बजट सत्र: चर्चा के दौरान सदन में बत्ती गुल, जूली का तंज-यही सरकार की हकीकत है...संघ को लेकर हंगामा
विधानसभा में जनजाति की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कुछ सेकंड के लिए सदन की बत्ती गुल हो गई थी.

Published : February 23, 2026 at 5:18 PM IST
जयपुर: विधानसभा के बजट सत्र में जनजाति वर्ग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सोमवार को सदन की बत्ती गुल हो गई. इस पर कांग्रेस सदस्यों ने हंगामा किया. कुछ सेकंड बाद लाइट आ गई, लेकिन नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली में तंज कसा कि यही सरकार की हकीकत है. जनजाति की अनुदान मांगों पर कांग्रेस विधायक अर्जुन बामनिया अपनी बात रख रहे थे कि कुछ सेकेंड सदन की लाइट चली गई. अचानक सदन की लाइट चले जाने पर नेता प्रतिपक्ष जूली खड़े हो गए. उन्होंने कहा कि यहां लाइट गई है. ऊर्जा मंत्री बैठे हैं, यही सरकार की हकीकत है. आज विधानसभा में भी लाइट चली गई. उधर, चर्चा के दौरान उप नेता प्रतिपक्ष रामकेश मीणा ने आरएसएस पर सवाल उठाए तो हंगामा हो गया. कांग्रेस और भाजपा विधायकों में नोकझोंक हुई.
विधानसभा में बिजली गुल होने के मुद्दे पर कांग्रेस के अन्य सदस्य बोले कि गांव में हालात और खराब है. इस पर ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि विधानसभा में ग्रीन सिस्टम बना है, जब एक सिस्टम से लाइट जाती है तो दूसरे सिस्टम में लाइट आने में कुछ समय का समय लगता है. इसमें तीन-चार सेकंड का समय लगा है. इससे पहले कांग्रेस विधायक बामनिया ने आरोप लगाया कि सरकार पर टीएडी क्षेत्र की अनदेखी कर रही है. आवासीय विद्यालय वर्ष 2013 से पहले भी थे. वर्ष 2018 के बाद भी थे. विद्यालय में प्रिंसिपल थे, लेकिन शिक्षा मंत्री उन प्रिंसिपल को अपने क्षेत्र में ले गए. आज भी आवासीय विद्यालय में प्रिंसिपल नहीं है.सरकार पक्षपात और भेदभाव कर रही है.
राज्य सरकार पर आरोप: पूर्व मंत्री बामनिया ने कहा कि सरकार ने पिछले बजट में साढ़े सत्रह सौ करोड़ रुपए की घोषणा की थी. संविधान के अनुच्छेद 275 में भी केंद्र से बजट का प्रावधान है, लेकिन राज्य सरकार ने केंद्र परिवर्तित योजनाओं का पैसा भी जनजाति इलाकों पर खर्च नहीं किया गया. साल 2024 25 में छात्रावासों के निर्माण की घोषणा की थी, लेकिन आज तक इनका निर्माण शुरू नहीं हुआ.
भाजपा ने दो साल में 150 नए स्कूल भवन बनाए: भाजपा विधायक सुभाष मील ने उच्च शिक्षा की अनुदान मांगों पर चर्चा में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को घेरने का प्रयास किया. मील ने कहा कि अच्छे कॉलेज होने चाहिए. उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर अच्छा होना चाहिए. अच्छा शिक्षक होना चाहिए. दो साल में भाजपा सरकार ने 150 नए कॉलेज बनाने का काम किया है, जबकि कांग्रेस ने 5 साल में केवल 57 कॉलेज का ही निर्माण करवाया है. हमारी सरकार ने 2 साल में 17 महाविद्यालयों को पीजी महाविद्यालय में बदला है. हमने 2 सालों में 21 पॉलिटेक्निक कॉलेज खोले हैं, जबकि कांग्रेस में केवल 5 साल में पांच पॉलिटेक्निक कॉलेज ही खोले हैं. यही वजह है कि जब 21 फरवरी को 2 साल बनाम 5 साल आपकी चर्चा होनी थी तो कांग्रेस के लोग सदन से भाग गए, क्योंकि उनके पास कहने को कुछ नहीं था.हमने दो जो साल में काम किए हैं उसका जवाब विपक्ष के पास नहीं था.
उप नेता प्रतिपक्ष ने संघ पर उठाए सवाल तो हंगामा: जनजाति और उच्च शिक्षा की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान उप नेता प्रतिपक्ष रामकेश मीणा की आरएसएस पर टिप्पणी से सदन में हंगामा हुआ. काफी देर नोकझोंक होती रही.रामकेश ने कहा कि जब जनजाति समाज देश की आजादी के लिए गोलियां खा रहा था, तब संघ के लोग कहां थे. आरएसएस के चार नेताओं के नाम बताओ, जिन्होंने देश की आजादी के आंदोलन भाग लिया. इस पर सदन में हंगामा हो गया.
शिक्षा का अधिकार खत्म कर रहे: इससे पहले रामकेश मीणा ने कहा, पूर्व की सरकारों ने एससी-एसटी, ओबीसी और सामान्य वर्ग को ईडब्ल्यूएस आरक्षण दिया और उनको जीने का अधिकार दिया, लेकिन विडंबना है कि पूर्व की सरकार ने जो हमें शिक्षा का अधिकार दिया था उसे संघ खत्म करना चाह रहा है. सभापति ने उन्हें टोका. इस पर मीणा बोले, संघ की स्थापना 1925 में हुई थी जबकि देश 1947 में आजाद हुआ. खुदीराम बोस, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाकउल्ला खान, रामप्रसाद बिस्मिल, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु ने फांसी के फंदे पर झूलते हुए वंदे मातरम का नारा दिया, लेकिन आरएसएस के लोगों से पूछना चाहता हूं कि जब स्वाधीनता सेनानी और जनजाति के लोग अंग्रेजों की गोलियां खा रहे थे, तब आरएसएस के लोग कहां पर थे. इस पर मंत्री अविनाश गहलोत ने कहा कि आरएसएस कांग्रेस के ताबूत में आखिरी कील ठोकेगा. इस पर सभापति ने कहा आप केवल डिमांड पर बोलिए. मीणा ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने हमारे लिए अच्छा काम किया था. मैंने उनकी तारीफ की है अगर कोई हमारे पैर काटने की बात करेगा तो हम कैसे बर्दाश्त करेंगे.
मूल निवासी ही असली नागरिक: उप नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आदिवासी ही भारत के असली नागरिक है क्योंकि वहीं यहां के मूल निवासी हैं. देश की आजादी में सबसे बड़ा योगदान आदिवासी वर्ग का रहा है. पूर्व की सरकारों ने आदिवासी और जनजाति जातियों को आरक्षण देकर मुख्य धारा मिलने का प्रयास किया.


