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आगरा भी इंदौर जैसी आपदा का गवाह; 33 साल बाद भी नहीं भरे जख्म,संकट में 4 लाख की आबादी

हालात आज भी पहले की तरह, नालों से सटकर गुजरती है पानी की पाइप लाइन, लीकेज के कारण फैलती है बीमारियां.

आगरा का दर्द.
आगरा का दर्द. (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : January 8, 2026 at 2:25 PM IST

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Updated : January 8, 2026 at 2:39 PM IST

12 Min Read
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आगरा (श्यामवीर सिंह): इंदौर में दूषित पानी से अब तक 18 मौतों की बात कही जा रही है. आगरा में ऐसी ही त्रासदी आज से 33 साल पहले 20-21 मई 1993 को घट चुकी है. तब ताजनगरी में 19 लोगों की जान दूषित पानी के कारण चली गई थी. आज भी लोगों के जेहन में उस घटना का खौफ जिंदा है. किसी ने बेटा खोया था तो किसी ने भाई, मां-बाप या बहन. हैरत की बात यह है कि पीने के पानी सप्लाई का पैटर्न आज भी कुछ खास नहीं बदला है. शहर के एक बड़े हिस्से में नाले-नालियों और सीवर से सटकर पाइपलाइन गुजर रही है.

लीकेज के कारण घरों में जानलेवा पानी सप्लाई हो रहा है. नतीजा यह है कि लोग इससे अक्सर बीमार पड़ते हैं. अधिकतर लोग अब इस पानी को पीने के लिए इस्तेमाल नहीं करते. एक अनुमान के मुताबिक, करीब 4 लाख की आबादी पानी की समस्या से प्रभावित है.

आगरा में 33 साल पहले दूषित पानी से जा चुकी है 19 लोगों की जान. (Video Credit; ETV Bharat)

ईटीवी भारत की टीम जब आगरा की जल त्रासदी में अपनों को खोने वाले परिवारों से मिली तो उनकी जुबान पर एक ही बात निकली कि जिस पानी ने हमारे अपने छीन लिए, उसका एक घूंट भी नहीं पीते हैं. तब से अभी तक पानी की आपूर्ति ठीक नहीं हुई है. शहर में लोग जेब ढीली कर आरओ पानी पर निर्भर हैं.

क्या है इंदौर की घटना: इंदौर में 25 दिसंबर से ही दूषित पानी से मौतें होने की बातें सामने आ रही हैं. आधिकारिक तौर पर 8 लोगों को मुआवजा दिया गया है, जबकि 18 मौतें होने की आशंका है. भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों में रहने वाले कई लोग काल के गाल में समा गए. इंदौर में दूषित पानी से मौत के आंकड़ों पर अब कोर्ट ने भी संज्ञान लिया है.

इस मामले में इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्वीकार किया कि जिला प्रशासन ने अब तक 18 लोगों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए की राहत राशि प्रदान की है जबकि तीन अन्य मृतकों के परिजनों को भी राहत राशि प्रदान करने की प्रक्रिया जारी है. उनका कहना है कि मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जो भी नाम सामने आए, उन्हें भी इस घटना में शामिल मानकर फिलहाल आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है. जबकि मौत के आंकड़े पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट्स के आधार पर बनाए जाते हैं.

पेयजल आपूर्ति की यह है स्थिति.
पेयजल आपूर्ति की यह है स्थिति. (Photo Credit; ETV Bharat)

आगरा की त्रासदी के घाव: इंदौर में जिस तरह की जल त्रासदी हुई है, वैसा ही कुछ 33 साल पहले आगरा में हुआ. 20-21 मई 1993 की यह घटना है. जल संस्थान (अब जलकल विभाग) की दूषित पेयजल सप्लाई से 19 लोगों की तब जान चली गई थी. इसके साथ ही सैकड़ों बीमार पड़ गए थे. जिला अस्पताल, एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के साथ ही कई निजी अस्पतालों में भी बीमार भर्ती हुए थे. उस समय हालात इतने खराब थे कि अस्पतालों में जगह ही नहीं बची थी. खटीकपाड़ा और मंडी सईद खां में घर-घर मातम पसरा था. यही दोनों इलाके प्रभावित भी थे.

