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बालोद के दूधली गांव में बनेगा इतिहास, देश के पहले नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी का आयोजन, 146 एकड़ में अस्थायी सिटी

बालोद जिले में नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी का भव्य आयोजन होने जा रहा है.इस आयोजन को लेकर हर स्तर की तैयारियां पूरी हो गई हैं.

country first Rover Ranger Jamboree
बालोद के दूधली गांव में बनेगा इतिहास (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : January 8, 2026 at 4:17 PM IST

4 Min Read
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बालोद : छत्तीसगढ़ का बालोद जिला एक ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने जा रहा है. यहां देश के पहले नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी का भव्य आयोजन 9 जनवरी से ग्राम दुधली में शुरु होगा. इस आयोजन में हजारों रोवर रेंजर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे.बच्चों और युवा प्रतिभागियों के चेहरों पर जोश और उत्साह साफ झलक रहा है.


146 एकड़ में फैला है आयोजन स्थल

जंबूरी स्थल 146 एकड़ में फैला हुआ है, जहां एक अस्थायी शहर बसाया गया है. यहां 2000 टेंट, 6 भोजन डोम, 30 बिस्तरों का अस्थायी अस्पताल, प्रशासनिक कंट्रोल रूम और सभी आवश्यक सुविधाएं मौजूद हैं. हर विभाग को विशेष जिम्मेदारी दी गई है ताकि व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रहे.

बालोद के दूधली गांव में बनेगा इतिहास (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

बालोद अब राष्ट्रीय गौरव बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है. प्रशासन की पूरी टीम आयोजन को सफल बनाने में जुटी है. आयोजन स्थल पर स्वच्छता, पेयजल और आरओ की पर्याप्त व्यवस्था की गई है- राकेश यादव,जिला आयुक्त

कला और संस्कृति के रंग में रंगेगा जंबूरी

इस आयोजन की थीम ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ रखी गई है. इसी विषय पर हजारों विद्यार्थी एक मंच पर नृत्य प्रस्तुति देंगे. प्रतिभागियों को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर सुआ और डंडा नृत्य में भी प्रशिक्षण दिया गया है, यह आयोजन विविधता में एकता का अद्भुत संदेश देने जा रहा है. सांस्कृतिक प्रभारी ज्योति गजपाल ने बताया कि ये अवसर बच्चों में राष्ट्रीय एकता की भावना और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करेगा.

organized for thousands of students
रोवर रेंजर जंबूरी की तैयारियां (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

सांस्कृतिक कार्यक्रम होने जा रहा है. 9 तारीख को ओपनिंग सेरेमनी है,इसके लिए अभी रिहर्सल हो रहा है .नृत्य में करीब 4 हजार लोग शामिल होंगे- ज्योति गजपाल, सांस्कृतिक प्रभारी

वहीं व्याख्याता हेमधर साहू ने कहा कि यह आयोजन पूरे देश के बच्चों की कला, भाषा और परंपरा के आदान-प्रदान का मंच बनेगा.

ये हमारे लिए काफी गर्व का विषय है.इस दिन छत्तीसगढ़ के अलग-अलग 33 जिलों से आए युवा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे.एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना लिए आयोजन हो रहा है.पूरा भारत एक ही है इसी को लेकर एक सामूहिक नृत्य का आयोजन भी होगा.जिसमें दूधली गांव की इस धरा में पूरा भारत झूम उठेगा-हेमधर साहू, व्याख्याता

Dudhli village of Balod
हजारों छात्र छात्राएं करेंगे प्रदर्शन (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

आपको बता दें कि बालोद जिले को राष्ट्रीय स्तर के जंबूरी आयोजन की मेजबानी करने का बड़ा अवसर मिला है.इसके लिए पूरी तैयारियों के साथ सुरक्षा की भी चाक चौबंद व्यवस्था की गई है. जिसकी जानकारी राज्य आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने दी.

भारतवर्ष के इतिहास में पहली बार प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी का आयोजन बालोद जिले में हो रहा है.रोवर यानी कि 16 से 25 वर्ष के आयु के बच्चे और रेंजर्स यानी 16 से 25 वर्ष की बालिकाओं के लिए ये आयोजन हैं.इतने बड़े आयोजन की मेजबानी छत्तीसगढ़ राज्य को प्राप्त होना अपने आप में एक उपलब्धि है.इस जंबूरी में छत्तीसगढ़ के 4052 रोवर रेंजर्स सम्मिलित होंगे.वहीं भारत के अलग-अलग विद्यालय जिसमें केंद्रीय और नवोदय विद्यालय भी शामिल हैं,इनके 11046 छात्र-छात्राएं हिस्सा लेंगे- इंद्रजीत सिंह, राज्य आयुक्त

country first Rover Ranger Jamboree
2000 टेंट में रहने की व्यवस्था (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

छात्र छात्राओं को जंबूरी भाया

छत्तीसगढ़ के छात्र-छात्राओं को जंबूरी का आयोजन काफी पसंद आ रहा है. यहां आए छात्र -छात्राओं की मेजबानी में किसी भी तरह की कोई कमी नहीं की जा रही है. खाने से लेकर उनके ठहरने तक के लिए अच्छी व्यवस्था की गई है.

यहां हम लोगों को काफी अच्छा लग रहा है.हम लोग कल ही यहां पर आए हैं,बिल्कुल घर जैसा लग रहा है.मै तो चाहती हूं कि और भी लोग आएं और इस प्रोग्राम को आगे बढ़ाएं- दिशा कश्यप, छात्रा


सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान

संभागायुक्त सत्यनारायण राठौर और पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए महिला एवं बालिका आवास स्थल पर विशेष निगरानी रखने और किसी भी प्रकार की अवांछनीय गतिविधि पर रोक के निर्देश दिए हैं.आने वाले दिनों में यहां राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य विशिष्ट अतिथियों के आगमन की संभावना है. आयोजन स्थल का मुख्य कार्यक्रम ऐरिना में होगा, जहां प्रतिभागी सांस्कृतिक और शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा लेंगे. यह आयोजन न केवल बालोद बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का प्रतीक बनने जा रहा है—जहां एक भारत, श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना जीवंत होगी.

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