DVVNL आगरा सर्किल में टेंडर घोटाला; 4 अधिकारी निलंबित, 19 के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज
डीवीवीएनएल के एमडी नितीश कुमार ने मामले की जांच के लिए मुख्य अभियंता और अन्य अधिकारियों की जांच कमेटी गठित की है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 10, 2026 at 2:15 PM IST
आगरा: दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (DVVNL) के आगरा फतेहाबाद सर्किल में बड़ा घोटाला सामने आया है. टेंडर्स में हेराफेरी करके तीन साल में करीब 29 करोड़ की रकम हड़पी गई है. नियमों को ताक पर रखकर 11 फर्म्स को 80 से अधिक टेंडर जारी किए गए. पोर्टल पर चढ़ाए बिना भी इन फर्म्स को टेंडर जारी किया गया. घोटाला सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है. डीवीवीएनएल एमडी के निर्देश पर फतेहाबाद थाना में टेंडर घोटाले के भ्रष्टाचार में अधीक्षण अभियंता समेत 19 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है.
डीवीवीएनएल के एमडी नितीश कुमार ने मामले की जांच के लिए मुख्य अभियंता और अन्य अधिकारियों की जांच कमेटी गठित की. इसी कमेटी की जांच में भष्ट्राचार का खुलासा हुआ है. रिपोर्ट आने के बाद डीवीवीएनएल एमडी नितीश कुमार ने दो अधीक्षण अभियंताओं सहित चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है. इतना ही नहीं दो रिटायर्ड अधीक्षण अभियंताओं पर भी विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
जांच जारी एफआईआर की तैयारी: डीवीवीएनएल के एमडी नितीश कुमार ने बताया कि टेंडर घोटाले में अधीक्षण अभियंता डीएन प्रसाद और आरके मिश्रा को निलंबित किया गया है. इसके साथ ही सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता वीके सिंह और अरविंद कुमार पांडेय पर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है. इस मामले में अभी जांच कमेटी जांच कर रही है. दोषी अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी.
मुख्य अभियंता से हुई शिकायत: डीवीवीएनएल फतेहाबाद सर्किल में बिजनेस प्लान के टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की शिकायत मुख्य अभियंता कपिल सिंधवानी से की गई थी. शुरुआती जांच के बाद ही टेंडर का काम देखने वाले शिविर सहायक नीरज पाठक को 01 नवंबर 2025 को निलंबित कर दिया गया था. जांच आगे बढ़ी तो 10 नवंबर को लेखाकार सतीश कुमार को भी निलंबित कर दिया गया.
तीन सदस्यीय कमेटी बनी: दो कर्मचारियों के निलंबन के बाद गंभीरता से जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई. जांच में यह बात सामने आई है कि 2023-24 और 2024-25 में लगभग ऐसे 40 टेंडर जारी किए गए, जिनकी निविदाएं ही प्रकाशित ही नहीं की हुई थीं. इनमें 2023-24 और 2024-25 में 7 ऐसे अनुबंध भी मिले हैं, जिनकी प्रकाशित निविदाएं ई-निविदा पोर्टल पर निरस्त दिख रही हैं. इसके बाद भी इन्हें टेंडर जारी कर दिया गया.
जांच में मिली यह अनियिमतताएं
- 2023-24 और 2024-25 के 40 अनुबंध ऐसे मिले हैं, जिसकी निविदाएं प्रकाशित ही नहीं की गईं हैं.
- 2023-24 और 2024-25 के 4 अनुबंध ऐसे मिले हैं, जिसकी प्रकाशित निविदाएं ई-निविदा पोर्टल पर निरस्त की गई थीं. इसके बाद भी टेंडर जारी हुआ.
- 2023-24 और 2024-25 के 9 अनुबंधों की प्रकाशित निविदाओं के ई-निविदा पोर्टल पर प्रथम/द्वितीय भाग खोले ही नहीं गए, फिर भी टेंडर जारी हुए.
- 2023-24 और 2024-25 के 28 निविदाओं का ई-निविदा पोर्टल पर उपलब्ध दस्तावेजों में निविदा दाताओं के निविदा शुल्क या धरोहर धनराशि की रसीदें बदलकर निविदाएं संलग्न की हैं.
- 2023-24, 2024-25 और 2025-26 की 29 निविदाओं की जांच में जो एल-1 की अंकित दरों, निविदा मूल्य, बिना निविदा में प्रतिभाग के एक से अधिक अनुबंध करके और गलत धनराशित से अनुबंध या पीओ निर्मित किए हैं.
- 2023-24, 2024-25 और 2025-26 की 166 निविदाओं के सापेक्ष मात्र 43 निविदा पत्रावलियां ही मंडल कार्यालय में मिलीं. इन्हें जान बूझकर जलाया गया.
जांच में घोटाले की पोल खुली: घोटाले की शिकायत पर डीवीवीएनएल की ओर जांच कराई गई, तो पता चला कि 2023-24 और 2024-25 में 11 ऐसे अनुबंध मिले हैं. जिसकी प्रकाशित निविदाओं को लेकर ई-निविदा पोर्टल पर प्रथम या द्वितीय भाग खोले ही नहीं गए. फिर उन्हें यह टेंडर जारी किया गया.
कुछ ऐसे टेंडर मिले हैं, जिसमें प्रथम निविदादाता ने निविदा की धनराशि 15 लाख रुपए अंकित की, लेकिन कार्यालय के घोटालेबाज बाबू ने इसको 28 लाख करके अनुबंध कर दिया. यह भी सामने आया है कि कई ऐसी भी निविदाएं हैं, जिसमें टेंडर डाले ही नहीं गए. इसके बाद भी फर्मों को अनुबंध कर दिया गया.

