फर्रुखाबाद में गंगा किनारे आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम, मेला श्री राम नगरिया में श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
मेला सचिव दिनेश कुमार ने बताया, इस वर्ष मेला परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है. श्रद्धालुओं की सुविधा का ख्याल रखा गया है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 3, 2026 at 9:09 PM IST
फर्रुखाबाद: जिले में गंगा के तट पर आस्था परंपरा और संस्कृति का प्रतीक मेला श्री रामनगरिया एवं विकास प्रदर्शनी 2026 का शुभारंभ शनिवार को हुआ. 3 जनवरी से 3 फरवरी 2026 तक चलने वाला यह ऐतिहासिक मेला पांचाल घाट गंगा तट पर फर्रुखाबाद में हो रहा है. पूरे मेला क्षेत्र में धार्मिक वातावरण मंत्रोचार और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर 30 हाजर श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई.
मेला परिसर विशेष रूप से सजाया गया: अपर जिला अधिकारी एवं मेला सचिव दिनेश कुमार ने बताया कि इस वर्ष मेला परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है. रंग-बिरंगी लाइट्स से जगमगाता गंगा तट आकर्षक प्रवेश द्वारा भव्य मंच और सुसज्जित कल्पवास क्षेत्र मेले की भव्यता को और बढ़ा रहे हैं.
रात्रि में गंगा तट का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आस्था और सौंदर्य का अद्भुत अनुभव प्रदान कर रहा है. मेले में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोक नृत्य, लोकगीत, राम कथा, भजन कीर्तन और विकास प्रदर्शनी लोगों के आकर्षण का केंद्र हैं.
कल्पवास का विशेष महत्व: मेला श्री रामनगरिया में कल्पवास का विशेष धार्मिक महत्व है. दूर दराज से आए साधु-संत और श्रद्धालु पूरे एक माह तक गंगा तट पर कल्पवास करते हैं. मान्यता है कि कल्पवास से आत्मशुद्धि होती है और पुण्य की प्राप्ति होती है. कल्पवसी गंगा स्नान जप-तप, यज्ञ, दान करते हैं और संयमित जीवन जीते हैं. इस दौरान पूरा क्षेत्र धार्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहता है.
सुरक्षा और व्यवस्थाओं का पुख्ता इंतजाम: मेला क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती की गई है. सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है. फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और मेडिकल कैंप की व्यवस्था की गई है. खोया पाया केंद्र भी बनाया गया है. महिला श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है. साफ-सफाई और पेयजल की सुविधा का इतजाम किया गया है.

विकास प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र: मेले में लगी विकास प्रदर्शनी में विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा योजनाओं की जानकारी दी जा रही है. स्वास्थ्य,शिक्षा, कृषि, महिला एवं बाल विकास, स्वरोजगार और सामाजिक कल्याण से जुड़े स्टॉल लोगों को जागरूक कर रहे हैं.
मेले का ऐतिहासिक महत्व: रामनगरिया मेले का इतिहास सैकड़ों वर्षों से पुराना है. मान्यता है कि मेला भगवान श्री राम से जुड़ी धार्मिक परंपराओं और गंगा स्नान की प्राचीन संस्कृति से संबंधित है. पांचाल क्षेत्र में गंगा तट पर लगने वाला है वाला यह मेला समय के साथ जनपद का सबसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन बन गया. पहले यह मेला केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित था. अब इसमें विकास प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम जुड़ने से इसका स्वरूप और व्यापक हो गया है.
आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मेला: अपर जिलाधिकारी एवं मेला सचिव दिनेश कुमार ने बताया कि मेला श्री रामनगरिया हमारी आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है.इस बार मिले को भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने विशेष तैयारी की हैं. कल्पवासियों और श्रद्धालुओं की सुविधा हमारी प्राथमिकता है. विकास प्रदर्शनी के माध्यम से जन कल्याणकारी योजनाओं को भी जन-जन तक पहुंचा जा रहा है.
माघ मेला रामनगरिया की वेबसाइट बनाई गई: इस वर्ष माघ मेला रामनगरिया की एक वेबसाइट बनाई गई है. इसके लिए इसके जरिए लोग मेले की जानकारी आसानी से ले सकते हैं.मेले में कल्पवासी और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए हैं. इसका शुभारंभ जिलाधिकारी आशुतोष कुमार ने शनिवार को किया.
कोतवाली और 11 पुलिस चौकियां बनाई गईं: जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने बताया कि श्री राम नगरिया मिला इस बार भी बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ शुरू हुआ है. प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सभी सुविधाओं और सुरक्षा के इंतजाम कर दिए हैं. पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने बताया मेले में सुरक्षा के लिए कोतवाली और 11 पुलिस चौकियां बनाई गई हैं. 7 वॉच टावर आधुनिक यंत्र और शस्त्रों से लैस पुलिसकर्मी तैनात हैं. पूरे क्षेत्र में सुरक्षा की दृष्टि से छावनी में तब्दील किया गया है.
कल्पवास के लिए 20 साल से आ रहीं सुखदेवी: कुसमा और सुखदेवी ने बताया कि वो हर साल मेला श्री रामनगरिया में मां गंगा की आराधना और पूजा करने आते हैं. यहां पर एक महीने ठंड में राउटी में रहकर भजन कीर्तन करते हैं. सुबह उठकर गंगा स्नान करते हैं. सुखदेवी ने बताया कि उनकी उम्र करीब 80 साल है. यहां करीब 20 साल से यहां पर आ रही हूं.
कल्पवास कर रहे 50 हजार श्रद्धालु: यहां पर करीब 50 हजार श्रद्धालु कल्पवास करेंगें. करीब 10000 राउटी लग चुकी है. एक रोउटी में करीब चार से पांच लोग रहते हैं. यहां पर आसपास के जनपद इटावा, बरेली, कन्नौज, मैनपुरी आगरा, एटा,औरैया,कानपुर आसपास के जिलों के लोग यहां पर आते हैं. एक महीने यहां पर रुकते हैं.
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