नक्सलगढ़ से नॉलेज हब तक, दंतेवाड़ा में विज्ञान प्रदर्शनी बनी नई उम्मीद, विकास और शिक्षा बन रही बस्तर की पहचान
बस्तर संभाग के जिलों से अब बदलती तस्वीर सामने आ रही है. दंतेवाड़ा में जिला स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में बच्चों ने अनोखे मॉडल दिखाए.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 28, 2026 at 4:49 PM IST
दंतेवाड़ा: जिला जिसे कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, आज शिक्षा, विकास और नवाचार की नई मिसाल बन रहा है. जिले में आयोजित जिला स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी ने यह साबित कर दिया कि सही अवसर और मार्गदर्शन मिले तो यहां के बच्चे किसी से कम नहीं हैं. जिला प्रशासन के सहयोग से AM/NS इंडिया कंपनी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा मंच दिया.
500 से अधिक बच्चों ने दिखाया हुनर
जिले के अलग–अलग स्कूलों से आए 500 से ज्यादा छात्रों ने प्रदर्शनी में भाग लिया. बच्चों ने विज्ञान से जुड़े मॉडल तो बनाए ही, साथ ही बस्तर की संस्कृति, कृषि, पर्यावरण और “कबाड़ से जुगाड़” जैसे विषयों पर भी शानदार प्रस्तुति दी. इससे साफ दिखा कि क्षेत्र में प्रतिभा की कमी नहीं है.
इन विषयों पर बनाए मॉडल
- कबाड़ से उपयोगी मशीनें
- कृषि आधारित वैज्ञानिक मॉडल
- प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
- बस्तर की लोकसंस्कृति
- पर्यावरण सुरक्षा

नेत्रबाधित बच्चों का अनोखा कृषि मॉडल
सक्षम आवासीय परिसर के नेत्रबाधित बच्चों ने एक विशेष कृषि यंत्र का मॉडल बनाकर सभी को प्रभावित किया. उन्होंने बताया कि रासायनिक खादों के अधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता घटती है, नमी कम होती है और जमीन कठोर हो जाती है. इससे उत्पादन प्रभावित होता है. उनका संदेश था धरती मां स्वस्थ रहेगी तभी खेती और भविष्य सुरक्षित रहेगा. यह प्रस्तुति यह भी साबित करती है कि प्रतिभा किसी सीमा में बंधी नहीं होती.
छात्रा सरिता का पर्यावरण संदेश
उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की छात्रा सरिता ने पर्यावरण संरक्षण पर मॉडल प्रस्तुत किया. उनका कहना था प्रकृति हमारा जीवन है, इसे बचाना हमारा कर्तव्य है. उन्होंने प्रदूषण, पेड़ों की कटाई और रासायनिक उपयोग से होने वाले नुकसान को अपने मॉडल के माध्यम से समझाया.
AM/NS कंपनी का उद्देश्य
आयोजन में शामिल AM/NS इंडिया कंपनी के जीएम ने बताया कि उनका उद्देश्य जिले के अंतिम छोर तक रहने वाले बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है. उनका विश्वास है कि दंतेवाड़ा के बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक और अधिकारी बनने की पूरी क्षमता रखते हैं.

बदल रही है दंतेवाड़ा की पहचान
विज्ञान प्रदर्शनी ने साबित कर दिया कि दंतेवाड़ा अब सिर्फ नक्सल घटनाओं के लिए नहीं, बल्कि उभरती प्रतिभाओं के लिए भी पहचाना जाएगा. आज यहां के बच्चे बड़े सपने देख रहे हैं और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत भी कर रहे हैं. आने वाले समय में यही बच्चे जिले और बस्तर का नाम रोशन करेंगे.
शिक्षा पर प्रशासन का विशेष ध्यान
जिला प्रशासन ने दूर-दराज के इलाकों के बच्चों के लिए कई सुविधाएं शुरू की हैं. निःशुल्क आवासीय हॉस्टल और आश्रम स्कूल में मुफ्त शिक्षा और भोजन के साथ बेहतर पढ़ाई की व्यवस्था की जा रही है. इन प्रयासों का असर अब साफ दिखाई देने लगा है. बच्चे आत्मविश्वास के साथ विज्ञान जैसे विषयों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं.

