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सब्जी बेचकर बेटियों को बनाया नेशनल और इंटरनेशल खिलाड़ी, बास्केटबॉल खिलाड़ियों का गढ़ बना सरगुजा

बेटियों को नेशनल लेवल का खिलाड़ी बनाने वाले ज्यादातर माता पिता किसान हैं, या फिर सब्जी बेचते हैं.

DAUGHTERS OF SURGUJA SET EXAMPLE
बास्केटबॉल खिलाड़ियों का गढ़ बना सरगुजा (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : December 31, 2025 at 2:01 PM IST

5 Min Read
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सरगुजा: कहते हैं ''होनहार बिरवान के होत चीकने पात". अगर किसी में प्रतिभा है तो वो एक न एक दिन जरुर निखरकर सामने आएगी. साक्षी तिर्की के पिता सब्जी बेचते हैं, रीबिका और प्रीती के पिता भी गरीब किसान हैं, लेकिन ये बेटियां खेल के मैदान में कमाल कर रही हैं. मुफलिसी के दौर में भी सरगुजा की इन बेटियों ने अपने जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है. कभी अमीरों का खेल माने जाने वाले बास्केटबॉल जैसे खेल में सफलता के झंडे इन बेटियों ने गाड़े हैं. इन बेटियों बास्केटबॉल के मैदान में अबतक कई नेशनल और इंटरनेशनल लेवल का खिताब अपने नाम किया है. कई खिलाड़ी तो ऐसे हैं जिन्होने 8 नेशनल और 1 इंटरनेशनल तक खेला है.

बेटियां कर रही कमाल

सरगुजा की पहचान आदिवासी अंचल के रुप में होती है. एक बड़ा तबका यहां गरीबी रेखा के नीचे गुजर बसर करता है. आर्थिक रुप से संपन्न लोगों की संख्या काफी कम है. पैसे और साधन वाले तो पढ़ लिखकर आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन आर्थिक रुप से पिछड़ा परिवार आज भी जूझ रहा है. ऐसे ही परिवारों से निकलकर कुछ बेटियां अब गोल्ड और सिल्वर मेडल पर निशाना लगा रही हैं, देश और विदेश में अपने प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं.

बास्केटबॉल खिलाड़ियों का गढ़ बना सरगुजा (ETV Bharat)

बास्केटबॉल का गढ़ बनता सरगुजा

सरगुजा संभाग में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है. तीरंदाजी से लेकर बास्केटबॉल और हैंडबॉल तक के खिलाड़ी यहां से नेशनल और इंटरनेशनल लेवल का सफर तय कर चुके हैं. खेल के मैदान में बहतरीन प्रदर्शन करने वाले हुनरमंद खिलाड़ियों की पहचान के लिए टैलेंट सर्च कार्यक्रम भी चलाए जाते हैं. इस वजह से सरगुजा संभाग से कई खिलाड़ी अपने अपने खेल के क्षेत्र में कमाल दिखा चुके हैं. आपको बता दें कि खेल प्रतिभाओं की पहचान के लिए चलाए जाने वाले टैलेंट सर्च अभियान कोई सरकारी अभियान नहीं है. शहर के लोग मिलकर इस टैलेंट सर्च अभियान को चला रहे हैं.

क्या टैलेंट सर्च अभियान का मकसद

इस पूरे कार्यक्रम के पीछे बड़ी मेहनत है बास्केटबॉल कोच राजेश प्रताप सिंह की. उन्होंने बताया कि "यह कार्यक्रम 2016 से चलाया गया, जिसके तहत गांव में छिपी प्रतिभा को खोजना और उन्हें कोचिंग देकर खिलाड़ी बनाने का लक्ष्य था. जब 2016 में हम लोगों ने टैलेंट सर्च कार्यक्रम शुरू किया, तब फंड का बहुत अभाव था. उस समय तत्कालीन कलेक्टर आर प्रसन्ना ने मदद की और कार्यक्रम शुरू हुआ और अब सरगुजा बास्केटबॉल संघ के पदाधिकारी और शहर के अन्य गणमान्य लोगों के सहयोग से इन बच्चों की मदद हो पाती है"


खिलाड़ी रिबिका लकड़ा खेल चुकी हैं इंटरनेशनल गेम

रिबिका कहती हैं कि मैं मैनपाट की रहने वाली हूं. मैं बास्केटबॉल खिलाड़ी हूं और मैं इंटरनेशनल लेवल तक खेली हूं. खेल मुझे बहुत पसंद है. जब मैं सबसे पहले आई थी यहां अंबिकापुर में तब देखी तो मुझे खेलने का बहुत इंटरेस्ट आया. तब से मैं बास्केटबॉल में जुड़ गई. बास्केटबॉल मैंने 2013 से शुरू किया. मम्मी पापा पूरे घर वाले सब सपोर्ट करते हैं. पापा किसान हैं और मम्मी हाउस वाइफ हैं. शुरुआत में परेशानी हुई लेकिन धीरे-धीरे एडजस्ट कर रहे हैं. मेरा नेशनल सात-आठ हो चुका है और एक इंटरनेशनल है"

क्या कहते हैं खिलाड़ी


प्रीति मिंज बताती हैं, "मैं मैनपाट से हूं अभी फिलहाल मैं अम्बिकापुर में कॉलेज करती हूं. बास्केटबॉल खेलते हुए मुझे 5 साल हो गया. मैं नेशनल खेली हूं और अभी हाल ही में मैं बास्केटबॉल यूनिवर्सिटी गेम खेलने गई थी. मेरे पिता किसान हैं.''


साक्षी तिर्की बताती हैं, "मैं अंबिकापुर पटेल पारा की निवासी हूं. अभी हम लोग कॉलेज यूनिवर्सिटी टीम से राजनांदगांव खेलने गए थे. मेरे पिताजी सब्जी की दुकान लगाते हैं. पिताजी को परिवार चलाने में दिक्कत होती है लेकिन वो एडजस्ट करते हैं.''


प्रज्ञा मिश्रा ने बताया "मैं बास्केटबॉल खेलती हूं. मैं 10 साल से बास्केटबॉल खेल रही हूं. मैं आठ नेशनल खेली हूं और एक इंटरनेशनल खेली हूं. नेशनल लेवल पे हम लोग इंडिया में जितने भी स्टेट होते हैं वहां खेल चुके हैं. ''

सुविधा और साधन मिले तो करेंगे कमाल

टीम मैनेजर रजत सिंह ने बताया कि "उच्च शिक्षा विभाग द्वारा राजनंदगांव में राज्य स्तरीय महिला बास्केटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था. जिसमें सरगुजा सेक्टर शामिल हुई. कोच कहते हैं कि सरगुजा जिला बास्केटबॉल संघ के लिए बड़ी उपलब्धि रही है. पहली बार राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में हमारे यहां की बालिकाओं ने प्रथम स्थान हासिल किया और दुर्ग सेक्टर और रायपुर सेक्टर को काफी लंबे अंतराल में इन्होंने पराजित किया. यह संघ के लिए काफी गौरव का विषय है. कई बच्चे ऐसे हैं जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. उनको यहां संघ के द्वारा काफी मदद दी जाती है.

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