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साइकिल पर दूध बेचने वाला 'जगन' बना चंबल का खूंखार डकैत, 4 बार किया था सरेंडर, बीहड़ में था खौफ

आरोप है कि 123 मामलों में आरोपी डकैत जगन गुर्जर की हाई सिक्योरिटी जेल में कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु ने गला घोंटकर हत्या कर दी.

डकैत जगन गुर्जर
डकैत जगन गुर्जर (ETV Bharat File Photo)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : June 29, 2026 at 8:44 PM IST

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धौलपुर: देश और प्रदेश के सबसे खूंखार गैंगस्टर्स, आतंकियों और हार्डकोर अपराधियों को रखने के लिए बनी राजस्थान की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल को 'अभेद्य' माना जाता है. यहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता, ऐसी सुरक्षा के दावे किए जाते हैं, लेकिन सोमवार को इसी जेल की सेल नंबर 2 के भीतर जो कुछ हुआ, उसने जेल प्रशासन की मुस्तैदी और दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं. 123 मामलों के आरोपी और चंबल का नामी डकैत जगन गुर्जर की हत्या ने जेल के भीतर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

चंबल के बीहड़ों में जिसके नाम से गांवों के दरवाजे बंद हो जाते थे, पुलिस अलर्ट हो जाती थी और जिसके सिर पर 11 लाख रुपये का इनाम था, उसी कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की मौत अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल की बैरक में हो गई. सोमवार को जेल के अंदर संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी हत्या कर दी गई. हत्या का आरोप भरतपुर के चर्चित कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु गुर्जर पर लगा है. दोनों एक ही बैरक में बंद थे.

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डकैत जगन गुर्जर (ETV Bharat File Photo)

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एसपी ने की घटना की पुष्टि: अजमेर के पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सोमवार को बैरक बंद रहने के दौरान ड्यूटी स्टाफ निरीक्षण के लिए पहुंचा था. बैरक खोलने पर जगन गुर्जर मृत अवस्था में मिला, जबकि उसका साथी अंदर मौजूद था. एफएसएल टीम मौके पर जांच कर रही है और मामले की विस्तृत पड़ताल की जा रही है. पुलिस की प्रारंभिक जांच में गला घोंटकर हत्या किए जाने की आशंका जताई गई है. हालांकि, सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा.

कई बार किया सरेंडर: करीब दो दशक तक चंबल और धौलपुर की डांग में सक्रिय रहे जगन गुर्जर को पुलिस कभी सीधे नहीं पकड़ सकी. वह कई बार खुद अपनी शर्तों पर आत्मसमर्पण करता था, लेकिन विडंबना यह कि बीहड़ों की गोलियों से बचने वाला डकैत जेल की चारदीवारी के अंदर अपनी जान नहीं बचा सका. इस हत्याकांड की सबसे हैरान करने वाली बात वारदात का तरीका है. हाई सिक्योरिटी जेल में कैदियों पर 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों और हथियारबंद प्रहरियों की नजर रहती है. ऐसे में आरोपी विष्णु ने बैरक के भीतर ही जगन गुर्जर का गला घोंट दिया.

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दूध बेचने वाला कैसे बना चंबल का खौफ?: धौलपुर के बसई डांग थाना क्षेत्र के विभूतिपुरा गांव का रहने वाला जगन गुर्जर शुरू में साइकिल पर दूध बेचकर परिवार चलाता था. दूध बेचने के दौरान ही कुछ स्थानीय विवादों और रंजिश के बाद उसने कानून अपने हाथ में लिया और चंबल के बीहड़ों का रुख कर लिया. देखते ही देखते वह पूर्वी राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर आतंक का दूसरा नाम बन गया. उसके खिलाफ हत्या, अपहरण, रंगदारी, डकैती, लूट और पुलिस पर हमले समेत 123 से ज्यादा गंभीर मुकदमे दर्ज थे.

डकैत जगन गुर्जर 4 बार सरेंडर कर चुका था
डकैत जगन गुर्जर 4 बार सरेंडर कर चुका था (ETV Bharat File Photo)

20 वर्षों तक रहा अपराध जगत में सक्रिय: बीहड़ में उतरने के बाद उसने अपनी खुद की गैंग बनाई. उसके खिलाफ राजस्थान और मध्य प्रदेश के अलग-अलग थानों में हत्या, अपहरण, रंगदारी, डकैती, लूट और पुलिस पार्टियों पर जानलेवा हमले करने के गंभीर मामले दर्ज थे. जगन गुर्जर पिछले करीब दो दशकों से धौलपुर जिले के डांग क्षेत्र और चंबल के बीहड़ों में सक्रिय रहा था.

