सुकमा में कांग्रेस ने किया कलेक्टरोरेट घेराव, मनरेगा बचाओ संग्राम की हुंकार, हरीश कवासी बोले- मनरेगा गरीबों की जीवनरेखा
सुकमा के कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरीश कवासी के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया. पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच हल्की धक्का-मुक्की भी हुई.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 26, 2026 at 5:58 PM IST
सुकमा: जिले में गुरुवार को मनरेगा बचाओ संग्राम के बैनर तले कांग्रेस ने कलेक्टोरेट का घेराव किया. इस आंदोलन का नेतृत्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरीश कवासी ने किया. सैकड़ों की संख्या में जुटे कार्यकर्ताओं ने मनरेगा का नाम “VB- जी राम जी” किए जाने और कथित बदलावों के विरोध में जोरदार प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
सुबह से ही शहर के कई हिस्सों से कांग्रेस कार्यकर्ता झंडे-बैनर लेकर रैली के रूप में कलेक्टोरेट की ओर बढ़ने लगे. “मनरेगा बचाओ-गरीब बचाओ”, “मजदूर विरोधी नीति बंद करो” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा. प्रदर्शन को लेकर प्रशासन ने पहले से ही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर रखी थी. कलेक्टोरेट के मुख्य द्वार पर पुलिस बल तैनात था और बैरिकेडिंग कर दी गई थी.
बैरिकेड पर टकराव, पर शांतिपूर्ण ढंग से सौंपा ज्ञापन
जैसे ही रैली कलेक्टोरेट पहुंची, पुलिस ने आगे बढ़ने से रोका. कुछ देर तक कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी रही. युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता बैरिकेड के पास नारेबाजी करने लगे. हरीश कवासी ने मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं को शांत रहने की अपील की और कहा कि उनका संघर्ष लोकतांत्रिक है. इसके बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने तहसीलदार अंबर गुप्ता को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखीं. ज्ञापन में मनरेगा के मूल स्वरूप को बनाए रखने और मजदूरों के हितों से समझौता न करने की मांग प्रमुख रूप से शामिल थी.

मनरेगा गरीबों की जीवनरेखा है- हरीश कवासी
मीडिया से बातचीत में हरीश कवासी ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) देश के करोड़ों गरीबों की जीवनरेखा है. यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का सबसे बड़ा साधन रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि नाम परिवर्तन और कानून में बदलाव के जरिए सरकार योजना की आत्मा को कमजोर करने की कोशिश कर रही है.
मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि गरीबों के सम्मान और अधिकार का प्रतीक है. इसमें किसी भी तरह का छेड़छाड़ गरीबों और मजदूरों के हक पर सीधा हमला है. अगर मनरेगा कमजोर हुई, तो गांव का चूल्हा बुझ जाएगा. कांग्रेस यह होने नहीं देगी. - हरीश कवासी, कांग्रेस नेता

सुकमा जैसे जिले में मनरेगा का महत्व
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सुकमा जैसे आदिवासी और नक्सल प्रभावित जिले में मनरेगा ने हजारों परिवारों को आर्थिक संबल दिया है. खेत-तालाब निर्माण, सड़क मरम्मत और ग्रामीण विकास के छोटे-बड़े कार्यों में स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिला है. यदि योजना कमजोर होती है, तो सबसे ज्यादा असर गरीब और आदिवासी समुदाय पर पड़ेगा.
दिल्ली तक पहुंचेगी आवाज
कांग्रेस ने इस विरोध को “मनरेगा बचाओ संग्राम” नाम दिया है. कवासी ने घोषणा की कि यदि सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा. ब्लॉक स्तर से लेकर जिला स्तर तक धरना-प्रदर्शन किए जाएंगे और जरूरत पड़ी तो राज्यव्यापी आंदोलन भी होगा. कवासी ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस हमेशा से गरीबों और आदिवासियों के अधिकारों के लिए संघर्ष करती रही है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे स्वयं दिल्ली तक आवाज पहुंचाने से पीछे नहीं हटेंगे.
प्रशासन की सतर्कता, पर टकराव टला
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहे. हालांकि कुछ समय के लिए स्थिति गहमागहमी बनी, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन सौंपे जाने के बाद कार्यकर्ता शांतिपूर्वक लौट गए.तहसीलदार अंबर गुप्ता ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया कि मांगों को शासन तक पहुंचाया जाएगा.

