा यह है कि सहायक शिक्षक भर्ती में 1600 से अधिक पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के रिक्त हैं. कोर्ट के आदेशों के बावजूद इन पदों पर नियुक्ति नहीं की गई है, जिससे आदिवासी वर्ग के युवाओं और उनके परिजनों में गहरी नाराजगी है.

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हिरासत में कई अभ्यर्थी (ETV Bharat)



''न्यायालय के आदेशों के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की जा रही''

अभ्यर्थियों का कहना है कि उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की जा रही. उनका आरोप है कि शासन की निष्क्रियता से हजारों प्रशिक्षित युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो गया है. आंदोलनकारियों का दर्द अब शब्दों से आगे निकल चुका है. कई अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल और शिक्षा मंत्री को अपने खून से पत्र लिखकर एक ही मांग रखी है कि “हमें नियुक्ति पत्र चाहिए.” उनका कहना है कि “हम घर से यह सोचकर निकले हैं कि या तो नौकरी लेकर लौटेंगे, या फिर हमारी लाश जाएगी.”

DEd candidates hunger strike
हिरासत में कई अभ्यर्थी (ETV Bharat)



कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की जेल में मुलाकात

पीसीसी चीफ दीपक बैज कल देर रात सेंट्रल जेल पहुंचे और अभ्यर्थियों से मुलाकात की. उन्होंने उनकी मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को तत्काल संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करने की अपील की.

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हिरासत में कई अभ्यर्थी (ETV Bharat)



राज्यपाल से राष्ट्रपति तक लगाई गुहार

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और राज्यपाल को स्पीड पोस्ट के माध्यम से पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है. 24 सितंबर से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे अभ्यर्थियों का कहना है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद नियुक्ति नहीं होना न्याय के साथ अन्याय है. इससे पहले मंत्री गजेंद्र यादव के बंगले का घेराव भी किया गया था, जिसके बाद पुलिस ने बलपूर्वक अभ्यर्थियों को हटाकर जेल भेज दिया था.

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हिरासत में कई अभ्यर्थी (ETV Bharat)


अभ्यर्थियों की मांगें

  • सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के 2300 रिक्त पदों पर पात्र डीएड अभ्यर्थियों की शीघ्र नियुक्ति की जाए
  • उच्च एवं सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का तत्काल पालन किया जाए
  • 1600 से अधिक अनुसूचित जनजाति वर्ग के रिक्त पदों पर प्राथमिकता से नियुक्ति दी जाए

सरकार को चेतावनी

अभ्यर्थियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है, ''यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी. यह सिर्फ नौकरी की मांग नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के भविष्य, उनके परिवारों की उम्मीद और न्याय की पुकार का सवाल बन चुका है''. अब देखना यह है कि 57 दिनों से तप रहे इस आंदोलन को सरकार कब तक अनसुना करती है.

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Last Updated : February 19, 2026 at 9:18 AM IST