थाईलैंड में नौकरी बताकर पहुंचाया म्यांमार, बंधक बनाकर साइबर फ्रॉड का दिया काम, ऐसे हालातों से 21 युवा लौटे घर
पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी करने वाले आरोपी को अरेस्ट किया है. ये पूरा गैंग नौकरी के नाम पर युवाओं को जबरन साइबर फ्रॉड करवाता था.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : November 14, 2025 at 9:10 AM IST
रुद्रपुर/देहरादून: विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं की मानव तस्करी और बंधक बनाकर साइबर फ्रॉड कराने के अंतरराष्ट्रीय गिरोह में शामिल एक एजेंट को जसपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया है. आरोपी युवकों को दिल्ली से बैंकॉक और वहां से म्यांमार ले जाकर बंधक बनाते थे और फिर भारतीय नागरिकों से साइबर ठगी का काम करवाते थे. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है.
गौर हो कि, उत्तराखंड में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी थमने का नाम नहीं ले रही है. साइबर ठग आए दिन लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं. इसी कड़ी में थाईलैंड में जॉब दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवकों को गैरकानूनी तरीके से म्यांमार भेजने और उन्हें बंधक बनाकर साइबर फ्रॉड में कार्य कराने के मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है.
पुलिस के मुताबिक 13 नवंबर 2025 को शिकायतकर्ता मो. आजम ने तहरीर सौंपकर बताया था कि मोहल्ले में रहने वाले सुनील ने आजम और जुनैद के परिवार से संपर्क कर दोनों को विदेश में कंप्यूटर कार्य दिलाने का झांसा दिया था. इसके एवज में उनसे 70-70 हजार रुपये लिए गए थे. 15 सितंबर को आजम और उसके साथी जुनैद को दिल्ली से बैंकॉक की फ्लाइट में बैठाया गया. बैंकॉक एयरपोर्ट पर पहुंचने पर वहां उन्हें एक व्यक्ति मिला जिसने उनको नदी और जंगल के रास्ते से नाव से म्यांमार पहुंचाया.
म्यांमार में उनसे जबरन साइबर फ्रॉड से संबंधित कम्प्यूटर कार्य लिया जा रहा था. जब आजम ने ये घटना अपने पिता को बताई तो आजम के पिता ने एजेंट सुनील से संपर्क किया तो सुनील ने उनको वापस बुलाने के लिए 4 लाख रुपए मांगे. इसी बीच आजम और जुनैद 22 अक्टूबर को किसी तरह साइबर अपराधियों के कब्जे से भागकर थाईलैंड बॉर्डर पहुंचे. वहां बॉर्डर पर आर्मी वालों को आपबीती बताई. वहां के सैन्य अधिकारियों ने भारतीय दूतावास से संपर्क करके आजम, जुनैद और अन्य युवाओं का रेस्क्यू करवाया और भारत वापस भेजा गया.
तहरीर के आधार पर जसपुर पुलिस ने आरोपी सुनील के खिलाफ धारा (1)(घ)/ 143(3)/ 146/ 318(4)/ 351(2)/ व 352 BNS में मुकदमा दर्ज करते हुए उसे गिरफ्तार किया है. पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने जानबूझकर पीड़ित आजम और जुनैद के साथ धोखाधड़ी की. थाईलैंड में आफिस वर्क की नौकरी देने के नाम पर साइबर फ्रॉड के कार्य से म्यांमार भेजा गया. परिजनों द्वारा संपर्क करने पर उनके साथ गाली-गलौज कर जान से मारने की धमकी दी.
कोतवाली पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया. पुलिस को आशंका है कि आरोपी के इंटरनेशनल गैंग से तार जुड़े हुए हैं. पुलिस टीम सभी पहलुओं की जांच कर रही है.
वहीं, इसी मामले में साइबर एएसपी कुश मिश्रा ने राजधानी देहरादून में प्रेसवार्ता की. उन्होंने बताया कि हाल में उत्तराखंड के 21 युवा म्यांमार के साइबर ठग गैंग से मुक्त होकर वापस लौटे हैं. इनमें से कई युवाओं को जयपुर निवासी एजेंट सुनील ने ही विदेश भेजा था. जांच में सामने आया है कि सुनील म्यांमार में रहने वाली चीनी नागरिक पिंकी नाम की महिला के संपर्क में था. पिंकी साइबर ठगी करने वाले गैंग की सदस्य है.
साइबर ठग गैंग से बचकर लौटे राज्य की युवाओं को भेजने वाले एक और एजेंट का पता लगा है. उसके खिलाफ भी जांच शुरू कर दी गई है. विदेश में नौकरी के झांसे में आकर साइबर ठगी के जाल में फंसे लोगों को वहां से निकलने की कवायद की जा रही है. आगामी 18 नवंबर को भी विदेशी साइबर ठग गैंग में फंसे राज्य के कुछ पीड़ित वापस आ सकते हैं.
- कुश मिश्रा, साइबर एएसपी -
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