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आदिम जाति कल्याण विभाग में लाखों का घोटाला, डिप्टी कलेक्टर सहित 3 सस्पेंड

दमोह में आदिम जाति विभाग में हुई लाखों की खरीदी में डिप्टी कलेक्टर सहित 3 अधिकारी सस्पेंड. हर सामान दोगुने से अधिक दामों पर खरीदा.

DAMOH TRIBAL WELFARE DEPT FRAUD
आदिम जाति कल्याण विभाग में लाखों का घोटाला (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : December 5, 2025 at 9:15 PM IST

5 Min Read
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दमोह: आदिम जाति कल्याण विभाग खरीदी घोटाला मामले में कमिश्नर ने डिप्टी कलेक्टर सहित 3 लोगों को निलंबित कर दिया है. वहीं एसपी ने इसी मामले में एफआईआर संबंधी एक फाइल को बैरंग लौटा दिया है. एसपी का कहना है कि आदिम जाति कल्याण विभाग में हुई वित्तीय गड़बड़ी के संबंध में पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने का उल्लेख किया था लेकिन उस पूरे प्रतिवेदन में इस बात का कहीं उल्लेख नहीं था कि किस अधिकारी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया जाना है.

सामान खरीदी के नाम पर लाखों का घोटाला

दमोह में आदिम जाति कल्याण विभाग के अधिकारियों ने साल 2024-25 में लाखों रुपए रुपए की थी. सामान खरीदने के लिए जिला प्रशासन की ओर से एक समिति का गठन किया गया था. जिसमें जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला उद्योग विभाग प्रबंधक, जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण विभाग एवं जिला कोषालय अधिकारी को रखा गया था. सामग्री खरीदी के नाम पर विभाग के अधिकारियों पर घोटाले का आरोप लगा था.

TRIBAL DEPT GOODS PURCHASING SCAM
सामान खरीदी के नाम पर लाखों का घोटाला (ETV Bharat)

सामान खरीदी में नियमों की अनदेखी

आदिम जाति कल्याण विभाग ने खरीदी तो की लेकिन इस खरीदी में सभी ने नियमों की जमकर अनदेखी की. जब शिकवा शिकायतों का दौर शुरू हुआ और मामला उछला तो कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने मामले की जांच अतिरिक्त कलेक्टर श्रीमती मीना मसराम को सौंप दी. उन्होंने दो महीने तक मामले की जांच की और यह पाया कि मामले में 53 लाख रुपए की सामग्री खरीदी में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं.

TRIBAL WELFARE FRAUD PURCHASE
आदिम जाति कल्याण विभाग में लाखों का घोटाला (ETV Bharat)

सागर कमिश्नर ने 3 अधिकारियों को किया सस्पेंड

इस मामले की जांच रिपोर्ट आने के बाद कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने जांच रिपोर्ट कमिश्नर सागर और मध्य प्रदेश शासन को भेज दी. इसके बाद सागर कमिश्नर अनिल सुचारी ने आदिम जाति कल्याण विभाग के तत्कालीन प्रभारी जिला संयोजक प्रभारी एवं डिप्टी कलेक्टर बृजेश सिंह, सहायक संचालक आदिम जाति कल्याण विभाग की रिया जैन और लेखापाल महेंद्र कुमार अहिरवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.

COMMISSIONER SUSPENDED 3 OFFICERS
सागर कमिश्नर ने 3 अधिकारियों को किया सस्पेंड (ETV Bharat)
COMMISSIONER SUSPENDED 3 OFFICERS
सागर कमिश्नर ने 3 अधिकारियों को किया सस्पेंड (ETV Bharat)

53 लाख का खरीदा सामान

क्रय समिति ने साढ़े 23 लाख का फर्नीचर, साढ़े 27 लाख के गद्दा, तकिया, मच्छरदानी, कंबल, फर्श और लगभग 2 लाख की खेल सामग्री क्रय की. लगभग 53 लाख की खरीदी में फर्नीचर से लेकर खेल सामग्री तक घटिया सामग्री उच्च दामों में विभाग द्वारा खरीदी गई. आदिम जाति कल्याण विभाग ने 2 लाख 6 हजार 172 रु में छात्रों के लिए खेल सामग्री खरीदी. जिसमें 34 बैडमिंटन, 23 कैरम बोर्ड, 12 टेनिस बॉल, क्रिकेट किट, 24 फुटबॉल एवं 24 वॉलीबॉल शामिल हैं. जबकि यह सामग्री बाजार मूल्य के हिसाब से करीब 57 हजार की थी जिसका भुगतान 2 लाख रुपए से अधिक किया गया.

TRIBAL DEPT GOODS PURCHASING SCAM
हर चीज का चुकाया दोगुना दाम (ETV Bharat)

हर चीज का चुकाया दोगुना दाम

रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने एमडीएम इंडस्ट्री एवं पूर्व मार्केटिंग दमोह से जो खेल सामग्री क्रय की, उसमें 30 बाई 30 के 23 कैरम बोर्ड 2150 रु की दर से खरीदे जबकि बाजार मूल्य 650 रुपए है. इसी तरह 34 बैडमिंटन 1295 रु की दर से खरीदे जो बाजार में 300 से 350 रुपए का है. 12 टेनिस बॉल क्रिकेट किट (एक प्लास्टिक का बैट, तीन स्टंप और एक टेनिस बॉल) 49140 रु में खरीदी गई यानी प्रति क्रिकेट किट के लिए 4095 रु का भुगतान किया गया. जबकि इसी क्रिकेट किट का बाजार मूल्य 580 रु लगभग है. इसके अलावा 24 फुटबॉल (मैक्सी डीलक्स) 1550 रु की दर से 37200 रु में खरीदी गई जो मात्र 4 सौ की थी. 24 वॉलीबॉल (निविया) मॉडल नंबर पीभी 5000, 1098 रु की दर से 26352 रु में खरीदी गई जबकि बाजार में इसकी कीमत 650 रुपए है. यानि हर चीज दो से तीन गुना दाम पर ली गई.

'बगैर नाम के एफआईआर दर्ज नहीं'

इस मामले में करीब 15 दिन पहले कलेक्टर ने जांच प्रतिवेदन के आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज करने का एक पत्र पुलिस अधीक्षक श्रुत कीर्ति सोमवंशी को भेजा था. लेकिन पत्र के अवलोकन के बाद पुलिस अधीक्षक ने उस पत्र को वापस कलेक्टर कार्यालय भेज दिया.

जब इस संबंध में पुलिस अधीक्षक श्रुत कीर्ति सोमवंशी से बात की तो उन्होंने ईटीवी भारत को बताया कि "जो पत्र आया था उसमें आदिम जाति कल्याण विभाग में हुई वित्तीय गड़बड़ी के संबंध में पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने का उल्लेख किया था. लेकिन उस पूरे प्रतिवेदन में इस बात का कहीं उल्लेख नहीं था कि किस अधिकारी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया जाना है. पुलिस अपने स्तर पर बगैर नाम के एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती है. इसलिए हमने उस पत्र को वापस भेज दिया. साथ ही यह लेख किया कि उन अधिकारियों के नाम चिन्हित किए जाएं जिनके विरूद्ध प्रकरण दर्ज किया जाना है."