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भरंडा के बाद अब खड़का गांव में धर्मांतरण विवाद,मतांतरित परिवार को गांव से निकालने की कोशिश, पुलिस प्रशासन ने संभाला मोर्चा

नारायणपुर जिले में एक महीने के भीतर धर्मांतरण और आदिवासी परंपराओं को लेकर सामने आया यह दूसरा बड़ा विवाद है.

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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : June 30, 2026 at 6:20 PM IST

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नारायणपुर: भरंडा गांव में धर्मांतरण विवाद का मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अब जिला मुख्यालय के समीप स्थित ग्राम खड़का में एक बार फिर धर्मांतरण को लेकर विवाद सामने आया है. आरोप है कि गांव के एक मतांतरित परिवार को आदिवासी रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन नहीं करने के कारण गांव छोड़ने के लिए कहा गया.

स्थिति उस समय संवेदनशील हो गई जब ग्रामीणों ने परिवार के सदस्यों को उनके घरेलू सामान के साथ गांव से बाहर ले जाने का प्रयास किया. सूचना मिलने पर जिला प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया.

नारायणपुर के खड़का गांव में धर्मांतरण विवाद (ETV BHARAT)

नारायणपुर के खड़का गांव का मामला

नारायणपुर के ग्राम खड़का में आदिवासी परंपराओं का पालन करने वाले ग्रामीणों और एक मतांतरित परिवार के बीच लंबे समय से मतभेद की स्थिति बनी हुई थी. ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित परिवार गांव की पारंपरिक आदिवासी पेन व्यवस्था, सामाजिक रीति-नीति और सांस्कृतिक परंपराओं का पालन नहीं कर रहा है, जिससे गांव की सामाजिक संरचना और पारंपरिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है.

Villagers opposition to religious conversion
धर्मांतरण के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध (ETV BHARAT)

धर्मांतरित लोगों का गांव के निवासियों ने किया विरोध

विवाद उस समय बढ़ गया, जब गांव के लोगों ने एक परिवार के सात सदस्यों को गांव से बाहर जाने के लिए कह दिया और उनके दैनिक उपयोग के सामान को भी गांव की सीमा के बाहर ले जाने का प्रयास किया. इसी दौरान स्थिति की जानकारी मिलने पर जिला प्रशासन के अधिकारी और पुलिस बल बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को ऐसा करने से रोकते हुए दोनों पक्षों के बीच समझाइश का प्रयास शुरू किया.

Tension in Khadka village
मंतातरित परिवार का सामान किया घर के बाहर (ETV BHARAT)

संबंधित परिवार के सदस्य मोहन दुग्गा और उनके परिवार के कुछ सदस्य संत रामपाल महाराज के अनुयायी हैं और उनके बताए धार्मिक सिद्धांतों का पालन करते हैं. वहीं परिवार के बुजुर्ग सदस्यों के संबंध में ग्रामीणों का कहना है कि वे ईसाई धर्म का पालन करने लगे हैं. इस धार्मिक और सांस्कृतिक मतभेद ने गांव में सामाजिक तनाव की स्थिति उत्पन्न कर दी है.

Tension in Khadka village over conversion row
धर्मांतरण विवाद पर खड़का गांव में तनाव (ETV BHARAT)

मंतारित परिवार का आदिवासियों ने किया विरोध

आदिवासी परंपराओं का पालन करने वाले ग्रामीणों का कहना है कि गांव की व्यवस्था पारंपरिक आदिवासी पेन प्रथा और रूढ़िगत सामाजिक मान्यताओं के आधार पर संचालित होती है. उनका आरोप है कि बाहरी धार्मिक प्रभाव और मतांतरण के कारण गांव की एकता और सांस्कृतिक पहचान प्रभावित हो रही है.

ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि संबंधित परिवार को पूर्व में कई बार समझाइश देकर आदिवासी परंपराओं में पुनः शामिल होने का आग्रह किया गया था, लेकिन उनके द्वारा इस पर सहमति नहीं जताई गई.

Protest against the converted family
मंतारित परिवार के खिलाफ विरोध (ETV BHARAT)

जिन लोगों ने अवैध धर्मांतरण किया है. उनको हम लोग भगा रहे हैं. इन लोगों को हमने धर्म नहीं बदलने की सलाह दी थी. गांव में जमीन और अन्य चीजें भी इन्हें मुहैया कराई थी. इन्हें रोका था उसके बावजूद इन लोगों ने धर्मांतरण किया है. इसलिए हम लोग इन्हें भगा रहे हैं. अभी हम लोग सिर्फ इनका सामान बाहर किए हैं. घर बार वगैरह नहीं तोड़े हैं- राजमन कुमेटी, आदिवासी समाज के ग्रामीण

यह सारा विवाद अवैध धर्मांतरण को लेकर विवाद चल रहा है. हमारे देवी देवता को ये लोग नहीं मान रहे हैं. इसको लेकर विवाद चल रहा है. अभी एक घर के लोगों को हम लोग निकाल रहे हैं. गांव में कुल 15 घर के लोगों ने धर्मांतरण किया है. धर्मांतरण करने वाले लोग आदिवासी समाज के लोग हैं. हम लोग धर्मांतरण का विरोध कर रहे हैं. इसलिए हम लोग इन्हें गांव से बाहर कर रहे हैं- सुदू दुग्गा, ग्रामीण

क्या है मंतारित परिवार का पक्ष ?

वहीं मतांतरित परिवार के सदस्य मोहन दुग्गा का कहना है कि वे गांव में शांतिपूर्वक रहना चाहते हैं और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के पक्षधर हैं. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वे उन धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में भाग नहीं लेंगे, जिनमें पशु बलि या जीव हत्या से संबंधित परंपराओं का पालन किया जाता है. मोहन दुग्गा के इस कथन के बाद ग्रामीणों के एक वर्ग ने उन्हें पुनः गांव में स्वीकार करने से इनकार कर दिया.

संतराम महाराज के शरण में गए हैं. उसी का गांव वाले विरोध कर रहे हैं. वो लोग कह रहे हैं कि गांव में मिलो सबकुछ मिलेगा. अभी हम लोग कहां जाएंगे. हम लोग गांव में रहना चाहते हैं. हमारे पिता जी ईसाई धर्म को मान रहे हैं-मोहन दुग्गा, मतांतरित ग्रामीण

पुलिस प्रशासन ने संभाला मोर्चा

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन लगातार दोनों पक्षों के साथ चर्चा कर समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं. गांव में एहतियातन पुलिस बल तैनात किया गया है और प्रशासन शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सक्रिय रूप से निगरानी कर रहा है.

भरंडा के बाद अब खड़का गांव का मामला आदिवासी समाज, धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक समरसता के जटिल प्रश्नों को फिर से सामने ला रहा है. फिलहाल प्रशासन का प्रयास दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कर शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान निकालने का है, जबकि गांव में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है.

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