ड्रिप चढ़ाकर आंदोलन, उम्मीद की आख़िरी चौखट पर दी दस्तक, D.Ed अभ्यर्थियों का निकला दर्द
आमरण अनशन पर बैठे कई लोगों की तबीयत भी बिगड़ने लगी है. इसके बावजूद अभ्यर्थियों को उम्मीद है, सीएम उनकी समस्या का समाधान करेंगे.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : January 8, 2026 at 7:03 PM IST
रायपुर: प्रदेश के D.Ed प्रशिक्षित बेरोज़गार अभ्यर्थियों का सब्र अब जवाब दे चुका है. 24 दिसंबर से आमरण अनशन पर बैठे युवा आज अपनी बिगड़ती सेहत और टूटती ताकत के बावजूद मुख्यमंत्री निवास पहुंचे, ताकि एक बार फिर अपनी नौकरी की फरियाद सीधे सरकार तक पहुंचा सकें. किसी के हाथ में ड्रिप के निशान थे, तो किसी की आंखों में कई रातों की नींद न होने की थकान, लेकिन फिर भी उम्मीद ज़िंदा थी कि शायद आज उनकी बात सुनी जाएगी.
अस्पताल से सीधे आंदोलन, आंदोलन से मुख्यमंत्री निवास
अभ्यर्थियों का कहना है कि ''जनदर्शन में पहुंचने से पहले उनकी हालत बेहद खराब थी. कई लोग अस्पताल गए, ड्रिप लगवाई और उसके बाद सीधे मुख्यमंत्री निवास पहुंचे. उन्होंने कहा कि आमरण अनशन की वजह से शरीर जवाब दे रहा है, लेकिन मन अभी भी हार मानने को तैयार नहीं है. कई साथी बार-बार बीमार पड़ रहे हैं, इलाज कराकर फिर आंदोलन स्थल पर लौट आ रहे हैं, क्योंकि अब यह लड़ाई सिर्फ नौकरी की नहीं, बल्कि सम्मान और अस्तित्व की बन चुकी है.''
24 दिसंबर से आमरण अनशन, हर दिन बढ़ता खतरा
बीते कई दिनों से ये अभ्यर्थी लगातार आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं. 24 दिसंबर से शुरू हुआ यह आंदोलन अब जिंदगी और मौत की दहलीज पर पहुंचता दिख रहा है. अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी हालत लगातार बिगड़ रही है, फिर भी सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है. उनका दर्द यह है कि वे अपनी सेहत खो रहे हैं, लेकिन सरकार की संवेदनशीलता अब तक नहीं जागी है.
हाईकोर्ट का आदेश भी बेअसर, 2300 पद आज भी खाली
अभ्यर्थियों का आरोप है कि हाईकोर्ट ने साफ निर्देश दिए थे कि रिक्त पदों पर दो महीने के भीतर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए, लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. लोगों ने कहा आज भी लगभग 2300 पद खाली पड़े हैं, हजारों प्रशिक्षित युवा बेरोज़गारी का दंश झेल रहे हैं. जब न्यायालय के आदेश भी फाइलों में दब जाएं, तो आम युवा आखिर अपनी उम्मीद कहां लेकर जाएं.
मुख्यमंत्री से मुलाकात, लेकिन हाथ फिर भी खाली
जनदर्शन में मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद अभ्यर्थियों ने बताया कि उन्होंने अपनी पूरी पीड़ा उनके सामने रखी और मांग पत्र भी सौंपा है. मुख्यमंत्री की ओर से कार्रवाई का आश्वासन जरूर मिला, लेकिन उन्हें अब भी यह नहीं बताया गया कि उनकी मांग कब तक पूरी की जाएगी. अभ्यर्थियों का कहना है कि वे सालों से सिर्फ आश्वासन ही सुनते आ रहे हैं, जबकि उनकी ज़िंदगी इंतजार करते-करते थक चुकी है.
''खून से लिखा पत्र, फिर भी नहीं पसीजा सरकार का दिल''
अपने दर्द को जताने के लिए इन अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम खून से पत्र तक लिखा. कई मंत्रियों, नेताओं और अधिकारियों से मिल चुके हैं, लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है. यही वजह है कि आज वे आखिरी उम्मीद लेकर मुख्यमंत्री निवास पहुंचे हैं, ताकि शायद अब सरकार उनके दर्द की गंभीरता को समझ सके.
''अब यह लड़ाई सिर्फ नौकरी की नहीं, ज़िंदगी की है''
D.Ed अभ्यर्थियों का कहना है, अब यह संघर्ष केवल रोजगार पाने का नहीं रह गया है, बल्कि यह उनके भविष्य और अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है. अगर अब भी सरकार ने फैसला नहीं लिया, तो न जाने यह इंतजार कितनी और जिंदगियों की कीमत वसूल लेगा.

