CSR फंड में करोड़ों की बंदरबांट का आरोप: तुलिका कर्मा ने एनएमडीसी की निविदा प्रक्रिया पर उठाए सवाल
स्थानीय ठेकेदारों की अनदेखी, बाहरी लोगों को लाभ पहुंचाने और कमीशनखोरी के गंभीर आरोप, उच्च स्तरीय जांच की मांग

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : June 22, 2026 at 8:12 PM IST
दंतेवाड़ा. एनएमडीसी की ओर से किरंदुल-बचेली क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में सीएसआर मद से कराए जा रहे विकास कार्यों की निविदा प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं. महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव एवं जिला पंचायत सदस्य तुलिका कर्मा ने गंभीर आरोप लगाए. सोमवार को आयोजित एक पत्रवार्ता में उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये के विकास कार्यों में पारदर्शिता को दरकिनार कर स्थानीय पंजीकृत ठेकेदारों के साथ अन्याय किया जा रहा है और बाहरी ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है.
चुनिंदा लोगों को काम देने का आरोप
तुलिका कर्मा ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये के कार्यों को सीमित निविदा प्रक्रिया के माध्यम से चुनिंदा लोगों तक सीमित कर दिया गया. जबकि एनएमडीसी के नियमों के अनुसार दो लाख रुपये से अधिक राशि के कार्यों के लिए खुली और ऑनलाइन निविदा प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी. उन्होंने कहा कि क्षेत्र के अनेक पंजीकृत एवं अनुभवी स्थानीय ठेकेदारों को निविदा संबंधी जानकारी तक उपलब्ध नहीं कराई गई. इससे न केवल प्रतिस्पर्धा समाप्त हुई बल्कि पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.
निविदा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां सार्वजनिक नहीं की गईं और टेंडर पोर्टल पर कई तकनीकी खामियां भी देखने को मिलीं.- तुलिका कर्मा, जिला पंचायत सदस्य
क्या टेंडर को लॉक किया गया?
पत्रवार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि निविदा की राशि तक वेबसाइट पर प्रदर्शित नहीं की गई. इतना ही नहीं, टेंडर को इस प्रकार लॉक किया गया था कि वह लंबे समय तक खुल ही नहीं पा रहा था. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ दिनों तक निविदा एनएमडीसी की वेबसाइट पर प्रकाशित ही नहीं की गई, जिससे अधिकांश स्थानीय ठेकेदार प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित रह गए.
स्थानीय स्तर पर ठेकेदार को काम नहीं
तुलिका कर्मा ने कहा कि निविदा प्रक्रिया में ऐसे लोगों को शामिल किया गया है जिनका क्षेत्र में पूर्व कार्य अनुभव नहीं है और न ही वे स्थानीय स्तर पर पंजीकृत हैं. उनके अनुसार इससे यह आशंका होती है कि पूरी प्रक्रिया को कुछ विशेष लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित किया गया है. उन्होंने कहा कि यदि विकास कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करनी है तो सभी कार्यों की खुली, निष्पक्ष और प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए. सार्वजनिक धन का उपयोग जनता के हित में होना चाहिए, न कि किसी विशेष समूह को फायदा पहुंचाने के लिए.
बाहरी ठेकेदारों को काम और कमीशन लेने का आरोप
जिला पंचायत सदस्य ने बताया कि सीएसआर मद के अंतर्गत पहले चरण में लगभग 20 से 40 करोड़ रुपये तक के विकास कार्य कराए जाने प्रस्तावित हैं. ऐसे में निविदा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता सीधे तौर पर जनता के हितों और विकास कार्यों की गुणवत्ता को प्रभावित करेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक चैतराम अटामी कथित अनियमितताओं को देखकर भी अनदेखा कर रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने प्रभारी मंत्री, विधायक और सांसद पर भी गंभीर आरोप लगाए. कहा कि जिले में लगातार बाहरी ठेकेदारों को काम दिलाने का प्रयास किया जा रहा है और इसके बदले भारी कमीशन लिए जाने की चर्चा क्षेत्र में आम है.
हालांकि इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने किसी जांच रिपोर्ट या आधिकारिक दस्तावेज का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति जनता के सामने आ सके.

