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10 हजार डॉलर डिपोजिट हुआ, क्लियरेंस करवा लो...युवक से 9 लाख का साइबर फ्रॉड

जायस थाना प्रभारी निरीक्षक अमरेंद्र सिंह ने बताया कि मोहल्ला बड़ा गोरियाना निवासी पीड़ित की तहरीर पर केस दर्ज है.

साइबर ठगी का नया पैटर्न.
साइबर ठगी का नया पैटर्न. (Photo Credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : February 26, 2026 at 12:44 PM IST

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अमेठी: बैंक खाते में फर्जी तरीके से डॉलर डिपोटिव दिखाकर अमेठी के युवक से 9 लाख रुपए ठग लिए गए. जब तक युवक को फ्रॉड का अहसास हुआ, तब तक वह सारा पैसा गंवा चुका था. फिलहाल, पुलिस ने केस दर्ज करके मामले की जांच-पड़ताल शुरू कर दी है.

जायस थाना प्रभारी निरीक्षक अमरेंद्र सिंह ने बताया कि मोहल्ला बड़ा गोरियाना निवासी रिजवान अहमद पुत्र अमानुल हक की तहरीर पर केस दर्ज कर लिया गया है. ठगी में इस्तेमाल मोबाइल नंबर खाता नंबर का विवरण खंगाला जा रहा है.

फ्रॉड का पैटर्न: जायस थाना क्षेत्र के मोहल्ला बड़ा गोरियाना निवासी रिजवान ने पुलिस को बताया कि 19 नवंबर 2025 को उसके पास इंटरनेशनल व्हाट्सअप कॉल आई. कॉलर ने अपना नाम सुलेमान अयूब बताया. उसने अपना आधार और एक UK कार्ड भी वाट्सअप के जरिए शेयर किया.

बातचीत में उसने मेरे खाते में डॉलर जमा करने का विश्वास दिलाया. अकाउंट डिटेल मांगा. पीड़ित ने अपनी भाभी अफसरी बेगम का खाता डिटेल भेज दिया. फिर ठग ने बताया कि खाता में शून्य बैलेंस है. इसके बाद उसने मुझे बैंक ऑफ अमेरिका की डिपॉजिट स्लिप भेजी, जिस पर भाभी का अकाउंट डिटेल था.

डॉलर का झांसा: उसने कहा कि खाते में 10 हजार डॉलर डिपोजिट कर दिया है. साथ ही उसने एक मोबाइल नंबर दिया और बताया कि यह SBI के मुंबई ब्रांच का है. वहां फोन करने के लिए कहा.

जब हमने उस नंबर पर फोन किया तो सामने वाले ने कहा कि इस खाते में डॉलर जमा है, इसे रुपए में कंवर्ट करवा लो, ताकि पैसा भारत के खाते में जमा हो सके.

क्लियरेंस के नाम पर ठगी: इसके बाद क्लियरेंस के नाम पर पहले 5 हजार रुपए मांगे. हमने UPI के जरिए पैसा ट्रांसफर किया तो सैफ अली नाम लिखकर आ रहा था. इसके बाद एक और मोबइल नंबर दिया गया.

उस नंबर से मुझे QR Code मिले. क्लियरेंस के नाम पर 10 दिसंबर 2025 तक अलग-अलग डिपार्टमेंट में क्लियरेन्स के नाम पर मुझसे थोड़ा-थोड़ा पैसा ट्रांसफर कराया गया. पीड़ित ने बताया कि अलग-अलग QR Code पर हमने क्लियरेंस के नाम पर करीब 9 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए.

यह पैसा अपने परिवार, दोस्तों से उधार लेकर भेजा. इसी दौरान एक दोस्त ने चेतावनी दी कि कहीं आप साइबर ठगी के शिकार तो नहीं बन रहे हैं? दोस्त की बात से अहसास हुआ कि यह तो फ्रॉड है. इसके बाद पुलिस में केस दर्ज कराया गया.

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