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EXPLAINER : हाथी कॉरिडोर का संरक्षण क्यों जरुरी, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद क्या बदलेंगे हालात,देखिए खास रिपोर्ट

हाथी कॉरिडोर को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद छ्त्तीसगढ़ में भी हाथी कॉरिडोर की स्थिति सुधरने की उम्मीद है.राजकुमार शाह की रिपोर्ट

ELEPHANT CORRIDORS
हाथी कॉरिडोर का संरक्षण क्यों है जरुरी (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : August 28, 2026 at 10:52 AM IST

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Updated : August 28, 2026 at 12:00 PM IST

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कोरबा : सुप्रीम कोर्ट ने हाथी कॉरिडोर के संरक्षण के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि केवल फसल या आजीविका के नुकसान के आधार पर हाथियों के पारंपरिक और प्राकृतिक आवागमन के रास्तों को अवरुद्ध या बाधित नहीं किया जा सकता है. छत्तीसगढ़ हाथियों का पारंपरिक निवास रहा है,ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी प्रदेश में स्थित हाथी कॉरिडोर के लिए काफी महत्वपूर्ण हो जाता है.

छत्तीसगढ़ में आते हैं पड़ोसी राज्यों के हाथी

पड़ोसी राज्यों से हाथी लगातार छत्तीसगढ़ में की ओर डायवर्ट हुए हैं. छत्तीसगढ़ के समृद्ध वनों ने हमेशा से हाथियों को अपनी ओर आकर्षित किया है. विशेष तौर पर कोरबा जिले में लेमरू हाथी रिजर्व का इलाका हाथियों का पसंदीदा है. लेमरू हाथी रिजर्व में भी कई ऐसे रास्ते हैं, जिन्हें हाथी कॉरिडोर के तौर पर वन विभाग ने चिन्हित किया है. इन कॉरिडोर का इस्तेमाल हाथी दशकों से करते आ रहे हैं, हालांकि छत्तीसगढ़ में स्थापित तौर पर इंटर स्टेट कॉरिडोर के तौर पर चारमार-जिंगोल कॉरिडोर को मान्यता दी गई है. इस कॉरिडोर के जरिए हाथी ओडिशा से छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ से वापस ओडिशा तक का सफर तय करते हैं. इसकी लंबाई 20 किलोमीटर और चौड़ाई लगभग ढाई किलोमीटर है.

Supreme Court observation
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

कोरबा के अलावा भी दूसरे जिलों में कॉरिडोर

जानकारों की माने तो इस स्थापित कॉरिडोर के अलावा भी खासतौर पर छत्तीसगढ़ के कोरबा, सरगुजा(संपूर्ण संभाग) और रायगढ़ जैसे जिलों में कई ऐसे रास्ते हैं. जिनका इस्तेमाल हाथी दशकों से करते आ रहे हैं. इन रास्तों की पहचान हाथियों की वर्तमान पीढ़ी को उनके पूर्वजों से मिली है. मान्यता है कि हाथी जिस स्थान पर एक बार जाते हैं, 100 साल में वह एक बार उस स्थान पर वापस जरूर लौटकर आते हैं. हाथियों की याददाश्त क्षमता काफी अधिक होती है. अब हाथी कॉरिडोर को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और निर्देश का असर छत्तीसगढ़ में किस तरह से होता है? कितनी गंभीरता से उन कॉरिडोर की पहचान की जाती है जिनका इस्तेमाल हाथी वर्तमान में भी कर रहे हैं? क्या नए कॉरिडोर की पहचान कर उसे संरक्षित किया जाएगा? यह बड़ा सवाल यह भी है. न्यायालय द्वारा दिए का निर्देशों के पालन में जो व्यवधान हाथी कॉरिडोर में उत्पन्न हुए हैं. उन्हें किस तरह से हटाया जाएगा, इस दिशा में एक बड़ी कार्ययोजना बनाकर ठोस काम करना एक बड़ी चुनौती भी है.

हाथी कॉरिडोर का संरक्षण, एक रिपोर्ट (ETV BHARAT CHHATTISGARH)



समझिए न्यायालय ने क्या कहा ​ ?

अदालत ने कहा कि हाथियों के झुंड स्वभाव से लंबी दूरी तय करते हैं और उनकी यात्रा अंतरराज्यीय होती है. फसल नुकसान के नाम पर कृत्रिम दीवारें या बाधाएं खड़ी करना मानव-वन्यजीव संघर्ष का स्थायी समाधान नहीं है. ​कोर्ट ने हाथियों को भगाने के लिए आग के गोले, मशालों, नुकीली वस्तुओं या अन्य हिंसक एवं बर्बर तरीकों के इस्तेमाल पर गहरी नाराजगी जताई और इनके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया है. पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि स्थानीय कारणों से कहीं भी कॉरिडोर ब्लॉक न हों.

