ढाणा कलां के राजा हरिंदर सिंह फरीदकोट की जमीन का विवाद फिर चर्चा में, कोर्ट के आदेश पर दोबारा निशानदेही के लिए पहुंची प्रशासनिक टीम
ढाणा कलां में कोर्ट के आदेश पर 10 एकड़ विवादित जमीन की दोबारा निशानदेही शुरू हुई. इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा.

Published : August 27, 2026 at 2:13 PM IST
हांसी: हांसी के ढाणा कलां गांव में करीब 10 एकड़ जमीन को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच बुधवार को प्रशासनिक टीम दोबारा निशानदेही करने पहुंची. कोर्ट के आदेश पर पहुंची टीम ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट एवं नायब तहसीलदार सुरेश कुमार की मौजूदगी में जमीन की पैमाइश शुरू की. कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा.
पहले विरोध के कारण रुक गई थी कार्रवाई: दरअसल, इस जमीन की निशानदेही के लिए प्रशासन की टीम पहले भी गांव पहुंची थी, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी. प्रशासन ने बुधवार को कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए दोबारा निशानदेही शुरू की. इस बार ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे, लेकिन किसी तरह का विरोध नहीं किया. हांसी सदर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सदानंद वत्स भी पुलिस टीम के साथ मौके पर मौजूद रहे.

करीब 40 साल से कब्जे का दावा: ग्रामीणों का दावा है कि विवादित जमीन के एक हिस्से पर कई लोग करीब 40 वर्षों से कब्जे में हैं. ग्रामीण राजमल राघव ने बताया कि, "राजा हरिंदर सिंह फरीदकोट के परिवार और जमीन को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चला आ रहा है. राजा की बेटी अमृत कौर समेत परिवार के अन्य वारिसों ने संपत्ति पर अपना हक जताते हुए अदालत का रुख किया था."
ट्रस्ट बनने के बाद बढ़ा विवाद: राजमल राघव ने आगे कहा कि, " साल 1981 में राजा के बेटे राहुल की सड़क हादसे में मौत हो गई थी. इसके बाद वर्ष 1982 में संपत्ति को लेकर एक ट्रस्ट बनाया गया. बाद में ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने संपत्ति पर मालिकाना हक जताते हुए जमीन की बिक्री शुरू कर दी. इसी के बाद संपत्ति को लेकर विवाद और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी. राजा की बेटियों ने संपत्ति के अधिकार को लेकर अदालत में केस दायर किया. मामला जिला अदालत से होते हुए हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. अदालतों के फैसलों के बाद ट्रस्ट का अधिकार समाप्त कर दिया गया और संपत्ति में राजा के परिवार के वारिसों का हक माना गया."

80 कनाल 17 मरले जमीन का मामला: ग्रामीणों के अनुसार ढाणा कलां में विवादित जमीन करीब 80 कनाल 17 मरले, यानी लगभग 10 किल्ले बताई जा रही है. जमीन के बड़े हिस्से पर मकान बने हुए हैं. वहीं, कुछ लोगों के पास जमीन की रजिस्ट्री होने का भी दावा किया जा रहा है. ऐसे में निशानदेही की कार्रवाई को जमीन की वास्तविक सीमा स्पष्ट करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई: ग्रामीण राजमल राघव ने बताया कि, "प्रशासन कोर्ट के आदेश पर निशानदेही करने आया है, इसलिए हमें प्रशासन की कार्रवाई पर कोई आपत्ति नहीं है. पहले भी प्रशासनिक टीम निशानदेही के लिए आई थी, लेकिन विरोध के चलते प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई थी. इस बार ग्रामीणों ने प्रशासन का सहयोग किया."
फिलहाल सिर्फ सीमा तय करने की कार्रवाई: वहीं, इस पूरे मामले में ड्यूटी मजिस्ट्रेट एवं नायब तहसीलदार सुरेश कुमार ने कहा कि, "प्रशासन की टीम कोर्ट के आदेश पर केवल निशानदेही करने के लिए मौके पर पहुंची है. पहले ग्रामीणों की ओर से विवाद किया गया था, इसलिए लोगों को समझाया गया है कि फिलहाल प्रशासन का उद्देश्य जमीन की सीमा निर्धारित करना है. निशानदेही के दौरान किसी प्रकार की तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं की जाएगी. प्रशासन की ओर से जमीन की पैमाइश और सीमांकन की प्रक्रिया पर ही ध्यान दिया जा रहा है. मौके पर पुलिस की मौजूदगी इसलिए रखी गई है ताकि कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हो सके."
फिलहाल प्रशासनिक टीम ने विवादित जमीन की पैमाइश शुरू कर दी है. करीब चार दशक पुराने कब्जे के दावों, संपत्ति के मालिकाना हक और रजिस्ट्रियों को लेकर चल रहे विवाद के बीच कोर्ट के आदेश पर की जा रही यह निशानदेही महत्वपूर्ण मानी जा रही है. प्रशासन की पैमाइश पूरी होने के बाद जमीन की सीमाओं को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है.

