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चमोली: भारत चीन सीमा को जोड़ेगा मलारी स्टील ब्रिज, दुर्गम क्षेत्र में यातायात होगा सुगम

चमोली में भारत चीन सीमा पर सीमा सड़क संगठन ने स्टील ब्रिज का निर्माण किया.

India China border steel bridge
स्यून गदेरे के पास बना स्टील ब्रिज (Photo-ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : January 4, 2026 at 8:38 AM IST

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चमोली: चमोली जिले में भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाले मलारी राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक महत्वपूर्ण विकास हुआ है. सीमा सड़क संगठन (BRO) ने ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत स्यून गदेरे के पास 104 मीटर लंबे स्टील ब्रिज का निर्माण लगभग पूरा कर लिया है. यह पुल अगले वर्ष तक यातायात के लिए खोल दिया जाएगा. जिला पंचायत सदस्य आरुषि बुटोला ने कहा कि इस पुल से नीति घाटी के दो दर्जन से अधिक गांवों को सीधा लाभ मिलेगा. जबकि जोशीमठ के उप जिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने पुल निर्माण को सेना के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया.

रसद व सैन्य वाहनों की आवाजाही होगी आसान: दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में बना यह पुल इंजीनियरिंग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है. सीमांत क्षेत्रों में इतने बड़े स्टील ब्रिज का निर्माण पहली बार हुआ है. इसके बनने से भारतीय सेना और आईटीबीपी की अग्रिम चौकियों तक रसद और भारी सैन्य वाहनों की आवाजाही आसान होगी, जिससे सीमा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी.

क्षेत्र में पर्यटन को लगेंगे पंख: ढाक वार्ड की जिला पंचायत सदस्य आरुषि बुटोला ने बताया कि इस पुल से नीति घाटी के दो दर्जन से अधिक गांवों को सीधा लाभ मिलेगा. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में कई पुराने पुल जर्जर थे, जिनसे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता था. इस नए और मजबूत पुल से ग्रामीणों की आवाजाही सुरक्षित होगी और पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी.

पुल सामाजिक-आर्थिक विकास में सहायक: जोशीमठ के उप जिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि यह पुल सेना के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है. यह नीति घाटी के पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच को भी आसान बनाएगा. इससे यात्रियों को सुरक्षित यात्रा मिलेगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा. सीमा सड़क संगठन का यह प्रोजेक्ट सामरिक महत्व के साथ-साथ सीमांत क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास में भी सहायक होगा.

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