मगरमच्छ का रेस्क्यू ऑपरेशन: बलौदा बाजार के हरदी गांव के तालाब से पकड़ा गया शिकारी
ग्रामीणों ने तालाब में मछली पकड़ने के लिए जाल डाला, लेकिन जाल में मछली की जगह मगरमच्छ फंस गया.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 16, 2026 at 9:18 PM IST
बलौदा बाजार: वन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से, तालाब में फंसे मगरमच्छ का सफल रेस्क्यू ऑपरेशन किया गया. मगरमच्छ को तालाब से निकालकर सुरक्षित जंगल सफारी नया रायपुर में छोड़ दिया गया है. दरअसल, वन विभाग की टीम को आज खबर मिली की ग्राम हरदी जो बारनवापारा अभयारण्य के करीब है, वहां पर तालाब में एक मगरमच्छ दिखाई पड़ा है. ग्रामीणों ने बताया कि मगरमच्छ तालाब में डाले गए मछली पकड़ने के जाल में उलझ गया था. ग्रामीणों ने जब जाल में मछली की जगह मगरमच्छ को देखा तो उनके होश उड़ गए.
मछली के जाल में फंसा मगरमच्छ
तालाब के आसपास मौजूद लोगों में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल बन गया. मगरमच्छ जैसे वन्यजीव का आबादी क्षेत्र के इतने करीब होना किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता था. लेकिन घबराहट में कोई गलत कदम उठाने के बजाय ग्रामीणों ने समझदारी दिखाई और तत्काल वन विभाग को सूचना दी. ग्रामीणों के इस फैसले की तारीफ वन विभाग ने भी की. यदि ग्रामीणों द्वारा मगरमच्छ को छेड़ने या मारने की कोशिश की जाती तो न केवल वन्यजीव को नुकसान पहुंचता, बल्कि किसी ग्रामीण की जान भी जोखिम में पड़ सकती थी.
वन विभाग की त्वरित कार्रवाई
सूचना मिलते ही वन विभाग का अमला मौके के लिए रवाना हुआ. वनमंडलाधिकारी गणवीर धम्मशील के निर्देशानुसार टीम ने बिना देरी किए घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया. तालाब के किनारे जमा भीड़ को नियंत्रित किया गया और सुरक्षा घेरे की व्यवस्था की गई, ताकि कोई भी व्यक्ति मगरमच्छ के नजदीक न जाए. रेस्क्यू टीम ने पूरी सावधानी और विशेषज्ञता के साथ जाल में फंसे मगरमच्छ को बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की. यह काम आसान नहीं था. मगरमच्छ तनाव की स्थिति में अधिक आक्रामक हो सकता है, ऐसे में टीम को संयम और कौशल के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देना पड़ा.
संतुलन, कौशल और धैर्य की परीक्षा
रेस्क्यू के दौरान सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मगरमच्छ को बिना चोट पहुंचाए सुरक्षित बाहर कैसे निकाला जाए. टीम ने पहले जाल को धीरे-धीरे ढीला किया और फिर नियंत्रित तरीके से मगरमच्छ को काबू में लिया. उसके मुंह और शरीर को सुरक्षित तरीके से बांधा गया, ताकि वह खुद को या किसी अन्य को नुकसान न पहुंचा सके. करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद मगरमच्छ को सफलतापूर्वक तालाब से बाहर निकाल लिया गया. इस दौरान ग्रामीणों ने भी दूरी बनाकर सहयोग किया और वन विभाग के निर्देशों का पालन किया.
रेस्क्यू टीम और ग्रामीणों का योगदान
इस पूरे अभियान में गितेश बंजारे (परिक्षेत्र सहायक), नेहरू निषाद (परिसर रक्षी), सुरक्षा श्रमिक भागी यादव, पीलू निषाद, राकेश ध्रुव की सक्रिय भूमिका रही. इसके अलावा वन प्रबंधन समिति हरदी के सदस्य सुखदेव, टिकनेश ध्रुव, मयाराम सेन, विशाल, वीरेंद्र यादव सहित अन्य ग्रामीणों ने भी समन्वित सहयोग दिया. सभी के संयुक्त प्रयास से रेस्क्यू कार्य शांतिपूर्वक और सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ.
