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घर के पास लगे इस पेड़ का फूल बनाएगा रोगी और होगी एलर्जी, 6 राज्यों के बाद मध्य प्रदेश में बैन

मध्य प्रदेश में कोनोकार्पस और सप्तपर्णी वृक्षों को लगाने पर बैन. सीईसी की रिपोर्ट के बाद फैसला. कई राज्य पहले ही लगा चुके हैं रोक.

CONOCARPUS TREES BANNED MP
मध्य प्रदेश में कोनोकार्पस और सप्तपर्णी वृक्षों को लगाने पर बैन (ETV Bharat GFX)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 10, 2026 at 8:17 PM IST

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Updated : January 10, 2026 at 9:42 PM IST

5 Min Read
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भोपाल: एलर्जी और सांस संबंधी बीमारियों के बढ़ते मामलों को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों में कोनोकार्पस और सप्तपर्णी वृक्षों के लगाने पर रोक लगा दी है. केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट में इन पेड़ों को पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक बताया गया है.

आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और असम जैसे राज्यों में पहले ही इन पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है. अब मध्य प्रदेश में इन दोनों पेड़ों पर रोक लगाते हुए स्थानीय वृक्ष प्रजातियों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है.

ban imposed in Madhya Pradesh After 6 states
सीईसी की रिपोर्ट के बाद मध्य प्रदेश नगरीय प्रशासन विभाग का फैसला (ETV Bharat)

रिपोर्ट के बाद नगरीय प्रशासन ने लिया फैसला

मध्य प्रदेश में कोनोकार्पस (Conocarpus/Mangroves) और सप्तपर्णी वृक्षों (Alstonia scholaris/Blackboard tree) को लेकर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने बड़ा फैसला लिया है. विभाग ने सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और परिषदों को निर्देश जारी करते हुए इन दोनों वृक्ष प्रजातियों के नए रोपण पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है. यह निर्णय भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है.

Conocarpus tree
कोनोकार्पस पेड़ के बारे में जानिए (ETV Bharat GFX)
CONOCARPUS SIDE EFFECT
स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है यह पेड़ (Getty Image)
Conocarpus Tree Benefits
कोनाकार्पस पेड़ के फायदे (ETV Bharat GFX)

कोनोकार्पस और सप्तपर्णी को लेकर सीईसी की रिपोर्ट

सीईसी ने 21 अगस्त 2025 को भारत में कोनोकार्पस वृक्ष प्रजाति से उत्पन्त पर्यावरणीय एवं पारिस्थितिक खतरों के संबंध में एक विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया था. इसमें यह उल्लेख किया गया है कि कोनोकार्पस वृक्ष को भारत में, विशेषकर शहरी हरित क्षेत्री एवं सड़क किनारे पौधरोपण हेतु व्यापक रूप से अपनाया गया है.

MANGROVES TREE PROBLEM
रिपोर्ट के बाद नगरीय प्रशासन ने लिया फैसला (Getty Image)
CONOCARPUS SIDE EFFECT
कोनोकार्पस पेड़ से होने वाले नुकसान (ETV Bharat GFX)

वैज्ञानिक अध्ययन एवं क्षेत्रीय स्तर पर मिले आब्जर्वेशन से यह स्पष्ट हुआ है कि कोनोकार्पस वृक्ष भारत के कई भागों में आक्रामक प्रवृत्ति प्रदर्शित कर रहा है, जिसके अनियंत्रित उपयोग से स्थानीय जैव-विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. इसके अलावा भू-जल का अत्यधिक दोहन और एलर्जी-उत्तेजक पराग (Pollen) एवं अन्य कारणों से जन-स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है.

ALSTONIA SCHOLARIS TREES BANNED
सप्तपर्णी वृक्षों को लगाने पर बैन (Getty Image)
Alstonia scholaris tree
अलस्टोनिया स्कोलारिस पेड़ के बारे में जानिए (ETV Bharat GFX)

सीईसी ने अपनी रिपोर्ट में कोनोकार्पस के अलावा यह भी उल्लेख किया है कि सप्तपर्णी वृक्ष से भी एलर्जी उत्तेजक पराग उत्पन्त होता है, जो अस्थमा, सर्दी-खांसी और सांस की तकलीफ की परेशानी पैदा करता है.