पूरा परिवार अपराध जगत से जुड़ा रहा: जगन गुर्जर चार भाइयों में से एक था. उसके भाइयों में लाल सिंह, पान सिंह और पप्पू गुर्जर शामिल हैं. पप्पू गुर्जर वर्तमान में धौलपुर जिला कारागार में बंद है, जबकि पान सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है और वह पैरोल पर बाहर बताया जा रहा है. लाल सिंह के खिलाफ भी गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं. इनमें जगन और पप्पू गुर्जर को सबसे कुख्यात माना जाता रहा है.

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निजी जीवन और शादियां: अपराध के साथ-साथ जगन अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी चर्चा में रहा. उसने तीन शादियां की थीं. बीहड़ में रहते हुए उसने राजनीति में भी कदम रखने की कोशिश की. उसकी पत्नियों में से एक ने धौलपुर इलाके से विधानसभा का चुनाव भी लड़ा था, जिसके चलते उसका स्थानीय गांवों में काफी सियासी प्रभाव भी माना जाता था.

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सचिन पायलट के सामने हथियार डाले: जगन गुर्जर ने पुलिस और प्रशासन के भारी दबाव के आगे चार बार नाटकीय अंदाज में आत्मसमर्पण (सरेंडर) किया, जो उसकी गिरफ्तारी का अनोखा तरीका बन चुका था. उसने सबसे पहले साल 2001 में, फिर देशव्यापी चर्चा बटोरते हुए साल 2009 में तत्कालीन सांसद सचिन पायलट के सामने करौली के कैलादेवी मंदिर में भारी हथियारों के साथ सरेंडर किया था.

इसके बाद, साल 2018 में धौलपुर के कंचनपुर में उसने तीसरी बार पुलिस के सामने घुटने टेके. बाड़ी के तत्कालीन विधायक को धमकी देने के बाद जब पुलिस ने उस पर 50,000 का इनाम घोषित किया, तब उसने फरवरी 2022 में अपनी पत्नी के साथ करौली के मसलपुर के जंगलों से चौथी बार खुद को पुलिस के हवाले कर दिया था. वह एनकाउंटर के डर से हमेशा सीधे मुकाबले के बजाय सुनियोजित सरेंडर का रास्ता चुनता था.

बेटी की शादी में खाई थी कसम: करीब 15 साल पहले बेटी की शादी के दौरान जगन ने सार्वजनिक रूप से अपराध छोड़ने की कसम खाई थी. उसने आत्मसमर्पण भी किया, लेकिन हर बार जमानत पर बाहर आने के बाद फिर बीहड़ों की राह पकड़ ली. यही वजह रही कि उसका नाम लगातार अपराध की दुनिया से जुड़ा रहा.

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महिलओं का अपमान और अपराध: साल 2019 में जगन पर धौलपुर के करनपुर-सायकापुरा गांव में दो महिलाओं के साथ मारपीट कर उन्हें निर्वस्त्र घुमाने का आरोप लगा था. उसके खिलाफ एक पुलिसकर्मी की हत्या का भी मामला दर्ज रहा. राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में हत्या, अपहरण, फिरौती, डकैती और लूट जैसे कई गंभीर मामलों में वह आरोपी था.

2022 में विधायक को दी थी धमकी: जनवरी 2022 में उसने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर तत्कालीन बाड़ी विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था. इसके बाद धौलपुर पुलिस ने उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया. कुछ समय बाद उसने फिर आत्मसमर्पण कर दिया.

सीएम के महल को उड़ाने की धमकी: जगन गुर्जर का नाम राजस्थान के अपराध इतिहास में हमेशा दर्ज रहेगा. वह साधारण डकैत नहीं था. साल 2008 में उसने राजस्थान की तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर स्थित महल को बम से उड़ाने की सीधी धमकी दी थी, जिसके बाद तत्कालीन सरकार और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था. चंबल और पूर्वी राजस्थान में जगन का खौफ ऐसा था कि लोग शाम ढलते ही घरों से बाहर नहीं निकलते थे.

चंबल के बीहड़ों में दो दशक तक पुलिस के लिए चुनौती बना रहा जगन गुर्जर आखिरकार जेल की बैरक में मारा गया, जिसने कभी पुलिस को खुली चुनौती दी, मुख्यमंत्री के महल को उड़ाने की धमकी दी, आत्मसमर्पण किया, फिर अपराध की दुनिया में लौटा और 123 से अधिक मुकदमों का आरोपी बना रहा. उसकी कहानी अब मौत के साथ खत्म हो गई, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही ह कि हाई सिक्योरिटी जेल की बैरक में आखिर ऐसा क्या हुआ कि चंबल का सबसे चर्चित डकैत अपनी आखिरी सांस तक नहीं बचा सका.

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