ETV Bharat / state

साइबर क्राइम समाज के लिए नासूर, डीआईजी पुस्तक के जरिए लोगों को कर रहे हैं जागरूक

साइबर क्राइम आज समाज की सबसे बड़ी समस्या है. इससे कैसे उबरा जाए इसको लेकर लिखी गई किताब पर चर्चा हुई. पढ़ें खबर

Cyber Storied Path Digital Security
साइबर कथाएं-डिजिटल सुरक्षा की राह (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Bihar Team

Published : March 2, 2026 at 9:03 PM IST

4 Min Read
Choose ETV Bharat

पटना : भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी सुशील कुमार की किताब 'साइबर कथाएं-डिजिटल सुरक्षा की राह' पर परिचर्चा का आयोजन पटना की रंग संस्था अभियान सांस्कृतिक मंच द्वारा किया गया. इस मौके पर बड़ी संख्या में पटना के साहित्यकार, रंगकर्मी, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता सहित समाज के विभिन्न क्षेत्रों के लोग मौजूद थे.

साहित्यकारों ने की सराहना : पुस्तक पर परिचर्चा में शामिल हुए नीरज गुरु ने कहा कि किताब का टाइटल डिजिटल सुरक्षा की राह बहुत महत्वपूर्ण है. आजकल डिजिटल अरेस्ट कर लिया जाता है. ऐसे में साइबर सुरक्षा की जरूरत है. किताब में भोजपुर जिले की एक शिक्षिका की कहानी के माध्यम से अपनी बात कही गई है. इसमें पचास कहानियां शामिल हैं. साइबर क्राइम के मोड्स ऑपरेंडी से हमें परिचित कराती है.

साइबर क्राइम से बचाएगी पुस्तक : बिहार प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष व चर्चित कथाकार संतोष दीक्षित ने अपने संबोधन में कहा कि मेरे लिए आज दोहरी खुशी है. सुशील कुमार को मैं कवि मानता था, लेकिन अब वे कथा की ओर आ रहे हैं. साइबर क्राइम संगठित रूप से कॉल सेंटर चलाकर किया जाता है.

"हिंदी में यह अपने ढंग की पहली किताब है. कथाजगत का यह आधुनिक विस्तार है. अपने यहां पंचतंत्र और जातक कथाओं की बातें हमारी स्मृतियों में मौजूद हैं. यह किताब उसका आधुनिक रूप है. यह अपराध की कार्यशैली को कथाओं के माध्यम से सामने लाकर जागरूक तो बनाता ही है, हमें सुरक्षित भी करता है. साइबर की दुनिया रोमांचकारी और खतरों से भी भरी हुई है.शिल्प की दृष्टि से रिपोर्ताज और कथा दोनों हैं."- संतोष दीक्षित, अध्यक्ष, बिहार प्रगतिशील लेखक संघ

Cyber Storied Path Digital Security
परिचर्चा के दौरान अपनी बात रखते गणमान्य (ETV Bharat)

आसान भाषा में समझाने की कोशिश : एमिटी यूनिवर्सिटी में लॉ फैकल्टी के डीन राजीव रंजन ने अपनी बात को तीन हिस्सों में बताते हुए कहा कि साइबर अपराध जितने बड़े पैमाने पर हो रहे हैं. इससे संबंधित जितने तकनीकी टर्म्स रहे हैं वे बहुत अदबी अंदाज में और डिटेल में लिखे गए हैं. कहीं से भी पुलिस डायरी नहीं लगता है. तकनीकी बातों को आसान भाषा में समझाने की कोशिश की है. इस कारण पुस्तक का आकस्मिक मूल्य बढ़ जाता है.

कवि रमेश ऋत्मभर ने अपने संबोधन में कहा कि पूंजीवाद के संकट के दौर में हमारे अंदर के भय, छल और कपट को सामने लाती है. यह क्राइम से बचने की कोई किताब नहीं है.यह लेखन है, रचनात्मक लेखन है. हम कैसे और क्यों ठग लिया जाता है? हम लालच के कारण ठगे जाते हैं. यह हमारे समय समाज के अंदर के ठग लिए जाने की प्रवृत्ति की को समाने लाता है.

"इस किताब की हर कहानी एक नए पहलू को सामने वाली और सतर्क करने वाली किताब है. हम बेफिजूल की चीजों में लगे रहते हैं. हमारा लगातार स्क्रीन पर बने रहना एक्सपोज करता है. हमारे पड़ोसी मुल्कों में साइबर स्लेवरी की बात चलती है. हमें ट्रैक किया जाता है कि हम क्या देख रहे हैं, क्या पसंद है, नहीं है. फिर जाल बिछाया जाता है."- प्रियदर्शी मातृशरण, वकील

डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें? : साहित्यकार व अध्येता दानिश ने अपनी टिप्पणी में बताया कि पाठक इस पुस्तक को पढ़ते हुए कथा रिपोर्ताज की शैली में लिखी गई है. इस विषय पर कथेतर गद्य की यह पहली किताब है. ग्लोब में बैठा दुनिया का कोई आदमी कहीं से भी बैठकर आपको डिजिटल अरेस्ट कर सकता है. इस पुस्तक का शीर्षक भी इस पुस्तक की विशेषता है. ज्यादातर अपराध करने वाले पैंतीस वर्ष से कम उम्र के लोग कर रहे हैं. यही लोग बेरोजगार भी हैं. ऑनलाइन साइबर अपराध को अंजाम देने वाले यही लोग हैं.

पुस्तक में साइबर अपराध से बचने के उपाय : पुस्तक लेखक सुशील कुमार ने अपनी रचना प्रक्रिया के बारे में बताया कि साइबर से संबंधित अपराध जब 2015 से 2018 के बीच बढ़ रहा था तब थाने से भगा दिया जाता था. पुस्तक को सरल भाषा में कैसे ले जाई जाए इसे लेकर चुनौती थी. मैं छोटी छोटी कहानियों के माध्यम से अपनी बात कहने की कोशिश की. किताब को रोचक बनाने के लिए शीर्षक रखे गए हैं. सभी अच्छी कहानियां हैं, पर जिनकी कहानियां हैं, उनकी निजता का सम्मान करने के लिए नाम बदल दिया गया है.

ये भी पढ़ें :-

'साइबर कथाएं' जिसने लगा दिया करोड़ों का चूना, जानें डिजिटल अरेस्ट के मायाजाल से कैसे बचें ?