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मिनी सरस मेले की शाम बनी यादगार, लोकगीतों पर जमकर थिरके SDM, उमड़ा जनसैलाब

रामनगर में मिनी सरस मेले में स्थानीय कलाकारों ने कार्यक्रम में समां बांध दिया. जिसका लोगों ने देर रात तक लुत्फ उठाया.

RAMNAGAR MINI SARAS MELA
लोकगीत पर रामनगर SDM जमकर थिरके (Photo-ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : August 23, 2026 at 12:29 PM IST

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Updated : August 23, 2026 at 2:30 PM IST

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रामनगर: नैनीताल जिले के रामनगर में आयोजित मिनी सरस मेले की दूसरी शाम सांस्कृतिक रंगों से सराबोर नजर आई. मेले में प्रसिद्ध लोक कलाकार श्वेता महारा की शानदार प्रस्तुति ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया. कुमाऊं, गढ़वाल और जौनसारी लोकगीतों की धुनों पर पूरा पंडाल तालियों और उत्साह से गूंज उठा. कार्यक्रम के दौरान माहौल उस समय और भी खास हो गया, जब जौनसारी गीत की धुन पर रामनगर के उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान खुद को रोक नहीं पाए.

कलाकार श्वेता महारा के आग्रह पर एसडीएम मंच पर पहुंचे और उन्होंने शानदार अंदाज में डांस कर अपनी खुशी जाहिर की. एसडीएम गोपाल सिंह चौहान को मंच पर थिरकता देख कार्यक्रम में मौजूद अधिकारी, जनप्रतिनिधि और दर्शक भी उत्साहित हो उठे, तालियों की गड़गड़ाहट के बीच श्वेता महारा ने भी उनका साथ दिया. कुछ ही पलों में मंच का माहौल संगीतमय हो गया. श्वेता महारा ने अपनी प्रस्तुति में उत्तराखंड की लोक संस्कृति की विविधता को खूबसूरती से सामने रखा. उनके गीतों में कुमाऊं और गढ़वाल की लोकधुनों के साथ जौनसारी संस्कृति की झलक भी देखने को मिली. पारंपरिक गीतों और संगीत ने मेले में मौजूद लोगों को अपनी संस्कृति से जोड़ दिया.

मिनी सरस मेले की शाम बनी यादगार (Video-ETV Bharat)

दरअसल, मिनी सरस मेला केवल खरीदारी और ग्रामीण उत्पादों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की लोक कला, संस्कृति और परंपराओं को मंच देने का भी माध्यम बन रहा है. अलग-अलग क्षेत्रों से आए कलाकार यहां अपनी प्रस्तुतियों के जरिए प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर रहे हैं. एसडीएम गोपाल सिंह चौहान का यह अंदाज भी इसी सांस्कृतिक जुड़ाव की खूबसूरत तस्वीर बन गया. जब अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी लोक संस्कृति के रंग में रंगते नजर आए, तो दर्शकों का उत्साह देखते ही बना.

बता दें कि मिनी सरस मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम की अंतिम शाम ऐतिहासिक और यादगार रही. देर रात तक चले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों ने एक से बढ़कर एक शानदार प्रस्तुति दी. स्थानीय कलाकारों की शानदार प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब वाहवाही तालियां बटोरी. वहीं लोकगीतों पर दर्शक झूमते नजर आए. सरस मेले का उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है. साथ ही उनके स्थानीय उत्पादों को मार्केट उपलब्ध कराना है.

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Last Updated : August 23, 2026 at 2:30 PM IST