रोज आती हैं 150 से अधिक शिकायतें: आगरा में भले ही गंगा के पानी की आपूर्ति की जाती है. जबकि शहर में हर दिन 150 से अधिक शिकायतें जलकल विभाग के कंट्रोल रूम पर दूषित पेयजल आपूर्ति की पहुंचती हैं. सबसे अधिक शिकायतें पुराने शहर से जुड़ी होती हैं. जहां पानी की पाइप लाइनें नाले या सीवर लाइनों से सटकर बिछी हैं. यही कारण है कि नलों से दूषित पेयजल की आपूर्ति होती है. जलकल विभाग का दावा है कि शहर में बेहतर पेयजल आपूर्ति के लिए हर दिन 400 से अधिक पानी के सैंपल लिए जाते हैं. जहां से लीकेज की शिकायत आती है. उसे तुरंत ठीक कराने का दावा जलकल विभाग के अधिकारी करते हैं.

जल त्रासदी को याद कर आज भी सिहर जाते हैं लोग.
जल त्रासदी को याद कर आज भी सिहर जाते हैं लोग. (Photo Credit; ETV Bharat)

सवाल अब भी वही: आगरा में 33 साल पहले जिन हालात में लोगों ने बीमार होकर जान गंवाई, अब भी कुछ वैसा ही है. पुराने शहर के इलाकों में साफ-सफाई का संकट है. पानी की पाइपलाइनें नालों से होकर गुजरती हैं. कई जगहों पर लीकेज है, जिससे पानी दूषित हो जाता है. कुछ ऐसी ही स्थिति पहले हुई त्रासदी के समय भी थी. हैरत की बात है कि हालात आज भी बहुत नहीं बदले हैं. सवाल अब भी वही हैं, जो पहले की घटना के समय थे.

अंग्रेजों के जमाने की पाइपलाइन, ये इलाके प्रभावित: आगरा पुराने शहर में अंग्रेजों के समय की पाइपलाइन बिछी है. अब हालात ऐसे हैं कि पुरानी पाइपलाइनें आबादी और निर्माण कार्य की वजह से गहरे नालों के बीच में दब गई हैं. जिसकी वजह से उनका लीकेज पकड़ना बेहद मुश्किल होता है. सबसे अधिक पेयजल दूषित होने की शिकायत भी पुराने शहर में मुदड़ी मंसूर खां, मंडी सईद खां, काला महल, पीपल मंडी, नाला काजीपाड़ा, मीरा हुसैनी, चक्कीपाट, बिजलीघर, बालूगंज, छीपीटोला, नाई की मंडी, मंटोला, हींग की मंडी, धूलियागंज, लोहामंडी, गोकुलपुरा, जगदीशपुरा, किशोरपुरा, शाहगंज, शहीद नगर, इंद्रापुरम, बल्केश्वर, नगला पदी, खंदारी आदि से आती हैं.

मेयर ने सुधार के लिए उठाए कदम.
मेयर ने सुधार के लिए उठाए कदम. (Photo Credit; ETV Bharat)

15 मिनट तक नलों से आता है दूषित पानी : डॉ. भीमराव आंबेडकर रोड निवासी राजेश ने बताया कि सुबह करीब दस से 15 मिनट तक नलों से दूषित पानी आता है. इसे कोई पीता नहीं है. स्थानीय निवासी सुनील ने बताया कि नाले के पास से होकर पाइपलाइन है. जहां तक याद है, यह कभी चेक नहीं की गई. यही वजह है कि दूषित पानी आता है. इसी तरह खटीकपाड़ा निवासी गीता देवी बताती हैं कि, जिस दिन आगरा की त्रासदी हुई, उस समय घर में बेटी ने जन्म लिया था. परिवार में सभी खुश थे. पति किशन कबाड़ का काम करते थे. दूषित पानी ने उनकी जान ले ली.

