हिमाचल के बागवानों को बड़ी राहत: अब सीधे खाते में आएगा सेब का पैसा, DBT से होगा MIS का भुगतान
एमआईएस स्कीम के तहत अभी एचपीएमसी पर बागवानों के करीब 115 करोड़ रुपये बकाया हैं.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 7, 2026 at 5:24 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश के सेब बागवानों के लिए बड़ी राहत की खबर है. अब एमआईएस (मार्केट इंटरवेंशन स्कीम) के तहत सेब का भुगतान सीधे बागवानों के बैंक खातों में किया जाएगा. राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि एचपीएमसी के माध्यम से अब दवाइयों, खाद या औजारों के बजाय डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए नकद भुगतान किया जाएगा. इससे बागवानों को अपनी जरूरत के अनुसार पैसा इस्तेमाल करने की सुविधा मिलेगी.
एचपीएमसी पर 115 करोड़ रुपये की देनदारी
बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि एमआईएस स्कीम के तहत अभी एचपीएमसी पर बागवानों के करीब 115 करोड़ रुपये बकाया हैं. इससे पहले इस योजना के तहत 154 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है. शेष राशि को भी जल्द जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, ताकि बागवानों को लंबे समय से चल रही परेशानी से राहत मिल सके.
छोटे बागवानों को मिलेगी प्राथमिकता
बागवानी मंत्री ने स्पष्ट किया कि डीबीटी के जरिए भुगतान की शुरुआत पहले छोटे बागवानों से की जाएगी, इसके बाद बड़े बागवानों का भुगतान किया जाएगा. सरकार का उद्देश्य है कि छोटे और सीमांत बागवानों को सबसे पहले आर्थिक राहत मिले, ताकि वे अगली फसल की तैयारी समय पर कर सकें. जगत नेगी ने कहा कि एमआईएस योजना मूल रूप से केंद्र सरकार की थी, लेकिन भाजपा सरकार ने इसे बंद कर दिया, जिससे हिमाचल प्रदेश के बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा. राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से इस योजना को आगे बढ़ाया और बागवानों को राहत देने का प्रयास किया.
सेब आयात शुल्क पर भी उठाए सवाल
बागवानी मंत्री ने विदेशी सेब पर आयात शुल्क को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री हिमाचल दौरे के दौरान सेब बागवानों की बात करते हैं, लेकिन व्यवहार में आयात शुल्क घटाया जा रहा है. न्यूजीलैंड के साथ समझौते और अमेरिका के दबाव में शुल्क कम किए गए, जिससे हिमाचल की आर्थिकी और बागवानों पर नकारात्मक असर पड़ेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आयात नीति में बदलाव नहीं हुआ तो आने वाले समय में सेब बागवानों को कठिन दौर से गुजरना पड़ सकता है. ऐसे में डीबीटी के जरिए एमआईएस भुगतान का फैसला बागवानों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है.
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