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आजमगढ़ में 27 साल पुराने शिया-सुन्नी दंगे में फैसला; 12 दोषियों को उम्रकैद, जुर्माना

30 अप्रैल 1999 को मिला था अकबर अली का सिर कटा शव, 13 फरवरी को सभी आरोपी दोषी करार.

आजमगढ़ दंगे में 12 दोषियों को उम्रकैद.
आजमगढ़ दंगे में 12 दोषियों को उम्रकैद. (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : February 17, 2026 at 7:33 PM IST

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आजमगढ़: जिले के मुबारकपुर में वर्ष 1999 में हुए शिया-सुन्नी दंगे में 27 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय ने मंगलवार को 12 दोषियों को आजीवन कारावास और प्रत्येक पर ₹66,500 अर्थदंड की सजा सुनाई है. इससे पूर्व 13 फरवरी को अदालत सभी आरोपियों को दोषी करार दे चुकी थी.

अभियोजन के अनुसार वादी नासिर हुसैन ने 30 अप्रैल 1999 को मुबारकपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनके चाचा अली अकबर, निवासी पूरा ख्वाजा, 27 अप्रैल 1999 से लापता थे. 28 अप्रैल को उनके पुत्र जैगम ने गुमशुदगी की सूचना दी थी. 30 अप्रैल 1999 को अली अकबर का सिर कटा शव राजा भाट के पोखरे से बरामद हुआ. विवेचना में सामने आया कि मोहर्रम के जुलूस से लौटते समय अली अकबर पर हमला कर उनकी हत्या कर दी गई थी.

पुलिस ने इस मामले में हुसैन अहमद (हैदराबाद), मोहम्मद अयूब फैजी, फहीम अख्तर, असरार अहमद, मोहम्मद याकूब (सभी दुल्हनपुरा), अली जहीर, इरशाद (पूरासोफी), मोहम्मद असहद, अफजल, अलाउद्दीन, दिलशाद तथा वसीम के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया था. मुकदमे के दौरान हाजी मोहम्मद सुलेमान, नजीबुल्लाह, हमीदुल्लाह उर्फ झीनक और हाजी अब्दुल खालिक का निधन हो गया. शेष 12 आरोपियों के विरुद्ध सुनवाई पूरी होने पर अदालत ने सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी फौजदारी प्रियदर्शी पियूष त्रिपाठी तथा एडीजीसी दीपक कुमार मिश्रा ने नौ गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सख्त फैसला सुनाया. अली अकबर के पोते परवेज ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि मेरे दादा को 27 साल बाद इंसाफ मिला. अदालत के फैसले से खुश हूं.

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