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कानपुर में गंगा किनारे मिला डॉल्फिन का शव, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कैसे हुई मौत?

डॉल्फिन के कुछ सैम्पल्स आईवीआरआई बरेली को भेजे गए, तीन-चार दिनों बाद रिपोर्ट आयेगी

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कानपुर के जाजमऊ पुल के नीचे मृत डॉल्फिन मिलने से हड़कंप. (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : January 3, 2026 at 4:31 PM IST

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Updated : January 3, 2026 at 6:12 PM IST

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कानपुर: गंगा नदी के किनारे दुर्लभ डॉल्फिन मछली मिली है. जाजमऊ पुल के नीचे शुक्रवार देर रात को क्षेत्रीय लोगों ने रेतीली जमीन पर मृत डॉल्फिन को देखा. आनन-फानन में वन विभाग व पुलिस को सूचना दी गई. बिना देरी के वन विभाग के अफसर व जाजमऊ थाना पुलिस टीम के कर्मी मौके पर पहुंचे. रात के समय और गलनभरी सर्दी के बीच अफसरों ने डॉल्फिन को वहां से हटाया और पोस्टमार्टम के लिए भेजा. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉल्फिन की नेचुरल डेथ हुई है.

स्थानीय लोगों का कहना है, उन्होंने इतनी बड़ी डॉल्फिन कभी नहीं देखी. ये जानकारी तो थी कि गंगा में डॉल्फिन रहती हैं. हालांकि वह तब दिखती थीं, जब गंगा का जलस्तर बहुत अधिक बढ़ा होता था. क्षेत्रीय वन अधिकारी नावेद इकराम ने बताया कि डॉल्फिन के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. डॉल्फिन गंगा के रेतीले भाग पर आई तो उसका शरीर फूला हुआ था. रेंजर राकेश पाण्डेय का कहना था कि मछली की मौत 2-3 दिनों पहले हुई होगी.

डीएफओ दिव्या ने बताया कि कानपुर में जो मृत डॉल्फिन शुक्रवार देर रात जाजमऊ पुल के नीचे गंगा के समीप मिली थी, उसका पोस्टमार्टम शनिवार को पूरा हो गया. कई घंटों तक चले पीएम के बाद डॉक्टर्स ने मौत का कारण नेचुरल डेथ बताया है. बॉडी पर कोई इंजरी या कट जैसे निशान नहीं मिले हैं. डॉल्फिन का वजन करीब 200 KG किलोग्राम था. उन्होंने कहा फिर भी डॉल्फिन के कुछ सैम्पल्स आईवीआरआई बरेली को भेज दिये गए हैं. जहां से तीन-चार दिनों बाद रिपोर्ट आयेगी. वहीं, डॉल्फिन के शव को जमीन में दफना दिया गया है.

बता दें भारत सरकार ने साल 2009 में गंगेटिक डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया था. इनकी विशेषता यह है कि यह साफ-सुथरे पानी में रहने वाला स्तनपायी जीव है. समुद्र में मिलने वाली डॉल्फिन से गंगा में मिलने वाली से अलग होती हैं. गंगेटिक रीवर डॉल्फिन को सामाजिक प्राणी कहा जाता है, यह कभी-कभी नाव या पानी में तैरने वाले मनुष्यों के नजदीक आकर उनके साथ तैरने भी लग जाती हैं. इन्हें इंसान प्रिय हैं. ये क्षति नहीं पहुंचातीं.

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Last Updated : January 3, 2026 at 6:12 PM IST