दंतेवाड़ा के हाई स्कूल मैदान पर हैलीपेड निर्माण का विरोध, “ना लोकसभा, ना विधानसभा… सबसे बड़ी ग्रामसभा” के नारे लगे
खेल मैदान पर कंक्रीट गिरने और निर्माण कार्य शुरू होने पर ग्रामीणों का गुस्सा फूटा. ग्रामसभा की अनुमति के बिना काम होने का आरोप है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 23, 2026 at 7:48 PM IST
दंतेवाड़ा: जिले के ग्राम पंचायत बड़े बचेली में हाई स्कूल मैदान पर कंक्रीट हैलीपेड बनाए जाने को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है. ग्रामीणों का कहना है कि यह निर्माण बिना ग्रामसभा की अनुमति के शुरू किया गया, जो पंचायत नियमों के खिलाफ है. सोमवार को सैकड़ों ग्रामीण महिलाएं, युवा और बुजुर्ग मैदान में एकत्र हुए और निर्माण कार्य का विरोध किया. उनका साफ कहना है कि पहले ग्रामसभा में प्रस्ताव रखा जाए, उसके बाद ही कोई फैसला लिया जाए.
खेल मैदान पर क्यों बन रहा है हैलीपेड?
ग्राम पंचायत के सरपंच गोविंद कुंजाम, उपसरपंच महेश ठाकुर और अन्य जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि पंचायत के एकमात्र बड़े खेल मैदान को स्थायी कंक्रीट हैलीपेड में बदला जा रहा है. ग्रामीणों के अनुसार इसी मैदान में स्कूल के बच्चे रोज खेलते हैं आसपास के गांवों के युवा क्रिकेट और फुटबॉल का अभ्यास करते हैं. भविष्य में यहां मिनी स्टेडियम बनाने की योजना थी. लोगों का कहना है कि मैदान पर कंक्रीट डालने से खेल गतिविधियां पूरी तरह खत्म हो जाएंगी.
बच्चों के खेल मैदान पर कब्ज़ा कर दिया गया है. हमारे खेल, हमारी जगह और हमारी ग्रामसभा से बिना पूछे यह निर्माण गलत है. इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए- गोविंद कुंजाम, सरपंच
जब जमीन की कमी नहीं, तो मैदान ही क्यों?
सरपंच ने प्रशासन से सवाल किया कि जब क्षेत्र में अन्य सरकारी जमीन उपलब्ध है, तो बच्चों के खेल मैदान को ही क्यों चुना गया? ग्रामीणों ने यह भी बताया कि पहले हेलीकॉप्टर एनएमडीसी टाउनशिप के फुटबॉल ग्राउंड में सुरक्षित रूप से उतरते रहे हैं. ऐसे में नए स्थायी हैलीपेड की जरूरत पर भी सवाल उठ रहे हैं.
निजी जमीन पर अतिक्रमण का आरोप
कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मैदान से सटे हिस्सों में निजी भूमि भी शामिल है. उनका कहना है कि बिना सूचना और सहमति के मशीनें लगाकर खुदाई और कंक्रीट का काम शुरू कर दिया गया. ग्रामीणों का आरोप है कि कोई सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया ना ही ग्राम पंचायत बैठक में प्रस्ताव रखा गया. लोगों को पहले से जानकारी नहीं दी गई. इससे ग्रामीणों में अविश्वास और नाराजगी बढ़ गई है.
'सबसे बड़ी ग्रामसभा' के लगे नारे
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने नारे लगाए “ना लोकसभा, ना विधानसभा… सबसे बड़ी ग्रामसभा!” ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत अधिनियम के अनुसार ग्रामसभा की अनुमति के बिना ऐसा निर्माण अवैध है. वे चाहते हैं कि पहले खुली बैठक में चर्चा हो और फिर निर्णय लिया जाए.
इस बार मैदान बचाने की लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है. यदि हमें मजबूर किया गया तो जिला स्तर पर भी आंदोलन किया जाएगा.- महेश ठाकुर, उपसरपंच
उग्र आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि तुरंत निर्माण कार्य नहीं रोका गया और मैदान को पहले जैसा नहीं किया गया, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे. उनका कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बच्चों के खेल मैदान की कीमत पर कोई विकास स्वीकार नहीं करेंगे.
कानून-व्यवस्था बनाए रखने पुलिस तैनात
प्रदर्शन के दौरान स्थिति को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया. हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन ग्रामीणों का आक्रोश साफ दिखाई दिया.
पारदर्शिता और सहमति की मांग
ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि ग्रामसभा की खुली बैठक हो. निर्माण का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए. बिना सहमति कोई काम न हो. लोगों को डर है कि अगर हैलीपेड बन गया तो बच्चों और युवाओं के पास खेलने की जगह नहीं बचेगी और सामाजिक कार्यक्रमों पर भी असर पड़ेगा.
हाई स्कूल मैदान पर कंक्रीट हैलीपेड निर्माण का मामला अब केवल एक विकास कार्य का मुद्दा नहीं रह गया है. यह ग्रामसभा के अधिकार और स्थानीय सहमति से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है. फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. ग्रामीणों का कहना है कि मैदान बचाने की उनकी लड़ाई जारी रहेगी.

