रायपुर में आमरण अनशन पर डीएड अभ्यर्थी, कहा- नौकरी नहीं तो मौत सही, मां की गोद में बच्चा, पेट में भूख और आंखों में आंसू
डीएड अभ्यर्थी माना तूता धरना स्थल पर 24 दिसंबर से आमरण अनशन पर बैठे हैं. इस बीच कई लोगों की तबीयत भी बिगड़ी है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : December 29, 2025 at 9:22 PM IST
रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सरकार की बेरुखी के खिलाफ बेरोजगार डीएड–बीएड अभ्यर्थियों का सब्र अब टूट चुका है. माना–तूता धरना स्थल पर 24 दिसंबर से आमरण अनशन पर बैठे अभ्यर्थी दो टूक शब्दों में कह रहे हैं कि नौकरी दो या जान ले लो, अब बेरोजगारी बर्दाश्त नहीं. ठंड, भूख और बिगड़ती सेहत के बीच यह आंदोलन अब सरकार के लिए एक बड़ी मानवीय और राजनीतिक चुनौती बन गया है.
भूख, ठंड और बेबसी के बीच आंदोलन: बीते कई दिनों से अभ्यर्थियों ने अन्न-जल का त्याग कर दिया है. हालात ऐसे हैं कि दो दर्जन से ज्यादा अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ चुकी है. किसी का बीपी बढ़ गया, कोई खड़ा होने की हालत में नहीं है. एंबुलेंस से अस्पताल ले जाकर ड्रिप चढ़ाई गई, लेकिन मांग अधूरी होने के कारण वही कमजोर शरीर दोबारा धरना स्थल पर आ बैठा.

महिला अभ्यर्थियों की टूटती आवाज: धरना स्थल पर मौजूद महिला अभ्यर्थी भावुक होकर रो पड़ीं. उनका कहना है कि “जब तक नौकरी नहीं मिलेगी, आंदोलन खत्म नहीं होगा, चाहे जान ही क्यों न चली जाए.” कई महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर धरने पर बैठी हैं. कड़ाके की ठंड में बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे रहना मजबूरी बन गया है.

हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सरकार मौन: डीएड अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने पहले मांगपत्र सौंपा, फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाईकोर्ट ने दो महीने में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दिए थे, लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया. आज भी लगभग 2300 पद रिक्त हैं और हजारों अभ्यर्थी बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं.
धरना, प्रदर्शन, गुहार, सब बेअसर: अभ्यर्थियों का आरोप है कि वे लगातार सरकार को अपनी मांगों से अवगत कराते रहे. धरना दिया, प्रदर्शन किया, लेकिन उनकी आवाज अनसुनी कर दी गई. इसी उपेक्षा ने उन्हें अनिश्चितकालीन आमरण अनशन के लिए मजबूर कर दिया.

सरकार से सीधा सवाल: प्रदेश भर से आए 200 से अधिक डीएड–बीएड अभ्यर्थियों का यह आंदोलन अब चेतावनी बन चुका है. सवाल साफ है क्या सरकार किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रही है

अब देखना यह है कि बेरोजगार युवाओं की इस पुकार पर सरकार कब और क्या फैसला लेती है.

