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मनरेगा बदलाव के खिलाफ कांग्रेस सड़कों पर, 45 दिन के संग्राम की घोषणा

पीसीसी अध्यक्ष ने कहा कि इनकी विचारधारा नाथूराम गोडसे की है और हमारी महात्मा गांधी की है, इसलिए कांग्रेस ने गांधीजी का नाम दिया था.

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मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान की बैठक में मौजूद कांग्रेस नेता (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 8, 2026 at 2:55 PM IST

3 Min Read
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जयपुर: मनरेगा का नाम बदलने और इसमें किए गए कई बदलावों के विरोध में कांग्रेस बड़ा आंदोलन करेगी. इसी के तहत कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ 45 दिन तक सड़कों पर उतरने का निर्णय किया है. इस आंदोलन का नाम 'मनरेगा बचाओ संग्राम' रखा गया है. इस संबंध में गुरुवार को नारायण सिंह सर्किल स्थित तोतुका भवन में कांग्रेस ने अपनी प्रदेश कार्यकारिणी, जिलाध्यक्षों, सांसदों, विधायकों, पूर्व विधायकों, पूर्व मंत्रियों और विभाग-प्रकोष्ठों की बैठक बुलाई. इसमें आंदोलन की रूपरेखा तय की गई.

इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलना कोई बड़ी बात नहीं है, क्योंकि इनकी विचारधारा नाथूराम गोडसे की विचारधारा है और हमारी महात्मा गांधी की. उन्होंने कहा कि इसलिए हमने महात्मा गांधी का नाम दिया था. यूपीए सरकार के समय 'राइट टू वर्क' यानी 'काम का अधिकार' दिया गया था, उसे इन्होंने खत्म कर दिया. पीसीसी चीफ ने कहा कि ये दिखाने के लिए कह दिया कि सौ दिन के बजाय सवा सौ दिन. जब औसत रेशियो (अनुपात) ही तीस-पैंतीस दिन नहीं आ रहा है, तो ये सवा सौ दिन किसके लिए कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि नरेगा के पांच हजार करोड़ रुपए केंद्र सरकार राजस्थान को नहीं दे रही है, दो साल से बकाया पड़े हैं. ऊपर से चालीस प्रतिशत बजट प्रावधान का हिस्सा जो है, वो अब राज्य सरकारों को देना पड़ेगा.

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अभियान को लेकर डोटासरा ने कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने पैंतालीस दिन तक 'मनरेगा बचाओ संग्राम' अभियान चलाने का निर्देश दिया है. इसके तहत कांग्रेस गांव-गांव में, चौपालों में जाएगी. उस पर चर्चा होगी. इसके तहत 10 तारीख को सभी जिलों में प्रेस कॉन्फ्रेंस, 11 तारीख को उपवास और 12 तारीख से गांव-गांव, चौपालों में जाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा. अभियान के अंतिम चरण में बड़ी सभाएं भी होंगी.

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नेता प्रतिपक्ष जूली का सरकार पर हमला: नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि मनरेगा का उद्देश्य गांव में पलायन रोकना, मजदूरों को शोषण से बचाना और ग्रामीण बुनियादी ढांचा मजबूत करना था, जो सफल रहा. उनका आरोप है कि सरकार का वास्तविक मकसद इस योजना को खत्म करना है. जूली ने कहा कि नाम बदलना महज नाटक है. असल नीयत गरीब के पेट पर लात मारना है. अब दिल्ली से तय होगा कि राजस्थान को कितना फंड मिलेगा और मजदूर क्या काम करेंगे. मुख्यमंत्री खुद सरपंच रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि यह व्यवस्था ग्रामीणों के लिए आफत बनेगी. राज्य सरकार के पास पेंशन, दवा, किताबों का पैसा नहीं है, वह मनरेगा का अतिरिक्त 40% बोझ कैसे उठाएगी? जूली ने आरोप लगाया कि सरकार का एकमात्र एजेंडा गरीबों, किसानों और मजदूरों को लगातार निशाना बनाकर उन्हें परेशान करना है, जैसा कि तीन कृषि कानूनों और श्रम कानूनों के मामले में देखा गया.