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किस तरह से हो रही साइबर ठगी, डिजिटल युग में फ्रॉड से कैसे बचें, एक्सपर्ट मोहित साहू से जानिए

आजकल साइबर ठगी के बड़े केस सामने आ रहे हैं. कौन सी सावधानी आपको बचा सकती है. पेश है रितेश तंबोली की रिपोर्ट

Tips from cyber expert Mohit Sharma
साइबर एक्सपर्ट मोहित शर्मा के टिप्स (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : June 27, 2026 at 6:36 PM IST

13 Min Read
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रायपुर: छत्तीसगढ़ के साथ ही पूरे देश में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. साइबर ठग अलग-अलग तरीके से साइबर ठगी की वारदात को अंजाम देने में सफल हो रहे हैं. चाहे वह डिजिटल अरेस्ट का मामला हो या फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाली ठगी हो. साइबर ठग डिजिटल अरेस्ट करके भी लोगों से पैसे वसूल रहे हैं. कई बार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साइबर ठग विज्ञापन के जरिए पैसे कमाने का झांसा देकर ठगी करने में कामयाब हो रहे हैं. साइबर ठग ज्यादा पैसे का लालच देकर भी लोगों को अपने झांसे में लेने में सफल हो रहे हैं. लोग अपने जीवन भर की गाढ़ी कमाई मिनटों में गवां दे रहे हैं.

साइबर ठग ऐसे ऐसे तरीके और ट्रिक का इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे लोगों के खाते से पैसे कुछ मिनट में ही गायब हो जा रहे हैं. वर्तमान में साइबर ठग किस तरह की ठगी की वारदात को ज्यादा अंजाम दे रहे हैं और लोगों को इससे कैसे सतर्क और सावधान रहना है. किस तरह की सावधानी बरती जानी चाहिए. इन्हीं तमाम विषयों को लेकर ईटीवी भारत ने साइबर एक्सपर्ट मोहित साहू से बात की. आइए जानते हैं उन्होंने साइबर ठगी की वारदात या घटना से कैसे और किस तरीके से बचा जा सकता है.

साइबर एक्सपर्ट मोहित साहू से बातचीत (ETV BHARAT)

सवाल: आजकल सबसे ज्यादा कौन से फ्रॉड हो रहे हैं और किस तरीके से हो रहे हैं ?

जवाब: देखिए अभी साइबर वर्ल्ड में नए-नए फ्रॉड देख पा रहे हैं. उसमें सबसे ज्यादा फ्रॉड टॉप ट्रेंड फ्रॉड है. उसमें वह भी एपीके से रिलेटेड फ्रॉड. एपीके का मतलब आपके एंड्राइड मोबाइल पर एपीके फाइल भेजी जाती है. एक एप्लीकेशन भेजा जाता है. यह एप्लीकेशन अलग-अलग सरकारी योजनाओं से रिलेटेड होता है. जैसे पैन कार्ड अपडेट करना है. ड्राइविंग लाइसेंस अपडेट करना है. उससे रिलेटेड आपको एपीके फाइल भेजी जाती है. यह गवर्नमेंट का ऐप है. इसके थ्रू आप अपडेट कर लीजिए. क्योंकि इसमें कम डेड लाइन गवर्नमेंट ने दे दिया है. ऐसे में लोगों की सोच होती है कि मुझे अपडेट करना है तो तुरंत जाकर के इस ऐप में अपना डाटा डालना शुरू करते हैं और यह ऐप को इंस्टॉल करते हैं. होता क्या है कि जैसे आप ऐप को इंस्टॉल करते हैं तो साइबर ठग पूरे मोबाइल पर कंट्रोल ले लेते हैं. आपसे डाटा तो ले ही लिया. मोबाइल पर कंट्रोल ले लिया. उसके बाद जो भी आपके एसएमएस आते है. ओटीपी से रिलेटेड वह इनके कंट्रोल में आ जाते हैं. वह मोबाइल से डाटा चुराने लगते हैं. उसके बाद यह आपके पूरे बैंक खाते को खाली कर देते हैं.

