डोबरा चांठी पुल के पास बनी सड़क पर पड़ी दरारें, बड़े खतरे को दे रही न्योता
टिहरी में डोबरा चांठी पुल के पास चांठी वाली साइड में टावर के ऊपर बनी सड़क पर पड़ी दरारें, हरकत में आए अधिकारी

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : January 22, 2026 at 5:03 PM IST
टिहरी: एशिया के सबसे बड़े बांधों में शुमार टिहरी झील के ऊपर डोबरा चांठी सस्पेंशन ब्रिज बनाया गया है, लेकिन चांठी की साइड ऊपर बनी सड़क पर दरारें पड़ गई हैं, जो डोबरा चांठी पुल को खतरा पहुंचा सकती हैं. इतना ही नहीं यह दरार भविष्य में किसी बड़े खतरे को भी न्योता दे सकती हैं. लिहाजा, स्थानीय लोग इसका संज्ञान लेकर तत्काल समाधान निकालने की मांग कर रहे हैं.
चांठी साइड के टावर के ऊपर बनी सड़क पर पड़ी दरारें: टिहरी झील के ऊपर उत्तराखंड का सबसे ऊंचा और लंबा सस्पेंशन डोबरा चांठी ब्रिज बनाया गया है. जो टिहरी को प्रतापनागर से जोड़ता है. इस पुल का उद्घाटन 8 नवंबर 2020 को तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किया था, लेकिन अब 5 साल बाद चांठी वाली साइड पर बने टावर के ठीक ऊपर बनी सड़क पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं, जो पुल के लिए खतरा साबित हो सकती हैं.
इन दरारों की वजह से वाहन हिचकोले खा रहे हैं. खासकर दोपहिया वाहन के साथ दुर्घटना होने का अंदेशा रहता है. इसके अलावा दरारें पड़ने से पुल को भी खतरा होने की आशंका बनी हुई है, लेकिन लंबे समय से शासन प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया. हालांकि, अब उसकी सुध लेने की बात कही जा रही है.
क्या बोले ग्रामीण? ग्रामीण व सामाजिक कार्यकर्ता सागर भंडारी और आशीष सिंह बिष्ट ने कहा कि पुल के ठीक ऊपर बनी सड़क पर दरार पड़ी हैं. जिससे पुल को खतरा पैदा हो गया है. शासन प्रशासन को जल्द ही इसे ठीक करना चाहिए. जिससे पुल सुरक्षित रहे. अगर इन दरारों को ठीक नहीं किया गया तो आने वाले समय में इस पुल को खतरा पैदा हो सकता है.

वहीं, अब पुल से संबंधित लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता केएस नेगी ने मामले का संज्ञान लिया है. उन्होंने दरार की समस्या को गंभीरता लेते हुए कार्रवाई करने की बात कही है. साथ ही कहा कि टीएचडीसी को डीपीआर यानी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है. डीपीआर मिलने के बाद उसे शासन में भेजा जाएगा, फिर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

"डोबरा चांठी पुल के दाहिने साइड ऊपर की ओर पहले से ही स्लाइड जोन है. उसे क्रॉनिक स्लाइड जोन के रूप में चिन्हित किया गया है. उसकी डीपीआर टीएचडीसी की ओर से बनाई जा रही है. टीएचडीसी ने लगभग डीपीआर तैयार कर दी है. इसको लेकर एक हफ्ते पहले बात हुई है. उन्होंने एक हफ्ते के भीतर हमें डीपीआर जमा करने की बात कही है. जैसे हमें डीपीआर मिल जाएगी, वैसे ही हम उसे स्वीकृति के लिए शासन को भेज देंगे. शासन से स्वीकृति मिलती ही टेंडर आदि की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी."- कमल सिंह नेगी, अधीक्षण अभियंता, लोक निर्माण विभाग
डोबरा-चांठी सस्पेंशन ब्रिज के बारे में जानिए: बता दें कि टिहरी झील के ऊपर बना डोबरा-चांठी सस्पेंशन ब्रिज आज देश ही नहीं बल्कि, विदेश में भी जाना-पहचाना जाने लगा है. इस ब्रिज के निर्माण का कार्य साल 2006 में शुरू हुआ था. डिजाइन फेल होने समेत तमाम कारणों के चलते लंबे समय तक निर्माण कार्य रुका भी रहा. तमाम धरना प्रदर्शन होने के बाद पुल बना.

इस ब्रिज की कुल लंबाई 725 मीटर है. जबकि, सस्पेंशन की लंबाई 440 मीटर है. वहीं, 260 मीटर आरसीसी डोबरा क्षेत्र की ओर और 25 मीटर स्टील गार्डर चांठी की ओर है. इस पर 15 टन तक भारी वाहन आसानी से गुजर सकते हैं. यह पुल सिर्फ प्रतापनगर और टिहरी ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में पर्यटन के रूप में विकसित हुआ है. दुनिया भर के पर्यटक इसे देखने पहुंचते हैं. यह पुल समुद्रतल से 850 मीटर की ऊंचाई पर बना है.
इसके बनने के बाद भी टिहरी झील को अधिकतम आरएल (Reduced Level) 830 मीटर तक भरा जा सकता है. इस पुल की चौड़ाई 7 मीटर है, जिसमें से साढ़े 5 मीटर पर वाहन चलते हैं. बाकी के डेढ़ मीटर पर पुल के दोनों तरफ 75-75 सेंटीमीटर फुटपाथ मौजूद हैं. पुल की कुल लंबाई 725 मीटर है, जिसमें से 440 मीटर झूला पुल है. वहीं, 260 मीटर डोबरा साइड और 25 मीटर का एप्रोच पुल चांठी की तरफ बनाया गया है. पुल के दोनों किनारों पर 58-58 मीटर के ऊंचे चार टॉवर बने हैं.
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