अब सैंपल लेने वाले नहीं आते: खटीकपाड़ा निवासी राजू ने बताया कि साल 1993 में पानी दूषित हो गया था. जब यहां पर लोगों ने पानी पीया तो उनकी हालत खराब हुई. बस्ती में सैकडों लोग बीमार हो गए. अस्पताल में भर्ती कराया. तब पानी से 19 लोगों की मौत हुई थी. अब पेयजल आपूर्ति का पानी नहीं पीते हैं. खटीकपाड़ा के ही जय कुमार कहते हैं, पहले पानी की जांच और सैंपल के लिए जलकल विभाग से लोग आते थे. अब कोई नहीं आता है. गंदे पानी की सप्लाई है.

आगरा में पानी की आपूर्ति पर एक नजर.
आगरा में पानी की आपूर्ति पर एक नजर. (Photo Credit; ETV Bharat)

क्या कहते हैं पीड़ित : खटीकपाड़ा निवासी इंद्रादेवी घटना का जिक्र करते हुए बताती हैं, उस दिन घर पर नाश्ता नहीं बना था. इसलिए, हलवाई की दुकान से कचौडी और जलेबी मंगवाई थीं. जिन्हें खाया और पानी पिया. इससे छोटे बेटे जोगेंद्र की तबियत सबसे पहले खराब हुई. उसे लेकर अस्पताल गए. कई अस्पताल में भर्ती नहीं किया. तभी बेटे और अन्य की तबियत खराब हो गई. बेटे की मौत हो गई. हर घर में दो से तीन लोग तब बीमार हुए थे. उनके परिवार ने तब से पेयजल आपूर्ति का पानी पीना बंद कर दिया है. पहले हैंडपंप का पानी पीते रहे, अब आरओ का पानी खरीद रहे हैं. जो पेयजल आपूर्ति है, उसका पानी आज भी गंदा ही आता है. इसे नहाने और अन्य काम में ही उपयोग करते हैं. हलवाई कैलाशी के भाई की भी तब मौत हुई थी. बच्चों को भी आपूर्ति का पेजयल नहीं पीने देते हैं. यहां के लोग बताते हैं कि जब जल त्रासदी हुई थी तो पूरा मोहल्ला ही खाली हो गया था. लोग अपने नाते-रिश्तेदारों के पास चले गए थे.

आगरा में पेयजल पाइपलाइन का निरीक्षण करतीं मेयर.
आगरा में पेयजल पाइपलाइन का निरीक्षण करतीं मेयर. (fd)

कोई दोषी नहीं मिला, हाईकोर्ट से लगाई गुहार: उप्र खटीक समाज के अध्यक्ष तजेंद्र राजौरा ने बताया कि जल त्रासदी के मृतकों के परिवार की आर्थिक मदद के लिए मुहिम शुरू की, जो आज तक जारी है. कहते हैं, 33 साल से न्याय की लड़ाई लड़ रहा हूं. अभी तक इस मामले में जलकल विभाग के एक भी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है. इसमें कोई दोषी नहीं ठहराया गया है. इस बारे में हाईकोर्ट में एक साल पहले गुहार लगाई थी. जिस पर हाईकोर्ट ने डीएम और संबंधित विभाग से जबाव मांगा है. हर साल 21 मई को काला दिवस मनाता हूं. सरकार से गुहार है कि मृतकों के परिवार को आर्थिक मदद मिले. इसके साथ ही हर परिवार में मृतक को नौकरी दी जाए. उस वक्त बीमार लोगों को सिर्फ 10 -10 हजार और मृतक परिवार को एक-एक लाख रुपए की आर्थिक मदद मिली थी.

आगरा में नालों से होकर गुजरती पेयजल पाइपलाइन.
आगरा में नालों से होकर गुजरती पेयजल पाइपलाइन. (fd)

भविष्य का रास्ता: विशेषज्ञ मानते हैं कि समाधान इस तरह संभव है कि पेयजल आपूर्ति की पाइपलाइन की नियमित ऑडिट कराई जाए. ये काम स्वतंत्र जल गुणवत्ता जांच एजेंसियों से कराई जाए. इसके साथ ही रियल टाइम मॉनिटरिंग के साथ ही शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई की जाए. इसमें जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ आपराधिक जिम्मेदारी तय हो. इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति चाहिए.