इसी तरह दूसरे और भी फ्रॉड हैं. पार्सल से रिलेटेड फ्रॉड इसमें क्या होता है कि आपको बोला जाता है. सामान्य तौर पर हम लोगों की आदत होती है कि हम सीओडी आर्डर करते हैं. कई बार ऑनलाइन आर्डर करके हम भूल जाते हैं. ऐसे में एक दिन आपके पास फोन आता है कि आपका नाम पर एक पार्सल आया है. कई बार इसे आप वेरीफाई नहीं करते. आपको लगता होगा कि हां पार्सल आया होगा. घर पर जो मेंबर होते हैं आप ऑफिस में है या कहीं और पर हैं. आपका नाम पर पार्सल आता है घर वालों को लगता है कि शायद इसने कुछ मंगाया होगा. सीओडी पर है तो पेमेंट कर देते हैं. असल में ऐसा कुछ होता नहीं है. फर्जी पार्सल होता है. आप पेमेंट करते थे हैं और आपको बाद में पता चलता है आपने तो कोई आर्डर किया ही नहीं है. इस तरीके के भी फ्रॉड देखने को मिल रहे हैं.

तीसरा जो फ्रॉड है वह एक्सटॉर्शन का है. इसके बारे में बातचीत कम होती है पर वह बहुत ज्यादा होता है. इसकी रिपोर्टिंग भी बहुत कम होती है. अकेले या फिर अधेड़ उम्र के लोग उनको साइबर ठग फेसबुक या फिर दूसरे सोशल मीडिया के माध्यम से बात करते हैं. आपके फर्जी वीडियो मार्फ़ वीडियो बनाकर के आपको ब्लैकमेल करने का ट्राई करते हैं. ऐसे फ्रॉड की रिपोर्टिंग भी नहीं होती. हमारा सामाजिक ढांचा ऐसा बना हुआ है कि लोग थाने में रिपोर्ट करने से डरते हैं. वह फैमिली अपने रिश्तेदार या फिर अपने दोस्तों को भी नहीं बता पाते. ब्लैकमेलिंग के चक्कर में फंसकर पैसे देते जाते हैं. वहां पर ऐसे पीड़ित फंस जाते हैं.

ऐसा करके साइबर ठग हेलो इफेक्ट साइबर क्रिमिनल क्रिएट करते हैं. साइबर ठग आपके बारे में कुछ जानकारी बता देते हैं. आपके बारे में कुछ व्यक्तिगत जानकारी ठग देकर आपको झांसे में लेते हैं. फिर लोगों को डराया और धमकाया जाता है. डिजिटल अरेस्ट के तरीके के भी फ्रॉड यही होते हैं. साइकोलॉजिकल इफैक्ट डालकर ब्लैकमेलिंग करते हैं. साइबर ठग आपकी डिटेल आपको पहले से भेज देते हैं. जब आपको लगता है कि इसको सब पता है तो फिर बाकी डिटेल पीड़ित खुद बताने लगता है. चाहे वह बैंक अधिकारी बनके कस्टम ऑफिसर बनकर करें. ऐसा करके साइबर ठग अलग-अलग तरीके से अपनी ठगी की वारदात को अंजाम देते हैं.

सवाल: आमतौर पर लोग किस तरह की गलती करते हैं जिससे ठगी के शिकार होते हैं ?

जवाब: देखिए सबसे ज्यादा लोगों के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि कोई भी तरीके का साइबर फ्रॉड हो. जब उनके पास कोई लिंक आता है तो या फिर कोई पार्सल आ रहा है कोई फोन कॉल आ रहा है या फिर कोई एसएमएस आ रहा है. लोग इसे हमेशा वेरीफाई नहीं करते. उसको क्रॉस भी नहीं करते. जब वह क्रॉस वैलिडेट नहीं करते हैं तो पहले तो वह ठग को अपना डाटा दे देते हैं. या फिर डायरेक्टली उस एपीके फाइल को डाउनलोड कर लेते हैं. जब यह पहली गलती पहले क्लिक पर होती है. पहल क्लिक में आपने गलत किया. पहले कॉल आपने एक्सेप्ट कर लिया. वहीं पर आप फंस जाते हैं, तो लोगों में सबसे बड़ी मिस्टेक होती है. इसके बाद वह फंसता चला जाता है. धीरे से उनके पैसे पूरे गायब हो जाते हैं.

सवाल: साइबर अपराधियों के नए-नए कौन-कौन से तरीके हैं जिससे यह लोग ठगी की वारदात को अंजाम देते हैं ?

