विधानसभा में बोले गणेश घोघरा, 'अधिकार और जमीन के लिए हथियार भी उठा सकते हैं आदिवासी'
विधायक गणेश घोघरा ने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली लोग आदिवासियों की जमीन हड़पने की कोशिश कर रहे हैं.

Published : February 25, 2026 at 7:42 PM IST
जयपुर: राजस्थान विधानसभा में आदिवासी अधिकारों और जमीन से जुड़े मुद्दों को लेकर डूंगरपुर से कांग्रेस विधायक गणेश घोघरा ने सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज गांवों में रहता है और उसकी मूलभूत जरूरतों को समझना सरकार की जिम्मेदारी है. घोघरा ने कहा कि आदिवासी कभी शहर की तरफ नहीं आया, बल्कि शहर गांव की तरफ गया और फिर उन्हें नक्सली कहा जाता है. घोघरा ने चेतावनी दी कि यदि जरूरत पड़ी, तो आदिवासी अपने अधिकार और जमीन बचाने के लिए हथियार भी उठा सकते हैं.
'आदिवासी को नक्सली कहा जाता है': घोघरा ने कहा कि आदिवासी कभी शहर की तरफ नहीं आया, बल्कि शहर गांव की तरफ गया और फिर उन्हें नक्सली कहा जाता है. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि जरूरत पड़ी, तो आदिवासी अपने अधिकार और जमीन की रक्षा के लिए हथियार भी उठा सकते हैं. उनका कहना था कि आदिवासियों के पास एक-दो बीघा छोटी जमीन है और वे मजदूरी कर किसी तरह जीवन यापन करते हैं, लेकिन कुछ प्रभावशाली लोग उनकी जमीन हड़पने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों में लंबे समय से बसे लोगों को बेदखल करने की साजिश रची जा रही है. जिस जमीन पर आदिवासी 100 वर्षों से रह रहे हैं, उन्हें हटाने की कोशिश हो रही है. आदिवासियों के हितों पर कुठाराघात हो रहा है.
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'सामाजिक तनाव को जन्म': घोघरा ने गेपसागर झील का मुद्दा उठाते हुए नगर परिषद पर गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना था कि झील की जमीन पर प्लॉट काटकर भूमाफियाओं को बेचा गया है. नाले का पानी भी रोक दिया गया है, जिससे झील के सूखने का खतरा बढ़ गया है. उन्होंने इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की और कहा कि यदि नाले को फिर से नहीं खोला गया, तो भविष्य में जल संकट गहरा सकता है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत बिलड़ी की जमीन बिना पंचायत से एनओसी लिए नगर परिषद के नाम अलॉट कर दी गई. मंत्री से आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासियों की जमीन अमीरों के नाम की जा रही है, जो गंभीर चिंता का विषय है. साथ ही डूंगरिया भील और माला कटारा के इतिहास से जुड़े बोर्ड हटाने का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे कदम सामाजिक तनाव को जन्म दे सकते हैं. दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और बोर्ड पुनः स्थापित करने की मांग भी उन्होंने सदन में रखी.

