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बिजली उत्पादन इकाइयों का लंबे समय तक बंद रहना प्रदेश की जनता के साथ अन्याय : उपभोक्ता परिषद

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आपत्ति जताई है.

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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : February 24, 2026 at 10:19 PM IST

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व केंद्र सहित राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने प्रदेश में बड़ी संख्या में उत्पादन इकाइयों के बंद (शटडाउन) रहने पर गंभीर आपत्ति जताई है. परिषद का कहना है कि जब उपभोक्ताओं से फिक्स्ड चार्ज की वसूली की जा रही है, तब बिजली उत्पादन इकाइयों का लंबे समय तक बंद रहना प्रदेश की जनता के साथ अन्याय है.

उपभोक्ता परिषद के मुताबिक, यूपी में कुल 22 उत्पादन इकाइयां रिवर्स शटडाउन (RSD), प्लांड शटडाउन (AOH) या अन्य कारणों से बंद हैं. इनमें अल्पकालीन और दीर्घकालीन दोनों प्रकार की इकाइयां शामिल हैं. कई इकाइयां 'लो डिमांड', 'पीपीए की अनुपलब्धता' और 'मेंटेनेंस' जैसे कारणों से बंद बताई गई हैं.

उनका कहना है कि केंद्र की तरफ से बनाए गए कानून कंस्यूमर राइट रूल 2020 की धारा 10 के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रावधान है. ऐसे में अगर उत्पादन इकाइयां बंद रहें और प्रदेश में रोस्टर लागू हो, तो यह नियमों की भावना के विपरीत है. उपभोक्ता परिषद ने विशेष रूप से प्रमुख तापीय परियोजनाओं की इकाइयों के बंद रहने पर सवाल उठाए हैं.

उन्होंने बताया कि राज्य विद्युत उत्पादन निगम की अनपरा, हरदुआगंज, जवाहरपुर, ओबरा सी और परीछा इकाइयां, टांडा थर्मल की चारों इकाइयां (पीपीए न होने के कारण दीर्घकालीन शटडाउन), विभिन्न निजी क्षेत्र इकाइयां जो “लो डिमांड” के आधार पर बंद हैं. उपभोक्ता परिषद का आरोप है कि एक ओर उपभोक्ताओं से फिक्स्ड चार्ज वसूला जा रहा है, वहीं दूसरी ओर उत्पादन इकाइयां निष्क्रिय रखी जा रही हैं और प्रदेश में रोस्टर लागू किया जा रहा है.

परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने सभी बंद इकाइयों को तत्काल प्रभाव से चालू कराने की मांग की है. उन्होंने कहा कि अगर इकाइयां ‘लो डिमांड’ के कारण बंद हैं तो रोस्टर तत्काल समाप्त किया जाए. फिक्स्ड चार्ज वसूली की पारदर्शी जांच कराई जाए. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर प्रदेश में 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई तो उपभोक्ता हित में व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा. बिजली दर की सुनवाई में जोर शोर से इस मुद्दे को प्रदेश की जनता के सामने रखा जाएगा.

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