ELEPHANT CORRIDORS
सुप्रीम कोर्ट ने हाथी कॉरिडोर पर क्या कहा (ETV Bharat Chhattisgarh)

छत्तीसगढ़ के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह निर्देश ?

छत्तीसगढ़ के लिए सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश एक तरह से एक आंख खोलने वाला है, पिछले दो दशकों में छत्तीसगढ़ (विशेषकर सरगुजा, कोरबा, रायगढ़, जशपुर, और धरमजयगढ़) में झारखंड और ओडिशा के जंगलों से हाथियों का आना तेजी से बढ़ा है. कोरबा जिले के दोनों वन मंडल में वर्तमान में भी 70 हाथी विचरण कर रहे हैं. घटते वन, औद्योगिक विस्तार, कोयला खनन, जंगल में अतिक्रमण और कुछ मामलों में वन अधिकार पट्टे के कारण हाथियों के पारंपरिक रास्ते पूरी तरह से अव्यवस्थित हो गए हैं, संकुचित हो गए हैं. यहां बड़े व्यवधान उत्पन्न हो गए हैं.

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पर्यावरण के लिए हाथी कितने जरूरी (ETV Bharat Chhattisgarh)

हाथी-मानव द्वंद के लिए बड़ा कारण

जानकारों के मुताबिक हाथी कॉरिडोर में व्यवधान उत्पन्न होने से हाथी-मानव द्वंद्व के मामले में बढ़ोतरी होती है. हालांकि इस दिशा में काम भी किया जा रहा है. स्थानीय प्रशासन और वन विभाग का दावा है कि इसमें लगातार गिरावट आई है. हाथी कॉरिडोर में व्यवधान पैदा होने पर हाथी लगातार ग्रामीण बस्तियों की ओर रुख कर रहे हैं. ​ऐसे मार्गों में किसी भी तरह की सड़क, रेल परियोजना, खेती या बाड़ी जैसी संरचनात्मक अवरोधक निर्माण हाथियों को हिंसक बना सकता है. जबकि इसके विपरीत हाथियों का स्वभाव बेहद शांत सौम्य और सामाजिक रहता है.

ELEPHANT CORRIDORS
हाथी मानव संघर्ष (ETV Bharat Chhattisgarh)

जंगलों के अंदर किस तरह का अवरोध

वनांचल क्षेत्र जहां हाथियों का आना-जाना लगा रहता है. उन इलाकों में स्थानीय स्तर पर हाथियों को रोकने के लिए कई बार कृत्रिम दीवारें या अवरोध खड़े करने के प्रयास किए जाते हैं. नई व्यवस्था लागू हुई तो, प्रशासन और वन विभाग अवरोध या बैरिकेडिंग नहीं कर सकेंगे. वैज्ञानिक तरीकों से कॉरिडोर को सुरक्षित रखना होगा. जिसके जरिए हाथियों का आवागमन बेहद सुरक्षित तरीके से हो सके. उन्हें किसी तरह का अवरोध महसूस ना हो और वह निश्चिंत होकर साथ अपने उन मार्गों का उपयोग कर सकें. जिनके जरिए उनके पूर्वज जंगल में विचरण करते थे.

Conservation of elephant
हाथी कॉरिडोर का संरक्षण क्यों है जरुरी (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

कोरबा जिले में ही 3 कॉरिडोर कर रहे हैं, संरक्षण का काम

कटघोरा वन मंडल के डीएफओ जितेंद्र उपाध्याय के मुताबिक वैसे तो पूरा जंगल ही एक हाथी का गलियारा है,जहां वो भ्रमण करते हैं. लेकिन कुछ खास क्षेत्र को कॉरिडोर के तौर पर चिन्हांकित किया जाता है. इन रास्तों को ही कॉरिडोर कहते हैं. हाथी का विचरण वाले कॉरिडोर के अलावा भी वह जंगल में विचरण करते है. वह एक सोशल एनिमल है, जो दूसरे कंपार्टमेंट और जंगल में भी भ्रमण करते हैं. उनके भ्रमण के दौरान यदि कोई फसल हानि होती है या किसी भी तरह की हानि होती है तो हमारी टीम इसके लिए काम करती है. हाथी मित्र दल से लेकर वन अमला मुआवजा राशि प्रकरण को तैयार करते हैं.

our responsibility to keep elephants safe
हाथी को सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

कोरबा जिले में अभी 3 कॉरिडोर को चिन्हांकित किया गया है. धरमजयगढ़ से कोरबा की ओर वाला रास्ता काफी प्रचलित है. इसमें रहवास के विकास का काम और रूटीन वर्क हम कर रहे हैं. वर्तमान में भी 70 की संख्या में हाथी विचरण कर रहे हैं. बॉर्डर के इलाकों से हाथी आ जाते हैं, तो संख्या बढ़ भी सकती है- जितेंद्र उपाध्याय, डीएफओ