जवाब: देखिए जैसे मैंने बताया अभी सबसे बड़ा जो वारदात है एपीके का था. दूसरा जो वारदात है वह डिजिटल अरेस्ट का है. एक दूसरे तरीका की ठगी जिसमें लोग कहते हैं कि मैं कुछ किया भी नहीं वह पैसा भी मेरा चला गया जो अकाउंट में था. यह ऐसा फ्रॉड है जो आधार पेमेंट सिस्टम होता है. इसमें आपका आधार कार्ड से रिलेटेड डाटा कहीं और से चुरा कर लाते हैं. आपका आधार इनेबल जो बैंक अकाउंट है कनेक्ट है. वहां से यह पैसा गायब कर रहे हैं. ऐसे भी फ्रॉड देखने को मिल रहे हैं.

सवाल: यूपीआई और QR कोड स्कैम से कैसे बचा जा सकता है ?

जवाब: देखिए यूपीआई में मैं मानता हूं बहुत सेफ एंड सिक्योर सिस्टम है. ऐसे में लोग यूपीआई में फंसने के सबसे ज्यादा चांसेस मान लीजिए. आप किसी दुकान पर जा रहे हैं और वहां पर आप स्कैन कर रहे हैं तो आप सिर्फ उसे दुकानदार को पेमेंट कर रहे हैं. लेकिन यूपीआई में फ्रॉड कैसे होता है आपको एक एसएमएस आता है. आपको इस अकाउंट पर 1 रुपये रिसीव हो रहा है. आपने मैसेज पढ़ा कि आपको पैसा मिला. आपने उस पर क्लिक किया वह आपको यूपीआई एप पर ले जाएगा. वहां पर आपको साइबर फ्रॉड बोलेगा कि आपके अकाउंट में मेरे को पैसा डालना था. उस पर क्लिक करिएगा. यूपीआई का पिन डालिएगा. आपके अकाउंट में पैसे आ जाएंगे. किसी भी तरह का पेमेंट रिसीव करते हैं तो यूपीआई पिन डालना जरूरी नहीं. यूपीआई में किसी को पेमेंट करना है तभी पिन डालने की जरूरत पड़ती है. यूपीआई के माध्यम से इस तरह के फ्रॉड होते हैं.

क्यूआर कोड में आपको QR दे दिया जाता है. इसके साथ ही स्कैन करने के लिए बोला जाता है. इसको स्कैन करिए हम आपके अकाउंट में पैसा डलवा देते हैं. आपके कुछ पैसे हैं जो अपने जीते हैं. किसी इवेंट के थ्रू या फिर यह बताया जाता है कि या फिर किसी इवेंट के आप लकी विनर हैं. यहां पर जब लोग इस चीज को स्कैन करते हैं. तब वह उस जगह पर फंस जाते हैं. यूपीआई में इस तरीके से फ्रॉड होता है. लोग पैसे लेने के लिए भी पिन डालते हैं. इस बात का लोगों को हमेशा ध्यान रखना होगा कि किसी को पेमेंट करते समय ही यूपीआई में पिन इंटर करना है.

सवाल : अगर किसी ठग को गलती से पैसा चला जाए ऐसी स्थिति में अपने को क्या करना चाहिए ?

जवाब: अगर आपने किसी ठग को पैसा डाल दिया है तो पहला स्टेप जो गवर्नमेंट बोल रही है. 1930 सबसे पहले आपको साइबर हेल्पलाइन को कनेक्ट करना है. जब साइबर ठगी की बात होती है तो शुरू के जो 3 घंटे होते हैं. वह सबसे ज्यादा इंपोर्टेंट होता है. क्योंकि यह पैसा कहीं पर जा रहा है. उसे तुरंत ब्लॉक कराना होता है. ऐसी स्थिति में फोन को ब्लॉक करना बहुत जरूरी होता है. ऐसी स्थिति में लोग पहले जांच पड़ताल खुद करने लग जाते हैं. उनको समझ में नहीं आता है. अगर आपको थोड़ा सा भी डाउट हो रहा है तो आपके अकाउंट से पैसे कटे हैं तो आपको नहीं पता किस रीजन से कटे हैं. जो भी आपके साथ घटना हुई है उसको लेकर आप 1930 पर कंप्लेंट डाल दीजिए. उसके बाद आपका पैसा मिल पाएगा या नहीं मिल पाएगा यह दूसरा स्टेप है. अगर आप अपने पैसे को बचाना या रोकना चाहते हैं तो 3 घंटे के अंदर ही इस तरह के कदम उठाने होंगे.

