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जागते रहो: डेटा 'लॉक' कर फिरौती मांग रहे साइबर अपराधी, पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

राजस्थान पुलिस ने NAS उपकरणों पर रैनसमवेयर हमलों को लेकर चेतावनी जारी की है.

पुलिस मुख्यालय जयपुर
पुलिस मुख्यालय जयपुर (फोटो ईटीवी भारत जयपुर)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : March 26, 2026 at 10:39 AM IST

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Updated : March 26, 2026 at 10:49 AM IST

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जयपुर : डिजिटल युग में अब आपकी तिजोरी के साथ-साथ आपका डिजिटल डेटा भी असुरक्षित है. साइबर अपराधी अब संस्थानों के महत्वपूर्ण डेटा को 'बंधक' बनाकर मोटी फिरौती वसूल रहे हैं. राजस्थान पुलिस की साइबर अपराध विंग ने नेटवर्क अटैच्ड स्टोरेज (NAS) उपकरणों पर बढ़ते रैनसमवेयर खतरों को देखते हुए एक गंभीर चेतावनी और एडवाइजरी जारी की है.

कमजोर पासवर्ड और पुराने सॉफ्टवेयर खास तौर पर साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं. ऐसे रैनसमवेयर के खतरों को लेकर राजस्थान पुलिस की साइबर अपराध विंग ने एक एडवाइजरी जारी की है. डीजीपी राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर राजस्थान में डिजिटल डेटा की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की गई है. इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के विश्लेषणों के बाद यह सामने आया है कि साइबर अपराधी अब विशेष रूप से उन संस्थानों को निशाना बना रहे हैं जो नेटवर्क अटैच्ड स्टोरेज (एनएएस) उपकरणों का उपयोग करते हैं. इनमें चार्टर्ड अकाउंटेंसी फर्म, कंसल्टिंग एजेंसियां, अस्पताल, आईटी एवं मीडिया क्षेत्र से जुड़े पेशेवर और शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं.

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डेटा सार्वजनिक करने की धमकी देकर मांगते हैं फिरौती : साइबर क्राइम विंग के डीआईजी शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि साइबर हमलावरों का तरीका बेहद शातिराना है. ये अपराधी इंटरनेट पर असुरक्षित या ओपन एनएएस सिस्टम की पहचान करते हैं. कमजोर पासवर्ड या पुराने सॉफ्टवेयर का फायदा उठाकर वे सिस्टम में अनधिकृत प्रवेश करते हैं और संस्थान के महत्वपूर्ण डाटा को कॉपी या एन्क्रिप्ट (लॉक) कर देते हैं. इसके बाद संवेदनशील जानकारी को सार्वजनिक करने की धमकी देकर भारी फिरौती की मांग की जाती है, जिससे संस्थान अपने ही डेटा तक पहुंचने में असमर्थ हो जाता है.

इन क्षेत्रों पर मंडरा रहा है जोखिम : एडवाइजरी के अनुसार चार्टर्ड अकाउंटेंट और आईटी क्षेत्र से जुड़े पेशेवर इस समय हमलावरों के प्रमुख लक्ष्य हैं क्योंकि उनके पास क्लाइंट्स का बेहद गोपनीय और वित्तीय डेटा होता है. इसके अलावा मीडिया हाउस और बड़े अस्पतालों के डेटा स्टोरेज सिस्टम पर भी रैनसमवेयर हमलों की घटनाएं हुई हैं.

इन उपायों से बचा सकते हैं कीमती डेटा:-

  • अपने एनएएस सिस्टम की इंटरनेट पर सीधी पहुंच को सीमित रखें.
  • सिस्टम में मल्टी फैक्टर ऑथेंटिकेशन और बेहद मजबूत पासवर्ड का प्रयोग करें.
  • सॉफ्टवेयर को समय-समय पर अपडेट करें और सभी सुरक्षा पैच लागू करें.
  • समय-समय पर सुरक्षित बैकअप तैयार करें, बैकअप को ऑफलाइन या सुरक्षित स्थान पर रखें.
  • आपात स्थिति में डाटा रिकवरी की व्यवस्था रखें.
  • सिस्टम की लगातार मॉनिटरिंग करें.
  • संदिग्ध गतिविधि दिखते ही तुरंत कार्रवाई करें और प्रभावित सिस्टम को तुरंत नेटवर्क से अलग करें.
  • आवश्यकता पड़ने पर साइबर विशेषज्ञों की मदद लें.

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ऐसे दर्ज करवा सकते हैं शिकायत : डीआईजी शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि साइबर अपराध से जुड़ी किसी भी घटना पर तत्काल एक्शन लेना चाहिए. इस प्रकार की घटना हो जाती है तो इसकी सूचना तुरंत निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर पुलिस स्टेशन को दें. पीड़ित साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं. इसके साथ ही पुलिस मुख्यालय के साइबर हेल्प डेस्क नंबर 9256001930, 9257510100 पर कॉल कर भी मदद ली जा सकती है.

Last Updated : March 26, 2026 at 10:49 AM IST