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'नाच न जाने तो आंगन टेढ़ा' जानें, पेसा नियमावली को लेकर किसने और क्यों कहा!

पेसा नियमावली को लेकर प्रदेश में हो रहे विरोध को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर पलटवार किया है.

BJP ATTACKED OVER PESA RULES
झारखंड प्रदेश कांग्रेस का पीसी (ईटीवी भारत)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : January 6, 2026 at 8:59 PM IST

3 Min Read
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रांची: पेसा को लेकर जारी सियासी बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रहा है. भाजपा नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन द्वारा निशाना साधे जाने के बाद कांग्रेस ने मंगलवार शाम जमकर पलटवार किया. राजकीय अतिथिशाला में मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, सांसद सुखदेव भगत और विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने भाजपा नेताओं के बयान की तीखी निंदा की.

इस मौके पर केशव महतो कमलेश ने नेता चंपाई सोरेन के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि पेसा कानून सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि आदिवासी स्वशासन की आत्मा है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने वर्षों तक शासन किया, उनके कार्यकाल में आदिवासियों की न तो जमीन सुरक्षित रही, न जंगल और न ही अधिकार. आज वही लोग पेसा को लेकर भ्रम फैलाकर आदिवासी समाज को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं.

कांग्रेस नेताओं का बयान (ईटीवी भारत)
नाच न जाने तो आंगन टेढ़ा-सुखदेव भगत
पेसा को लेकर भाजपा नेताओं द्वारा किए जा रहे हमले का जवाब देते हुए कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा है कि भाजपा की राजनीति नाच न जाने तो आंगन टेढ़ा जैसी है. बिना पेसा को ठीक से पढ़े और समझे, भाजपा नेता धार्मिक और भ्रामक बातें फैलाकर आदिवासी समाज को आपस में लड़वाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि यह वही लोग है, जो आदिवासी को वनवासी कहते हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा शासन में लाखों एकड़ आदिवासी जमीन लैंड बैंक में डालकर पूंजीपतियों को सौंपने की साजिश रची गई.

बीजेपी को आदिवासी के धर्म और संस्कृतिक से कोई सरोकार नहीं: सुखदेव भगत

सुखदेव भगत ने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि सरना धर्म कोड के मुद्दे पर भाजपा क्यों मौन है, जबकि गठबंधन सरकार ने इसे विधानसभा से पारित कर केंद्र को भेज दिया है. इससे स्पष्ट है कि भाजपा को आदिवासियों के धर्म, संस्कृति और पहचान से कोई सरोकार नहीं है. उन्होंने कहा कि पेसा कानून से महात्मा गांधी के गांवों को मजबूत करने के सपने को मजबूती मिली है.

वहीं विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने कहा कि भाजपा ने अपने शासनकाल में 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून से छेड़छाड़ करने का प्रयास किया था और लैंड बैंक के माध्यम से आदिवासियों की जमीन छीनने की नीति अपनाई. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की नजर झारखंड की जमीन, जंगल और खनिज संपदा पर है, न कि आदिवासियों के हितों पर. कांग्रेस नेताओं ने एक स्वर में कहा कि गठबंधन सरकार आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्राम सभा को वास्तविक अधिकार मिलेंगे. भाजपा की साजिशों को आदिवासी समाज कभी सफल नहीं होने देगा.

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