जागते रहो : डिलीवरी एजेंट का एक फोन कॉल, खाली कर सकता है आपका बैंक खाता
USSD आधारित कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम के जरिए अपराधी लोगों की डिजिटल पहचान और बैंक खातों पर सीधा हमला कर रहे हैं.

Published : January 3, 2026 at 11:54 AM IST
जयपुर : राजस्थान पुलिस ने साइबर ठगी के एक बेहद खतरनाक और नए तरीके का खुलासा करते हुए आमजन को सतर्क रहने की चेतावनी दी है. साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट की ओर से जारी एडवाइजरी में बताया गया है कि USSD आधारित कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम के जरिए अपराधी डिलीवरी एजेंट बनकर लोगों की डिजिटल पहचान और बैंक खातों पर सीधा हमला कर रहे हैं. पुलिस महानिदेशक (साइबर क्राइम) के मार्गदर्शन में जारी इस एडवाइजरी में साफ किया गया है कि एक छोटी सी लापरवाही आपकी पूरी जमा पूंजी को खतरे में डाल सकती है.
क्या है USSD स्कैम और कैसे करते हैं ठग वारदात : उपमहानिरीक्षक पुलिस (साइबर क्राइम) विकास शर्मा ने बताया कि इस नए ट्रेंड में साइबर अपराधी खुद को कूरियर या डिलीवरी सर्विस का एजेंट बताकर नागरिकों को फोन करते हैं. पार्सल डिलीवरी कंफर्म करने या रीशेड्यूल करने का बहाना बनाकर वे पीड़ित को भरोसे में ले लेते हैं. इसके बाद पीड़ित को एक कोड भेजा जाता है, जो अक्सर 21, 61 या 67 से शुरू होता है और उसके पीछे ठग का मोबाइल नंबर जुड़ा होता है. अपराधी पीड़ित पर इस कोड को तुरंत डायल करने का दबाव बनाते हैं. यह कोड USSD (Unstructured Supplementary Service Data) तकनीक पर आधारित होता है, जिसे डायल करते ही मोबाइल की कॉल फॉरवर्डिंग सेवा सक्रिय हो जाती है.
कॉल फॉरवर्ड होते ही ठगों तक पहुंच जाते हैं OTP : जैसे ही कॉल फॉरवर्डिंग एक्टिव होती है, पीड़ित के फोन पर आने वाली सभी जरूरी कॉल्स सीधे ठग के मोबाइल पर फॉरवर्ड हो जाती है. इसमें बैंक से आने वाली OTP वेरिफिकेशन कॉल, पेमेंट कन्फर्मेशन कॉल और यहां तक कि व्हाट्सएप या टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ऑथेंटिकेशन कोड भी शामिल हैं. इसका फायदा उठाकर साइबर ठग बैंक खातों से अनधिकृत लेन-देन कर लेते हैं और पीड़ित के सोशल मीडिया अकाउंट्स को भी हैक कर लेते हैं.
पढे़ं. अलवर में बढ़ा साइबर क्राइम: इस साल 425 अपराधी दबोचे, पीड़ितों को वापस दिलवाए 67 लाख रुपए
सुरक्षा का सबसे आसान उपाय : ##002# : साइबर क्राइम शाखा ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉलर के कहने पर कोई भी कोड डायल न करें. यदि किसी को संदेह हो कि उसकी कॉल फॉरवर्ड हो रही है तो तुरंत ##002# डायल करें. इससे मोबाइल की सभी कॉल फॉरवर्डिंग सेवाएं तत्काल कैंसिल हो जाती हैं. इसके अलावा किसी भी कूरियर या डिलीवरी की जानकारी हमेशा संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या कस्टमर केयर नंबर से ही सत्यापित करें. एसएमएस या व्हाट्सएप पर आए संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें.
पढ़ें. मनी लांड्रिंग केस में नाम होने का दिखाया डर, 7 दिन बुजुर्ग महिला रही डिजिटल अरेस्ट, ठगे 1.25 करोड़
ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत : डीआईजी विकास शर्मा ने स्पष्ट किया कि बैंक और पुलिस की ओर से भेजे जाने वाले जागरूकता संदेशों को गंभीरता से लें. यदि कोई व्यक्ति इस तरह की साइबर ठगी का शिकार होता है, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें. इसके साथ ही [www.cybercrime.gov.in](http://www.cybercrime.gov.in) पोर्टल पर शिकायत दर्ज की जा सकती है. राजस्थान पुलिस ने आमजन की सुविधा के लिए दो व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर 9256001930 और 9257510100 भी जारी किए हैं.