Alstonia scholaris tree Side effect
अलस्टोनिया स्कोलारिस पेड़ से होने वाले नुकसान (ETV Bharat GFX)

'स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं यह दोनों पेड़'

स्वास्थ्य के लिहाज से भी ये पेड़ गंभीर खतरा माने गए हैं. वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर लोकेंद्र दवे ने बताया कि "कोनोकार्पस और सप्तपर्णी दोनों ही एलर्जी-उत्तेजक पराग उत्पन्न करते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार इनके पराग से अस्थमा, एलर्जिक राइनाइटिस, सांस लेने में तकलीफ, सर्दी-खांसी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं. खासतौर पर शहरी इलाकों, सड़कों के किनारे और आवासीय कॉलोनियों में इन पेड़ों की मौजूदगी से बच्चों, बुजुर्गों और दमा के मरीजों पर ज्यादा असर पड़ रहा है."

CONOCARPUS SPREAD COUGH ASTHMA
इस पेड़ का फूल बनाएगा रोगी और होगी एलर्जी (ETV Bharat GFX)

इन पेड़ों से जल संकट गहराने का भी खतरा

सीईसी की रिपोर्ट में बताया गया है कि कोनोकार्पस वृक्ष भारत के कई हिस्सों में आक्रामक (इनवेसिव) प्रजाति के रूप में फैल रहा है. यह स्थानीय जैव-विविधता को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन पैदा कर रहा है. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि इस वृक्ष की जड़ें अत्यधिक मात्रा में भू-जल का दोहन करती हैं, जिससे जल संकट और गहराने की आशंका रहती है.

Many states imposed restrictions Conocarpus tree
कई राज्यों ने लगाया है प्रतिबंध (ETV Bharat GFX)

6 राज्य अब तक लगा चुके हैं प्रतिबंध

केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) ने अपनी रिपोर्ट में यह भी अवगत कराया गया है कि गुजरात एवं तमिलनाडु राज्यों द्वारा कोनोकार्पस वृक्ष प्रजाति पर हाल ही में प्रतिबंध लगा दिया गया है. इन राज्यों में लगाए गए वृक्षों को हटाकर स्थानीय वृक्ष प्रजातियों को लगाने संबंधी आदेश जारी किए जा चुके हैं. इसके अलावा कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और असम राज्य में भी कोनोकार्पस के उपयोग को रोकने और पहले लगाए गए वृक्षों को हटाकर स्थानीय वृक्ष प्रजातियों को लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं.

CONOCARPUS SPREAD COUGH ASTHMA
मध्य प्रदेश में कोनोकार्पस पेड़ लगाने पर प्रतिबंध (Getty Image)

देसी प्रजाति के पौधे लगाने के निर्देश जारी

कई राज्यों में प्रतिबंध के बाद अब मध्य प्रदेश सरकार ने भी इन दोनों पेड़ों को लेकर जरुरी कदम उठाए हैं. मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकास अपर आयुक्त ने इस संबंध में 9 जनवरी को एक पत्र जारी किया है. यह पत्र प्रदेश के सभी कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त और नगर पालिक अधिकारियों और नगर परिषद के लिए जारी किया गया है.

ALSTONIA SCHOLARIS TREES BANNED
सप्तपर्णी वृक्षों को लगाने पर बैन (Getty Image)

इस पत्र के अनुसार "कॉनोकार्पस के नए पौधों को लगाने पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा नगरीय प्रशासन विभाग ने निर्देश दिए हैं कि जहां पहले से कोनोकार्पस या सप्तपर्णी पेड़ लगाए गए हैं उन्हें हटाकर ऐसे स्थानों पर देसी प्रजाति के वृक्षों को लगाया जाए."

Last Updated : January 10, 2026 at 9:42 PM IST