परीक्षण बिना ही उच्च स्तर तक पहुंच रही फाइलें, मुख्य सचिव ने पत्र जारी कर जताई नाराजगी
मुख्य सचिव ने बिना ठीक से जांच-पड़ताल किए प्रस्तावों को उच्च स्तर पर मंजूरी के लिए भेजे जाने पर नाराजगी जताई.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : January 8, 2026 at 8:08 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड में गंभीर मामलों पर भी दिए गए निर्देशों का पालन नहीं हो पा रहा है. चाहे बात महत्वपूर्ण नीतियों और योजनाओं के प्रस्ताव से जुड़ी हो या फिर कर्मचारियों के प्रमोशन से. इन मामलों में मुख्य सचिव के निर्देश भी काम नहीं आ पा रहे हैं और मजबूरन एक बार फिर इसके लिए आदेश जारी करना पड़ा है.
उत्तराखंड शासन में प्रस्तावों के निस्तारण और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. शासन व्यवस्था में यह स्पष्ट प्रावधान है कि किसी भी प्रस्ताव को सचिव या मुख्य सचिव स्तर तक पहुंचने से पहले कई चरणों से गुजरना होता है. समीक्षा अधिकारी, अनुभाग अधिकारी, अंडर सेक्रेटरी, डिप्टी सेक्रेटरी, जॉइंट सेक्रेटरी और अपर सचिव जैसे स्तरों पर प्रस्ताव का सम्यक परीक्षण किया जाना अनिवार्य है. इसके बावजूद कई मामलों में बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के ही प्रस्ताव उच्च स्तर पर अनुमोदन के लिए भेजे जा रहे हैं.
इस लापरवाही पर मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने कड़ी नाराजगी जताई है. उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए हैं कि किसी भी प्रस्ताव को उच्च स्तर पर भेजने से पहले उसका विधिवत परीक्षण किया जाए. मुख्य सचिव के संज्ञान में यह बात आई है कि कुछ विभागों में तय प्रक्रिया की अनदेखी करते हुए प्रस्ताव प्रकरण किए बिना सीधे अनुमोदन के लिए भेज दिए जा रहे हैं, जिससे गलती और असंगत निर्णय की संभावना बढ़ जाती है.
यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की स्थिति सामने आई हो. इससे पहले भी कैबिनेट से जुड़े प्रस्तावों को लेकर यह शिकायत मिलती रही है कि समय पर होमवर्क नहीं किया जाता और अधूरी तैयारी के साथ प्रस्ताव भेज दिए जाते हैं. जबकि शासन स्तर पर व्यवस्था यह है कि कोई भी प्रस्ताव सचिव या मुख्य सचिव तक पहुंचने से पहले कई अधिकारियों की जांच और अभिमत से गुजरता है. हालांकि इसके बावजूद कई बार प्रस्ताव अनुभाग स्तर से होकर बीच में अंडर, डिप्टी या जॉइंट सेक्रेटरी के अभिमत के बगैर सीधे सचिव स्तर पर भी पहुंच जाते हैं.
मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने इस परिपाटी को सुधारने के लिए सभी विभागों को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं. पत्र में कहा गया है कि किसी भी प्रस्ताव को प्रस्तुत करने से पहले उसका सम्यक परीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाए. साथ ही सभी प्रस्तावों में प्रमुख सचिव या सचिव का अभिमत लिया जाना जरूरी होगा, ताकि निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनी रहे.
प्रस्तावों के अलावा शासन में रिक्त पदों के सापेक्ष प्रमोशन को लेकर भी हीलाहवाली सामने आ रही है. मुख्य सचिव इस विषय में पहले भी कई बार अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं और त्वरित कार्रवाई के निर्देश दे चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अनेक विभागों में रिक्त पदों पर प्रमोशन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है.
इसी को देखते हुए मुख्य सचिव ने एक बार फिर सख्त निर्देश जारी किए हैं. उन्होंने कहा है कि जिन विभागों में विभागाध्यक्ष स्तर के पद रिक्त हैं, वहां एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई शुरू की जाए. इसके अलावा अन्य रिक्त पदों पर भी एक महीने के भीतर समुचित और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.
शासन स्तर पर यह माना जा रहा है कि यदि तय प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन नहीं किया गया तो प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर असर पड़ेगा. ऐसे में मुख्य सचिव के ताजा निर्देशों को व्यवस्था सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
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