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श्रीखंड महादेव यात्रा के दौरान खतरे की आशंका, DC ने तैयारियों और सुरक्षा को लेकर मांगे लिखित सुझाव

देश की दुर्गम यात्राओं में शामिल श्रीखंड महादेव यात्रा को लेकर कुल्लू जिला उपायुक्त ने कही बड़ी बात.

Shrikhand Mahadev Yatra Trust Meeting
श्रीखंड महादेव यात्रा की तैयारियों को लेकर अहम बैठक (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : June 25, 2026 at 7:37 AM IST

4 Min Read
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कुल्लू: दुर्गम धार्मिक यात्राओं में शामिल श्रीखंड महादेव की यात्रा को लेकर कुल्लू जिले में तैयारिया शुरू हो गई हैं. इस कड़ी में जिला कुल्लू की श्रीखंड महादेव यात्रा ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं उपायुक्त कुल्लू अनुराग चंद्र शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित की गई. बैठक में हिमाचल प्रदेश मिल्कफेड के अध्यक्ष एवं ट्रस्ट के संस्थापक सदस्य बुद्धि सिंह ठाकुर सहित ट्रस्ट के सरकारी एवं गैर-सरकारी सदस्यों ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया. बैठक में इस साल की प्रस्तावित श्रीखंड महादेव यात्रा के आयोजन को लेकर व्यापक चर्चा की गई. साथ ही श्रीखंड यात्रा मार्ग की सुरक्षा संबंधी विशेषज्ञों की रिपोर्ट पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया.

'वर्तमान परिस्थितियों में श्रीखंड यात्रा का आयोजन जोखिमपूर्ण'

कुल्लू जिला उपायुक्त अनुराग चंद्र शर्मा ने बैठक को अवगत करवाया कि, "श्रीखंड महादेव यात्रा मार्ग की सुरक्षा एवं व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए राजस्व एवं वन विभाग के अधिकारियों और अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं संबद्ध खेल संस्थान (ABVIMAS), मनाली के विशेषज्ञों की संयुक्त टीम का गठन किया गया था. टीम ने 8 जून और 18 जून को यात्रा मार्ग का विस्तृत निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है. रिपोर्ट के अनुसार भीमद्वारी से पार्वती बाग तक का मार्ग वर्तमान परिस्थितियों में अत्यंत संवेदनशील एवं जोखिमपूर्ण पाया गया है."

DC ने यात्रा को लेकर प्रशासन ने मांगे लिखित सुझाव

कुल्लू जिला उपायुक्त ने बताया कि, निरीक्षण दल ने पाया कि इस क्षेत्र में खड़ी ढलानें, अस्थिर एवं ढीली मिट्टी, संकरे और फिसलनयुक्त रास्ते और अनेक नालों के पारगमन जैसी चुनौतियां मौजूद हैं. विशेषज्ञों ने आगामी मानसून के दौरान भूस्खलन, चट्टानों के गिरने, अचानक जलस्तर बढ़ने, फ्लैश फ्लड और मलबे के बहाव की गंभीर आशंका व्यक्त की है.

Shrikhand Mahadev Yatra Trust Meeting
श्रीखंड महादेव यात्रा ट्रस्ट की बैठक (ETV Bharat)

श्रीखंड महादेव यात्रा को लेकर आयोजित इस अहम बैठक में ABVIMAS के स्की इंस्ट्रक्टर अंकुश कुमार एवं ट्रैकिंग गाइड गोपाल सिंह द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट का विशेष उल्लेख किया गया. संस्थान के विशेषज्ञों ने बताया कि, वे कई वर्षों से श्रीखंड महादेव यात्रा से जुड़े रहे हैं और पार्वती बाग और आसपास के क्षेत्र की भौगोलिक एवं हिमनदीय परिस्थितियों का गहन अनुभव रखते हैं. विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और नवीनतम निरीक्षण के आधार पर स्पष्ट मत व्यक्त किया कि वर्तमान परिस्थितियों में श्रीखंड महादेव यात्रा-2026 का आयोजन सुरक्षित नहीं माना जा सकता और इसकी अनुशंसा नहीं की जाती.

रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य

ABVIMAS द्वारा प्रस्तुत प्रमुख निष्कर्षों में कहा गया है कि, भीमद्वारी और पार्वती बाग के बीच मौजूदा मार्ग के साथ-साथ प्रस्तावित वैकल्पिक मार्ग भी वर्तमान परिस्थितियों में असुरक्षित हैं. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि किसी भी दुर्घटना अथवा आपदा की स्थिति में इस क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्य संचालित करना अत्यंत कठिन होगा. विशेषज्ञों ने भीमद्वारी के कैंपिंग क्षेत्र को भी उच्च जोखिम वाला क्षेत्र बताया है, जहां बढ़ते जल प्रवाह, फ्लैश फ्लड और मलबे के बहाव से गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है.

'हाई रिस्क जोन' घोषित करने की अपील

रिपोर्ट के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र की भूमि ढीले पत्थरों और अस्थिर मिट्टी से बनी हुई है, जिसके कारण वहां अस्थायी पुल, रस्सी मार्ग या अन्य अस्थायी संरचनाओं का निर्माण भी सुरक्षित एवं व्यवहारिक नहीं है. ABVIMAS ने प्रभावित हिस्से को 'हाई रिस्क जोन' घोषित करने की अनुशंसा की है. उपायुक्त ने कहा कि, "जिला प्रशासन एवं श्रीखंड महादेव यात्रा ट्रस्ट श्रद्धालुओं की सुरक्षा के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं. वर्तमान स्तिथि और रिपोर्ट के बाद यात्रा का आयोजन जोखिम पूर्ण होगा. उन्होंने ट्रस्ट के सदस्यों को भी इस रिपोर्ट पर किसी आपत्ति पर अपना लिखित सुझाव तहसीलदार को देने बात कही. अंतिम निर्णय सुरक्षा मानकों और सभी संबंधित पहलुओं के गहन परीक्षण के उपरांत ही लिया जाएगा. जन-जीवन एवं श्रद्धालुओं की सुरक्षा किसी भी परिस्थिति में सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी."

सुझाव के बाद ही मिलेगी यात्रा की मंजूरी

बैठक में विशेषज्ञों ने खतरे की आशंका को देखते हुए यह सुझाव दिया कि भीमद्वारी से पार्वती बाग तक के संवेदनशील क्षेत्र का विस्तृत भू-वैज्ञानिक अध्ययन भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) या फिर किसी अन्य सक्षम विशेषज्ञ संस्था से करवाया जाए. इससे क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन हो सकेगा.

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