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लखनऊ में LDA की 'फास्टपास' योजना में विवाद, एक रुपये की जगह मांगे एक लाख, दी सफाई- सुशांत गोल्फ सिटी के लिए नहीं है योजना

पीड़ित ने LDA वीसी से मामले की शिकायत की है. चीफ टाउन प्लानर ने बताया, सुख-सुविधा शुल्क अलग से लागू होते हैं.

LDA वीसी से की गई शिकायत.
LDA वीसी से की गई शिकायत. (Photo Credit; LDA)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : January 9, 2026 at 4:22 PM IST

3 Min Read
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लखनऊ : लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने 30 दिसंबर 2025 को 'फास्टपास' सिस्टम लागू किया है. इस डिजिटल व्यवस्था का प्रचार करते हुए एलडीए ने दावा किया था कि 100 वर्ग मीटर तक के आवासीय भूखंडों के लिए प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और तेज होगी, जिससे लोगों को कार्यालय के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी. 100 मीटर तक के आवासीय और 30 मीटर तक के व्यावसायिक निर्माण के लिए मात्र एक रुपये में ऑनलाइन नक्शा पास किया जाएगा.

इस नए सॉफ्टवेयर के जरिए भूखण्ड स्वामी अपने मकान और दुकान का नक्शा स्वयं पास कर सकेंगे. इसके लिए उन्हें ऑनलाइन आवेदन करना होगा. चंद मिनटों में मानचित्र स्वीकृत हो जाएगा. लेकिन अब इसे लेकर नया विवाद सामने आया है. पीड़ित अजय अग्रवाल LDA वीसी से इसकी शिकायत की है. शिकायतकर्ता अजय अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि वास्तविकता इससे अलग है. अंसल टाउनशिप (गोल्फ सिटी) में 72 वर्ग मीटर के एक प्लॉट पर मानचित्र स्वीकृति के लिए लगभग एक लाख रुपये शुल्क मांगा गया.

वसूल रहे सुख-सुविधा शुल्क : इसमें फास्टपास पोर्टल फीस के अलावा मलबा स्टॉकिंग, वाटर चार्ज और सुंदरीकरण जैसे शुल्क शामिल थे, जो टाउनशिप स्वीकृति के समय डेवलपर द्वारा पहले ही जमा किए जा चुके थे. इसके अतिरिक्त 500 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से सुख-सुविधा शुल्क लगाया गया, जिसे उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा 15(2ख) का उल्लंघन है. यह शुल्क मुख्य रूप से मेट्रो कॉरिडोर, टीओडी जोन या आरआरटीएस परियोजना से 500 मीटर के दायरे में ही लागू होता है.

योजना सिर्फ LDA की कॉलोनियों के लिए : एलडीए के चीफ टाउन प्लानर केके गौतम ने बताया, फास्टपास सिस्टम मुख्य रूप से LDA की अपनी कॉलोनियों पर लागू है. सुशांत गोल्फ सिटी जैसी हाईटेक टाउनशिप पर यह लागू नहीं है. सुख-सुविधा शुल्क अलग से लागू होते हैं. ये शुल्क प्लॉट की लोकेशन, पूर्व में जमा राशि और नियमों के आधार पर भिन्न हो सकते हैं. अंसल प्रोजेक्ट्स में पहले से चली आ रही वित्तीय विवादों (जैसे LDA द्वारा कंपनी पर करोड़ों के बकाया का दावा) के कारण भी अतिरिक्त जटिलताएं उत्पन्न हो रही हैं.

शासन से जांच की मांग : नागरिक संगठन से जुड़े विवेक शर्मा ने बताया कि यह मामला जनता में चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां एक ओर डिजिटलीकरण की सराहना हो रही है, वहीं दूसरी ओर शुल्कों की पारदर्शिता और कानूनी अनुपालन पर सवाल उठ रहे हैं. आवेदकों ने शासन से इसकी जांच और आवश्यक सुधार की मांग की है, ताकि योजना का लाभ वास्तविक रूप से आम जनता तक पहुंचे.

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