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Malpur Voilence: 25 साल पुराने मालपुरा सांप्रदायिक दंगे के दोहरा हत्याकांड केस में 14 आरोपी दोषमुक्त

पीठासीन अधिकारी श्वेता गुप्ता ने अपने आदेश में माना कि अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्य अपूर्ण और संदेहास्पद हैं.

Malpura communal riots
जिला न्यायालय जयपुर (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 27, 2026 at 8:31 PM IST

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जयपुर: शहर की सांप्रदायिक दंगा मामलों की विशेष कोर्ट अदालत ने 25 साल पहले 10 जुलाई को टोंक के मालपुरा थाना क्षेत्र में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़े बच्चों के दोहरा हत्याकांड प्रकरण में 14 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया. पीठासीन अधिकारी श्वेता गुप्ता ने अपने आदेश में माना कि अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्य अपूर्ण और संदेहास्पद हैं. इसके साथ ही अदालत ने मामले में मालपुरा निवासी राम प्रसाद, रतनलाल, रामस्वरूप, देवकरण, श्योजीराम, राम किशोर, सुखलाल, छोटू, बच्छराज, किस्तुर, हीरालाल, सत्यनारायण, किशनलाल एवं एक अन्य किशनलाल को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष पूरी तरह से आरोपियों के खिलाफ अपराध को साबित करने में विफल रहा है. ऐसे में आरोपियों को संदेह लाभ देना उचित होगा.

आरोपियों की ओर से अधिवक्ता वी.के. बाली एवं सोनल दाधीच ने पैरवी करते हुए कहा कि पुलिस की जांच में ऐसा एक भी तथ्य नहीं आया, जिससे उन्हें आरोपित अपराधों से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष तौर पर जोड़ सके. मामले में आरोपियों से हथियार की बरामदगी नहीं हुई है और न ही उनकी शिनाख्त परेड कराई गई. इतना ही नहीं, जहां पर वारदात होना बताया जा रहा है, वहां पर जांच के लिए एफएसएल टीम गई ही नहीं. मौके पर आरोपियों की मौजूदगी भी साबित नहीं हो पाई है.

पढ़ें: मालपुरा दंगे के दौरान हत्या का मामला, विशेष अदालत ने पांच आरोपियों को किया बरी

मालपुरा दंगों के इस मामले में 10 जुलाई, 2000 को 10 वर्षीय जुम्मा और 14 वर्षीय ईशाक की हत्या हुई थी. इसकी रिपोर्ट उनके रिश्तेदार रूस्तम खान ने 11 जुलाई को दर्ज कराई थी. इसमें कहा कि दोनों बच्चे जंगल में बकरियां चराने गए थे. तब समुदाय विशेष के लोगों ने उनकी हत्या कर दी. पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर 22 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया था. जिनमें से 5 आरोपियों को हाईकोर्ट ने 2016 में डिस्चार्ज कर दिया और एक आरोपी को नाबालिग माना था, जबकि एक आरोपी की मौत हो चुकी है.