सवाल: बैंक कभी भी ओटीपी या पिन क्यों नहीं मांगता ?

जवाब: देखिए बैंकिंग सिस्टम में एक सेफ्टी लेयर ऐसा बनाया गया है की जो ओटीपी पिन होता है वह केवल यूजर के पास में होता है. बैंक कभी भी आपका कोई भी ट्रांजैक्शन करने के लिए आपको बोला जाएगा कि चेक पर साइन करिए. आप बैंक में आकर फिजिकली कराइये. या फिर अगर आप डिजिटल ट्रांजेक्शन की बात कर रहे हैं तो आपको अपना खुद का पिन वहां पर डालना है. वह कभी भी फोन करके नहीं मांगेगा. क्योंकि कोई भी ऐसा बैंकिंग सिस्टम नहीं बना है वह आपसे पिन मांगे. अगर आपसे कोई पिन नंबर मांग रहा है तो आप समझ जाइए कि आपके साथ फ्रॉड होने वाला है.

सवाल: फेसबुक इंस्टाग्राम और जो दूसरे सोशल मीडिया हैं उसमें जो फ्रॉड हो रहे हैं उससे कैसे बचा जाए ?

जवाब: सोशल मीडिया में अलग-अलग लेवल के फ्रॉड होते हैं. सोशल मीडिया में यह बात देखने में आई है कि लोगों को बहुत जल्दी में पैसा कमाना है. भारत के लोगों को फ्री की चीज चाहिए. पैसा जल्दी कमाना है. इन्वेस्टमेंट रिलेटेड फ्रॉड हो रहे हैं. होता क्या है कि आप सोशल मीडिया, टेलीग्राम और फेसबुक पर हैं. आपके यहां पर विज्ञापन दिखाया जाता है. आप बहुत जल्दी पैसा कमा या बना सकते हैं. कैसे बना सकते हैं क्रिप्टो में इन्वेस्ट करके शेयर में इन्वेस्ट करके. ऐसी स्थिति में जब आप इससे जुड़ते हैं तो बोला जाता है कि हम आपको फ्री में ट्रिक देंगे. जिससे आप शेयर मार्केट में पैसा बना पाएंगे. ऐसी स्थिति में आपको लगता है कि मैं शेयर में इन्वेस्ट कर रहा हूं. इनके ट्रिक के थ्रू कर लेता हूं. ठग एक दो ट्रिक दे देते हैं. आपको लगता है कि आपके पैसे बन रहे हैं. ऐसे में लोगों को लगता है कि मैं उनके साथ जुड़कर काम करूं तो और पैसा बनाऊंगा.

इसके बाद ठगों के द्वारा बोला जाता है कि आप जो नेक्स्ट इन्वेस्टमेंट करेंगे. उसमें हमारा ऐप डाउनलोड कर लीजिए. यहां पर हम आपको ट्रिक देंगे. आप उसमें पैसा इन्वेस्ट करिए. ऐसी स्थिति में लोग ऐप डाउनलोड कर लेते हैं. ऐसे में उन्हें लगता है कि वह शेयर मार्केट में इन्वेस्ट कर रहे हैं. पैसा बढ़ता हुआ भी दिखता है. होता यह है कि जब उनके पैसे बहुत बढ़ जाते हैं. जब विड्रोल करने का टाइम आता है तब इनको पता चलता है कि जिस आदमी से फेसबुक या टेलीग्राम पर बात करते हैं वह आदमी फर्जी है, कंपनी फर्जी है. इसके साथ ही वह एप भी फर्जी है. ऐसे में सामने वाले का पूरा का पूरा इन्वेस्टमेंट डूब जाता है. एक स्कैम तो सोशल मीडिया पर यह हो रहा है. विज्ञापन के थ्रू लोगों को अपने पास बुलाया जा रहा है. फ्रॉड करने वाले विज्ञापन में पैसा डाल रहे हैं. वहां से लोगों तक पहुंच रहे हैं. ऐसे लोगों तक पहुंचते हैं जो शेयर मार्केट में इंटरेस्टेड है. दूसरा फ्रॉड यह भी देखने को मिल रहा है.

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