प्राथमिक देखरेख और स्वास्थ्य परीक्षण किया गया
मगरमच्छ को सुरक्षित निकालने के बाद वन विभाग द्वारा उसकी प्राथमिक जांच की गई. यह सुनिश्चित किया गया कि जाल में फंसने से उसे कोई गंभीर चोट तो नहीं आई है. विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उसके स्वास्थ्य और व्यवहार का परीक्षण किया गया. वन अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में वन्यजीव को उसके प्राकृतिक या उपयुक्त रहवास में पुनर्स्थापित करना ही सर्वोत्तम विकल्प होता है.
जंगल सफारी नवा रायपुर में सुरक्षित स्थानांतरण
विशेषज्ञों की सलाह के बाद मगरमच्छ को जंगल सफारी नवा रायपुर ले जाया गया. वहां उसे सुरक्षित और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया गया है, जहां उसकी निगरानी, देखभाल और आवश्यक प्रबंधन किया जा सकेगा. जंगल सफारी में ऐसे वन्यजीवों के लिए नियंत्रित और सुरक्षित आवास उपलब्ध होता है, जिससे वे मानव बस्तियों से दूर रहकर सुरक्षित जीवन जी सकें. इससे भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावनाएं भी कम हो जाती हैं.
मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौती
बरनवापारा अभयारण्य क्षेत्र के आसपास बसे गांवों में कभी-कभी वन्यजीवों की आवाजाही देखी जाती है. जल स्रोतों और भोजन की तलाश में मगरमच्छ, जंगली सुअर, हिरण या अन्य जीव गांवों के नजदीक पहुंच जाते हैं. ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती होती है मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकना. यदि समय पर सूचना न मिले या लोग घबराकर आक्रामक प्रतिक्रिया दें, तो स्थिति गंभीर हो सकती है. हरदी गांव की इस घटना ने दिखाया कि जागरूकता और धैर्य से बड़ी दुर्घटनाओं को टाला जा सकता है.
पहले भी दिख चुका है समन्वय
वनमंडलाधिकारी गणवीर धम्मशील ने बताया कि अक्टूबर 2025 में भी क्षेत्र में एक हाथी का सफल रेस्क्यू किया गया था. उस दौरान भी स्थानीय समुदाय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. ग्रामीणों की सतर्कता और सहयोग से उस समय भी एक संभावित बड़ी घटना टाली जा सकी थी. उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझी जिम्मेदारी है. यदि ग्रामीण समय पर सूचना दें और वन्यजीवों को उकसाने या नुकसान पहुंचाने से बचें, तो अधिकांश समस्याओं का समाधान सहजता से हो सकता है.
जागरूकता की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि जिन क्षेत्रों में अभयारण्य या वन क्षेत्र नजदीक हों, वहां नियमित जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए. लोगों को यह समझाना जरूरी है कि वन्यजीवों का व्यवहार कैसा होता है, उनसे दूरी क्यों जरूरी है और आपात स्थिति में क्या करना चाहिए.
वन्यजीव संरक्षण का व्यापक संदेश
यह रेस्क्यू ऑपरेशन केवल एक मगरमच्छ को बचाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रकृति और मानव के बीच संतुलन की आवश्यकता को भी दिखाता है. जंगलों का सीमित होना, जल स्रोतों में बदलाव और बढ़ती आबादी के कारण वन्यजीवों का मानव बस्तियों की ओर आना एक बढ़ती चुनौती है. ऐसे में संरक्षण, पुनर्वास और सामुदायिक सहभागिता ही स्थायी समाधान का रास्ता दिखाते हैं.
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