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झोपड़पट्टी में रहती हैं दमोह की सरपंच, लोगों को दिलाती हैं योजनाओं का लाभ लेकिन खुद वंचित

दमोह की ऐसी सरपंच जिनके लिए अभिशाप बना उनका पद, पीएम आवास के लिए काट रहीं चक्कर, अधिकारी बोले- सरपंच को ये लाभ नहीं

Damoh Sarpanch lives in cottage
झोपड़पट्टी में रहती है दमोह की सरपंच (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 26, 2026 at 10:22 PM IST

3 Min Read
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दमोह: एक ऐसी सरपंच जिसके पास न रहने के लिए खुद का पक्का मकान है और न ही शौचालय. सरपंच होने के बाद भी वे खानाबदोश भरी जिंदगी जी रही हैं. खानाबदोश इसलिए क्योंकि बारिश के दिनों में उनका झोपड़ी, निवास लायक नहीं रहती और उन्हें पूरे परिवार के साथ किराए के घर में शिफ्ट होना पड़ता है. आइए जानते हैं आखिर क्यों सरपंच को सरकारी योजनाओं तक का लाभ नहीं मिल रहा है.

सरपंच खुद सरकारी योजनाओं से है वंचित

दमोह ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम पंचायत कुआं खेड़ा नायक की संरपंच मीना अठ्या है. वह सेमरपटी गांव में रहती है और अनुसूचित जाति वर्ग से है. परिवार में करीब 10 लोग हैं, जिसमें उनके पति, बच्चे, देवर, ससुर सहित अन्य कई परिजन है. लेकिन मकान के नाम पर पन्नी और घास-भूस से बनी मात्र एक झोपड़ी है, जिसमें पूरा परिवार रहता है. हैरानी की बात ये है कि सरपंच की मदद से गांव के अन्य लोगों को सरकारी योजना का लाभ मिल जाता है लेकिन खुद सरंपच इन योजनाओं से वंचित है.

दफ्तर के चक्कर काटने के बाद भी नहीं मिला पीएम आवास

सरपंच मीना अठ्या पढ़ी-लिखी नहीं हैं. उन्होंने बताया, " इस कच्ची झोपड़ी में हम लोग बारिश के मौसम में नहीं रह पाते हैं. हमें या तो बाहर जाकर किराए के मकान में रहना पड़ता है या फिर कहीं और शिफ्ट होना पड़ता है." उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास के लिए फॉर्म डाला था, लेकिन दफ्तरों के कई चक्कर काटने के बाद भी आज तक लाभ नहीं मिला. अधिकारी कहते हैं सरपंच को इस तरह का लाभ नहीं मिल सकता है. इसलिए मुझे सरकारी आवास नहीं मिल पाया.

'कोशिश के बाद भी लाभार्थी लिस्ट में नाम नहीं'

सरपंच के ससुर नाथूराम कहते हैं, "कौन नहीं चाहता कि उसके पास पक्का मकान हो. हम तो सरपंची के पहले से ही कई बार प्रयास कर चुके हैं, लेकिन आज तक सूची में हमारा नाम ही नहीं आया. क्यों नहीं आया इस बात की हमें जानकारी नहीं है. हम ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं और सरकारी योजनाओं की जानकारी भी नहीं है. इसलिए अधिकारी जैसा कह देते हैं, उसी को सच मान लेते हैं."

इस मामले में पंचायत सचिव कमलेश खरे ने कहा, " महिला सरपंच के 2 परिजनों के नाम प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृति के लिए भेजे गए हैं, लेकिन अभी फार्म लंबित है.

लाडली बहना योजना का भी नहीं मिलता लाभ

सरपंच मीना बाई ने बताया कि उनके पास खाद्यान्न पर्ची नहीं है. इसलिए उन्हें राशन भी नहीं मिलता है. इसी कारण से जब वह लाडली बहना योजना का फॉर्म भरने गई थीं, तो वहां पर भी उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका और लाडली बहना का पैसा भी नहीं मिलता है. परिवार का गुजर-बसर करने के लिए परिवार के सभी लोग मजदूरी करते हैं. कोई बेलदारी करता है, तो कोई खेती का काम करता है. जहां जैसी मजदूरी मिल जाती है, उसी से परिवार का भरण पोषण होता है. फिलहाल तो उनका पद ही उनके लिए अभिशाप बना हुआ है.