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दिल्ली महिला आयोग नियुक्ति घोटाला: गवाह की अनुपस्थिति के चलते सुनवाई टली, अगली तारीख 9 जनवरी तय

सांसद स्वाति मालीवाल पर दिल्ली महिला आयोग में नियुक्तियों में गड़बड़ियां करने का आरोप है.

दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट
दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Delhi Team

Published : December 16, 2025 at 8:34 PM IST

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नई दिल्ली: दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट में आज दिल्ली महिला आयोग में नियुक्तियों में गड़बड़ियों के मामले में आज किसी भी गवाह के बयान दर्ज नहीं किए जा सके. स्पेशल जज जीतेंद्र सिंह ने 9 जनवरी को अगली सुनवाई करने का आदेश दिया.

आज गवाह डॉ. दिलराज कौर का क्रास-एग्जामिनेशन किया जाना था. लेकिन वो कोर्ट का समन तामील होने के बावजूद पेश नहीं हुईं. अभियोजन पक्ष ने बताया कि डॉ. दिलराज कौर के ससुर का आपरेशन किया गया है, जिसकी वजह से वो कोर्ट नहीं आ सकीं. उसके बाद कोर्ट ने डॉ. दिलराज कौर को 9 जनवरी को कोर्ट में पेश होने के लिए समन जारी करने का आदेश दिया.

आज सुनवाई के दौरान आरोपी स्वाति मालीवाल कोर्ट में पेश नहीं हुई. उनकी ओर से पेश वकील ने स्वाति मालीवाल की कोर्ट में पेशी से छूट की मांग की जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया. इसके पहले इस मामले में 4 नवंबर को शिकायतकर्ता और पूर्व विधायक बरखा सिंह के बयान दर्ज किए गए. कोर्ट ने दिसंबर 2022 में स्वाति मालीवाल समेत चार आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था. स्वाति मालीवाल ने आरोप तय करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था.

कोर्ट ने स्वाति मालीवाल के अलावा जिन लोगों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था, उनमें आयोग की सदस्य प्रोमिला गुप्ता, सारिका चौधरी और फरहीन मलिक शामिल हैं. कोर्ट ने चारों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120(बी) और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13 (2), 13(1)(डी) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था.

दरअसल एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) से पूर्व विधायक बरखा सिंह ने 11 अगस्त 2016 को शिकायत कर आरोप लगाया था कि दिल्ली महिला आयोग में नियमों को दरकिनार कर आम आदमी पार्टी से जुड़े लोगों को नियुक्त किया गया. शिकायत में आयोग में नियुक्त हुए तीन लोगों के नाम बताए गए थे, जो आम आदमी पार्टी से जुड़े थे। एसीबी को दी गई शिकायत में आप से जुड़े 85 लोगों की सूची भी दी गई थी, जिनकी नियुक्ति आयोग में होने का दावा किया गया था। इस पर प्रारंभिक जांच के बाद एसीबी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज किया था.

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