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कोरबा में धान उठाव की समय सीमा समाप्त, नहीं हो सका पूर्ण रूप से धान उठाव

कोरबा के उपार्जन केंद्रों में 3 लाख 92 हजार क्विंटल धान जाम है. निर्धारित तिथि तक कार्य पूरा न होना गंभीर लापरवाही दर्शाता है.

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धान उठाव कोरबा (ETV Bharat Chhattisgarh)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : March 3, 2026 at 7:49 AM IST

3 Min Read
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कोरबा: जिले के उपार्जन केंद्रों से धान उठाव के लिए 28 फरवरी की तिथि तय की गई थी. समय सीमा बीत जाने के बाद भी धान उठाव नहीं हो सका है. अब भी उपार्जन केन्द्रों में 3 लाख 92 हजार क्विंटल धान जाम है. बढ़ते दबाव और संभावित मौसम के जोखिम को देखते हुए कलेक्टर ने मिलर्स की आपात बैठक लेकर जल्द से जल्द उठाव पूरा करने के निर्देश दिए थे. बैठक में कलेक्टर कुणाल दुदावत ने स्पष्ट कहा कि शासन द्वारा धान उठाव के लिए पर्याप्त समय और व्यवस्था उपलब्ध कराई गई थी. इसके बावजूद निर्धारित तिथि तक कार्य पूरा नहीं हुआ, जो गंभीर लापरवाही है.

हर मिलर को दैनिक लक्ष्य निर्धारित कर तत्काल उठाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए गए थे. यदि किसी मिलर द्वारा जानबूझकर देरी की गई तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के भी निर्देश है.

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3 लाख 92 हजार क्विंटल धान जाम (ETV Bharat Chhattisgarh)

इतना धान केंद्रों में है जाम

जिले के उपार्जन केंद्रों में 3 लाख 92 हजार क्विंटल धान जाम होने से भंडारण व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ गया है. मौसम परिवर्तन की संभावना को देखते हुए प्रशासन किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं लेना चाहता. किसानों की मेहनत की फसल सुरक्षित रहे, इसके लिए समय पर उठाव बेहद आवश्यक बताया गया है.

बैठक के दौरान मिलर्स ने परिवहन, मजदूरों की उपलब्धता और तकनीकी कारणों का हवाला दिया, जिस पर कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि सभी समस्याओं का त्वरित समाधान प्रशासन स्तर पर किया जाएगा, लेकिन कार्य में ढिलाई स्वीकार नहीं होगी. प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में उठाव की प्रगति की दैनिक समीक्षा की जाएगी. अब देखना होगा कि मिलर्स तय समय में लंबित 3.92 लाख क्विंटल धान का उठाव कितनी तेजी से पूरा कर पाते हैं.

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उपार्जन केंद्रों से धान उठाव के लिए 28 फरवरी थी आखिरी तारीख (ETV Bharat Chhattisgarh)

धान की मात्रा को लेकर भी संशय

जिले का उत्पादन केंद्रों में बड़ी मात्रा में धान जाम है. इसकी सुरक्षा को लेकर भी प्रश्नचिन्ह लगा हुआ है. कई केंद्रों में जितनी खरीदी हुई थी, उसकी तुलना में बड़ी मात्रा में धान गायब है. कहीं धान चूहे कुतर रहे हैं, तो कहीं सूखत के कारण धान की मात्रा में कमी आई है. ऐसे में समितियों की परेशानी बढ़ सकती है. किसानों से जितने धान के खरीदी हुई है और वर्तमान में जितनी मात्रा में केंद्रों में धान जाम पड़ा हुआ है, दोनों में काफी अंतर है. समिति के पदाधिकारी चाहते हैं कि जल्द से जल्द धान का उठाव कर लिया जाए. शासन के भी कड़े निर्देश हैं, लेकिन बावजूद इसके समय पर धान का उठाव नहीं हो सका है.

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