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अमित शाह की मौजूदगी में नर्मदा परियोजना पर 4 राज्यों में सहमति, विस्थापन और मुआवजे का दशकों पुराना विवाद सुलझा

नर्मदा नदी मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित कई राज्यों के लिए जल संसाधन, सिंचाई, पेयजल और ऊर्जा उत्पादन का प्रमुख स्रोत है.

Amit Shah and CMs present at the meeting
बैठक में मौजूद अमित शाह व मुख्यमंत्री (Source - PIB)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : July 7, 2026 at 8:33 PM IST

3 Min Read
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नई दिल्ली/जयपुर: नर्मदा नदी परियोजना से जुड़े दशकों पुराने लंबित विवादों के समाधान की दिशा में सोमवार को महत्वपूर्ण प्रगति हुई. केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के बीच नर्मदा परियोजना से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर महत्वपूर्ण समझौता हुआ. इस समझौते के साथ ही जल-प्लावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के विस्थापन और जमीन के मुआवजे से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद के समाधान का रास्ता साफ हो गया है.

बैठक में चारों राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे. सभी राज्यों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व और मार्गदर्शन में विवाद के सर्वमान्य समाधान पर सहमति व्यक्त की. अब चारों राज्यों के बीच हुए इस समझौते के बाद प्रभावित लोगों के पुनर्वास, भूमि मुआवजे और अन्य लंबित मामलों के समाधान की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है. सरकार का मानना है कि इस निर्णय से न केवल प्रभावित परिवारों को राहत मिलेगी, बल्कि परियोजना से जुड़े प्रशासनिक कार्यों को भी गति मिलेगी.

Chief Minister showing a copy of the agreement
समझौते की प्रति दिखाते मुख्यमंत्री (Source - PIB)

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बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं में एक नर्मदा: नर्मदा नदी परियोजना देश की सबसे महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं में से एक है. परियोजना से जुड़े बांधों और जलाशयों के कारण प्रभावित क्षेत्रों में वर्षों से विस्थापन, पुनर्वास और भूमि मुआवजे को लेकर विभिन्न राज्यों के बीच कई प्रशासनिक और कानूनी विवाद बने हुए थे. प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे के विभिन्न पहलुओं पर लंबे समय से सहमति नहीं बन पा रही थी, जिसके कारण कई मामले वर्षों तक लंबित रहे.

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हाल में हल हुए हैं जल विवाद: केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, हाल के वर्षों में राज्यों के बीच जल बंटवारे और अंतरराज्यीय नदी परियोजनाओं से जुड़े पुराने विवादों के समाधान में उल्लेखनीय प्रगति हुई है. इससे पहले हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से जुड़ी किशाऊ बांध परियोजना के मुद्दे पर भी सहमति बनाने में सफलता मिली थी. वहीं राजस्थान और हरियाणा के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल विवादों के समाधान की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं. इसके बाद अंतरराज्यीय जल विवादों के समाधान से विकास परियोजनाओं में तेजी आएगी, प्रभावित लोगों को समय पर राहत मिल सकेगी और राज्यों के बीच सहयोग की भावना भी मजबूत होगी. नर्मदा परियोजना पर हुआ यह समझौता इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.

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गौरतलब है कि नर्मदा नदी मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित कई राज्यों के लिए जल संसाधन, सिंचाई, पेयजल और ऊर्जा उत्पादन का प्रमुख स्रोत है. ऐसे में इस परियोजना से जुड़े लंबित विवादों का समाधान क्षेत्रीय विकास और लाखों लोगों के हितों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.