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हाथी-मानव द्वंद के लिए बड़ा कारण (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

जंगल के अंदर विकास ने कॉरिडोर प्रभावित

हाथी मित्र दल के सदस्य जितेंद्र सारथी कहते हैं कि यदि हम हाथी की बात करें तो वह एक सामाजिक जीव है. जिसका विचरण क्षेत्र काफी बड़ा होता है. उनकी आहार श्रृंखला भी काफी बड़ी रहती है. छत्तीसगढ़ के बहुत सारे इलाके हैं, पूरा धरमजयगढ़ और सरगुजा यह हाथी कॉरिडोर के तौर पर चिन्हित है. इसलिए हाथियों के साथ सामंजस्य बिठाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है, काफी जटिल है.

Elephant area decreased due to development
विकास के कारण हाथियों का क्षेत्र घटा (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

हाथियों के लिए कोई जिले की सीमाएं मायने नहीं रखती. वह लगातार मूवमेंट करते हैं. इसलिए जो इंडस्ट्रीज है, भारतमाला रोड बोलें या रेल कॉरिडोर बोलें. इससे हाथी डिस्टर्ब तो हो रहे हैं. जंगल के क्षेत्र में खेत बन गया, घर बन गए हैं. तो उनका रास्ता प्रभावित हो रहा है. इसकी वजह से वह शहर और आबादी की ओर कूच करते हैं - जितेंद्र सारथी, सदस्य हाथी मित्र दल

Elephants from neighboring states
छत्तीसगढ़ में आते हैं पड़ोसी राज्यों के हाथी (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

पर्यावरण का इंजीनियर होता है हाथी : एक्सपर्ट

वन विभाग के लिए काम करने वाले एलीफेंट एक्सपर्ट मंसूर खान कहते हैं कि हाथी पर्यावरण का इंजीनियर होता है. जिस जंगल में वो रहता है, वह जंगल संवारता, है, सजता है और बढ़ता है. भविष्य के लिए तैयार रहता है. छत्तीसगढ़ में 44 फीसदी जंगल हैं. यह सभी जंगल प्राकृतिक हैं. हमें यह ध्यान रखना है कि जितना हमें मिला है. वह आने वाली पीढ़ी तक हम पहुंचा सकें, हाथी प्रकृति की एक देन है, एक तोहफा है. हाथियों में एक स्थान को छोड़कर वहां, वापस लौटने की प्रवृत्ति रहती है. ऐसा माना जाता है कि 100 साल में हाथी की वापसी उस स्थान पर होती है. हाथी एक सामाजिक प्राणी होते हैं, ग्रुप की सबसे बड़ी मादा ग्रुप को लीड करती है. वह अपने ग्रुप को उन सभी स्थानों में घुमाती है. जहां उसके पूर्वजों ने उसे घुमाया था.

Consider the elephant your friend.
हाथी को अपना दोस्त समझें (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

हाथियों से दूरी बनाकर रखना चाहिए, उन्हें परेशान नहीं करना है. इन बातों को समझना होगा कि जब तक हाथियों का कॉरिडोर सुरक्षित नहीं रहेगा. हाथी मानव द्वंद भी नियंत्रित नहीं किया जा सकता. हाथियों को यह एहसास होना चाहिए कि मनुष्य अच्छा है और वह उनका हितैषी है. जब कभी घटनाएं होती है तब भी वह दुर्घटना होती है. हाथियों के लिए हिंसक, आतंकी इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करना भी काफी गलत है-मंसूर खान, एलिफेंट एक्सपर्ट

ELEPHANT CORRIDORS
हाथी कॉरिडोर को जानिए (ETV Bharat Chhattisgarh)

क्या होता है कॉरिडोर ?

मंसूर खान ने बताया कि एक रिजर्व क्षेत्र से दूसरे रिजर्व क्षेत्र को जोड़ने वाला जंगल कॉरिडोर कहलाता है. लेमरू रिजर्व से अचानकमार की ओर का इलाका हो या ओडिशा और झारखंड से जो हाथी छत्तीसगढ़ में आते हैं, जिस रास्ते का वो इस्तेमाल करते हैं. वह सबसे बड़ा कॉरिडोर है. हाथियों के कारण हमें नदी, नालों में पानी मिल रहा है. हाथी जंगल का विकास करते हैं. जंगल अच्छा रहता है, तो वह बादलों का आकर्षित करते हैं. वहां वर्षा अच्छी होती है. खेती अच्छी होती है. बिना वर्षा के खेती संभव ही नहीं है. इसलिए हाथियों का संरक्षण बेहद जरूरी है.

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Last Updated : August 28, 2026 at 12:00 PM IST