'नाच न जाने तो आंगन टेढ़ा' जानें, पेसा नियमावली को लेकर किसने और क्यों कहा!
पेसा नियमावली को लेकर प्रदेश में हो रहे विरोध को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर पलटवार किया है.

Published : January 6, 2026 at 8:59 PM IST
रांची: पेसा को लेकर जारी सियासी बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रहा है. भाजपा नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन द्वारा निशाना साधे जाने के बाद कांग्रेस ने मंगलवार शाम जमकर पलटवार किया. राजकीय अतिथिशाला में मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, सांसद सुखदेव भगत और विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने भाजपा नेताओं के बयान की तीखी निंदा की.
इस मौके पर केशव महतो कमलेश ने नेता चंपाई सोरेन के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि पेसा कानून सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि आदिवासी स्वशासन की आत्मा है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने वर्षों तक शासन किया, उनके कार्यकाल में आदिवासियों की न तो जमीन सुरक्षित रही, न जंगल और न ही अधिकार. आज वही लोग पेसा को लेकर भ्रम फैलाकर आदिवासी समाज को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं.
बीजेपी को आदिवासी के धर्म और संस्कृतिक से कोई सरोकार नहीं: सुखदेव भगत
सुखदेव भगत ने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि सरना धर्म कोड के मुद्दे पर भाजपा क्यों मौन है, जबकि गठबंधन सरकार ने इसे विधानसभा से पारित कर केंद्र को भेज दिया है. इससे स्पष्ट है कि भाजपा को आदिवासियों के धर्म, संस्कृति और पहचान से कोई सरोकार नहीं है. उन्होंने कहा कि पेसा कानून से महात्मा गांधी के गांवों को मजबूत करने के सपने को मजबूती मिली है.
वहीं विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने कहा कि भाजपा ने अपने शासनकाल में 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून से छेड़छाड़ करने का प्रयास किया था और लैंड बैंक के माध्यम से आदिवासियों की जमीन छीनने की नीति अपनाई. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की नजर झारखंड की जमीन, जंगल और खनिज संपदा पर है, न कि आदिवासियों के हितों पर. कांग्रेस नेताओं ने एक स्वर में कहा कि गठबंधन सरकार आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्राम सभा को वास्तविक अधिकार मिलेंगे. भाजपा की साजिशों को आदिवासी समाज कभी सफल नहीं होने देगा.
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