हाईकोर्ट ने कहा- अधिवक्ता की अनुपस्थिति में खारिज नहीं की जा सकती आपराधिक अपील
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, किसी भी आपराधिक अपील को केवल अधिवक्ता की अनुपस्थिति या चूक के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 9, 2026 at 10:24 PM IST
|Updated : January 9, 2026 at 10:42 PM IST
प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि किसी भी आपराधिक अपील को केवल अधिवक्ता की अनुपस्थिति या चूक के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है. ऐसा आदेश शुरू से ही शून्य माना जाएगा. कोर्ट ने कहा कि यदि आरोपी का वकील उपस्थित नहीं होता है, तो अदालत को 'एमिकस क्यूरी' (न्याय मित्र) नियुक्त कर मामले की सुनवाई गुण-दोष के आधार पर आगे बढ़ानी चाहिए. यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद ने संजय यादव की पुनरीक्षण याचिका पर दिया है.
गोरखपुर सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी: याची संजय यादव को वर्ष 2022 में गोरखपुर की एसीजेएम कोर्ट ने एन.आई. एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया था. इस सजा के खिलाफ उन्होंने गोरखपुर के सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी. याचिकाकर्ता की मूल अपील को 26 अक्टूबर 2023 को वकील की अनुपस्थिति के कारण 'डिफ़ॉल्ट' में खारिज कर दिया गया था. इसके बाद याचिकाकर्ता ने देरी माफी के आवेदन के साथ दूसरी अपील दायर की.
हाईकोर्ट ने आदेश रद्द किया: उसे विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट), गोरखपुर ने 17 सितंबर 2025 को खारिज कर दिया था. इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी. हाईकोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि अपील को इस तरह खारिज करना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 425 के प्रावधानों के विपरीत है. हाईकोर्ट ने 26 अक्टूबर 2023 के आदेश को शून्य करार देते हुए रद्द कर दिया और मूल अपील को उसके पुराने नंबर पर बहाल करने का आदेश दिया.
अपील का निस्तारण केवल गुण-दोष के आधार पर: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब पहली अपील समय सीमा के भीतर थी, तो दूसरी अपील दाखिल करने की कोई कानूनी आवश्यकता नहीं थी. कोर्ट ने निर्देश दिया कि आपराधिक अपील का निस्तारण केवल गुण-दोष के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि तकनीकी आधार पर. हाईकोर्ट ने वर्तमान आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह बहाल की गई अपील पर तेजी से निर्णय ले.
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