प्राथमिकता पर शुद्धता और बेहतर आपूर्ति : जलकल विभाग के महाप्रबंधक अरुणेंद्र कुमार राजपूत का दूषित आपूर्ति पर कहना है कि, शहर में जहां भी लीकेज या पेयजल में गंदगी की शिकायत मिलती है, वहां टीम भेजकर व्यवस्था कराई जाती है. इसके साथ ही लीकेज दुरस्त कराया जाता है. हर दिन पेजयल आपूर्ति की समीक्षा की जा रही है. यह भी आदेश जारी किया है कि शहर में कोई एजेंसी यदि लाइन डालने का काम कर रही है तो पहले जलकल विभाग को सूचना दे. विभाग से समन्वय करके काम करे. जिससे पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने पर उसे ठीक किया जाए.

आगरा में 1993 की जल त्रासदी में जान गंवाने वाले जोगेंद्र की मां और भाई.
आगरा में 1993 की जल त्रासदी में जान गंवाने वाले जोगेंद्र की मां और भाई. (Photo Credit; ETV Bharat)

मेयर ने दिए ये निर्देश: शहर में दूषित पेयजल आपूर्ति को लेकर आगरा की महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह ने जलकल विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं. कहा है कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने में किसी भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. शहर में जहां पर पुरानी व ध्वस्त पाइपलाइनें हैं, उनकी मरम्मत कराई जाए. जर्जर ढांचों के चिन्हांकन और पानी की टंकियों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए. अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि क्षेत्रीय पार्षदों से समन्वय कर शहर में पेयजल व्यवस्था बेहतर करें. साथ ही जहां सीवर के साथ पाइपलाइन मिल रही हैं, उन्हें बदला जाए. लीकेज को भी दूर किया जाए.

इंदौर की घटना से कानपुर में भी दहशत, मटमैले पानी की आपूर्ति

शहर के दक्षिण क्षेत्र में रहने वाली लाखों की आबादी पिछले कई दिनों से गंदा पानी पीने को मजबूर है. जूही, बारादेवी, साकेत नगर, उस्मानपुर समेत अन्य क्षेत्रों में बदबू वाला, पीला मटमैले रंग का पानी नलों से आ रहा है. यहां रहने वाले लोग इंदौर की घटना से घबराए हुए हैं. शहर में इन दिनों सुबह और शाम को बेनाझाबर स्थित जलकल विभाग से पानी की सप्लाई कराई जाती है. विभाग के पीछे एरिया में बने कार्यालय में पानी का स्टोरेज टैंक में है, और वहां से कई शोधन संबंधी प्रक्रियाओं से गुजारने के बाद शहर के 110 वार्डों में पानी सप्लाई किया जाता है. वहीं, गंगा से पानी पहले बेनाझाबर स्थित टैंकों में आता है.

जांच के लिए फील्ड पर उतरे अफसर: इस पूरे मामले जलकल जीएम आनंद त्रिपाठी ने माना कि शिकायतें आई हैं. इसके पीछे एक बड़ा कारण लाइनों में लीकेज है. जिसके लिए अब एई व जेई स्तर के अफसरों को सुबह से ही फील्ड में उतारा जा रहा है. शिकायत संबंधी जानकारी मिलते ही टीम पहुंच रही है और लीकेज ठीक कराए जा रहे हैं. कहा कि लोग चाहें तो कार्यालय के वाट्सएप नंबर- 7565004604 पर भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. जलकल जीएम आनंद त्रिपाठी ने बताया, रोजाना 500 घरों से पानी के नमूनों की जांच करा रहे हैं. स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को यह जिम्मा सौंपा गया है, 50 महिलाओं की टीमें शहर में काम कर रही हैं. इसके अलावा आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर्स को टेस्टिंग का जिम्मा सौंपा गया है.

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Last Updated : January 8, 2026 at 2:39 PM IST